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नई नवेली दुल्हन ने पूछा यहां से थाना कितनी दूर है, सासू मां ने कहा बेटा मेरा क्या कसूर है....
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मथुरा। महोली रोड ऋषि नगर स्थित अखिल भारतीय गौतम ब्राह्मण महासभा के महामंत्री धर्मदत्त गौतम के निवास पर महर्षि गौतम की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। धर्मदत्त गौतम ने कहा कि महर्षि गौतम तपस्वी एवं अटूट शिव भक्त थे। इस दौरान हुई काव्य गोष्ठी में कवियों ने काव्य पाठ कर समां बांध दिया। हास्य व्यंग के कवि देवीप्रसाद गौड़ ने कहा कि शादी के दूसरे दिन ही एक नई नवेली दुल्हन ने पूछा, यहां से थाना कितनी दूर है, सासू मां ने कहा बेटा मेरा क्या कसूर है।
कवि विनीत गौतम ने कहा कि किसी के साथ कोई भी यहां पर मर नहीं सकता, दिल की हर जगह को हर कोई भर नहीं सकता, रिश्ते हैं जमाने में मुहब्बत के बहुत, लेकिन मुहब्बत मां के जैसा कोई कर नहीं सकता। बदायूं से आए ओज कवि उमाशंकर राही ने कहा कि उछालो लाख चिंगारी चमन फुंकने नहीं देंगे, अपने हिंद का परचम कभी झुकने नहीं देंगे। मथुरा के प्रसिद्ध कवि डॉ. रमाशंकर पांडेय ने कहा कि गुनाहों की तरफदारी कभी अच्छी नहीं होती, जिंदगी पाप से भारी कभी अच्छी नहीं होती।
गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ.सुरेंद्र शर्मा ने की। रामकृष्ण गौतम, तपेश गौतम, डीएस दीक्षित, भागवताचार्य विजयानंद ऊधौ ने विचार व्यक्त किए। डॉ. सुरेंद्र शर्मा ने समाज को एक होने का सभी से संकल्प लेने का वादा लिया। इनमें योगेश गौतम, ज्ञानेंद्र गौतम, हरिनिवास गौतम, सीता राम शर्मा, लक्ष्मीकांत, मगन, सुभाष गौतम, अनु गौतम, डोरी लाल गौतम, कुशलपाल शर्मा, अनुज कुमार, पुष्पेंद्र शर्मा, आदि मौजूद थे। संचालन धर्मदत्त गौतम ने किया।
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कवि विनीत गौतम ने कहा कि किसी के साथ कोई भी यहां पर मर नहीं सकता, दिल की हर जगह को हर कोई भर नहीं सकता, रिश्ते हैं जमाने में मुहब्बत के बहुत, लेकिन मुहब्बत मां के जैसा कोई कर नहीं सकता। बदायूं से आए ओज कवि उमाशंकर राही ने कहा कि उछालो लाख चिंगारी चमन फुंकने नहीं देंगे, अपने हिंद का परचम कभी झुकने नहीं देंगे। मथुरा के प्रसिद्ध कवि डॉ. रमाशंकर पांडेय ने कहा कि गुनाहों की तरफदारी कभी अच्छी नहीं होती, जिंदगी पाप से भारी कभी अच्छी नहीं होती।
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गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ.सुरेंद्र शर्मा ने की। रामकृष्ण गौतम, तपेश गौतम, डीएस दीक्षित, भागवताचार्य विजयानंद ऊधौ ने विचार व्यक्त किए। डॉ. सुरेंद्र शर्मा ने समाज को एक होने का सभी से संकल्प लेने का वादा लिया। इनमें योगेश गौतम, ज्ञानेंद्र गौतम, हरिनिवास गौतम, सीता राम शर्मा, लक्ष्मीकांत, मगन, सुभाष गौतम, अनु गौतम, डोरी लाल गौतम, कुशलपाल शर्मा, अनुज कुमार, पुष्पेंद्र शर्मा, आदि मौजूद थे। संचालन धर्मदत्त गौतम ने किया।
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