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Mathura: धूमधाम से निकाली लठामार होली की प्रथम चौपाई, गुलाल की बारिश में सराबोर हुए श्रद्धालु; ये है मान्यता
Thu, 27 Feb 2025 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Feb 2025 12:31 AM IST
सार
गोस्वामी समाज की ओर से ढप, मृदंग, चंग, उपंग, झांझ, झालरियों की धुनों पर संध्या आरती के बाद प्रथम चौपाई निकाली गई। लोग भक्तिभाव में डूबे हुए प्रथम चौपाई में गाए जाने वाले पदों को गाते हुए चल रहे थे।
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Braj Ki Holi
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मथुरा के बरसाना में राधारानी और श्रीकृष्ण के प्रेम के प्रतीक लठामार होली की प्रथम चौपाई बुधवार को धूमधाम से निकाली गई। अबीर-गुलाल की बारिश व होली के पदों को सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। अबीर-गुलाल से सराबोर गोस्वामी समाज के लोग पद गायन व नृत्य करते हुए लाडली जी मंदिर से रंगीली गली स्थित रंगेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे।
श्रीजी की नगरी में वसंत पंचमी से होली महोत्सव की धूम है। गोस्वामी समाज के मुखिया रामभरोसे गोस्वामी के नेतृत्व में बुधवार शाम ढप, मृदंग, चंग, उपंग, झांझ, झालरियों की धुनों पर संध्या आरती के बाद प्रथम चौपाई निकाली गई। गोस्वामी समाज के लोग भक्तिभाव में डूबे हुए प्रथम चौपाई में गाए जाने वाले पदों को गाते हुए चल रहे थे।
मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन सभी सखियां शंकर जी का व्रत रखती हैं। इस कारण राधा रानी सखियों के साथ संकेतवट में खेलने नहीं जातीं हैं। ऐसे में श्रीकृष्ण राधा रानी के दर्शन करने छद्म रूप धारण करके विलासगण पर आते हैं।
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इस पर सखियां राधारानी से कहतीं हैं कि ‘बाघंबर ओड़े सांवरौ यामें जोगी कौ हुनर कौन’ राधारानी अपने साथ सखियों को लेकर सांकारी खोर में पहुंचकर छद्म रूप धारी भगवान श्रीकृष्ण को पहचान जाती हैं। रंगीली गली में कृष्ण को घेर लेतीं हैं और श्रीकृष्ण को रंग गुलाल में सराबोर कर नंदभवन भेजतीं हैं।
इसी लीला के अनुसार, गोस्वामी समाज रंगेश्वर महादेव मंदिर तक चौपाई निकालते हैं। द्वितीय चौपाई 7 मार्च को लड्डू होली के दिन निकाली जाएगी। इसके अगले दिन यानी आठ मार्च को बरसाना में प्रसिद्ध लठामार होली का आयोजन किया जाएगा।
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श्रीजी की नगरी में वसंत पंचमी से होली महोत्सव की धूम है। गोस्वामी समाज के मुखिया रामभरोसे गोस्वामी के नेतृत्व में बुधवार शाम ढप, मृदंग, चंग, उपंग, झांझ, झालरियों की धुनों पर संध्या आरती के बाद प्रथम चौपाई निकाली गई। गोस्वामी समाज के लोग भक्तिभाव में डूबे हुए प्रथम चौपाई में गाए जाने वाले पदों को गाते हुए चल रहे थे।
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मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन सभी सखियां शंकर जी का व्रत रखती हैं। इस कारण राधा रानी सखियों के साथ संकेतवट में खेलने नहीं जातीं हैं। ऐसे में श्रीकृष्ण राधा रानी के दर्शन करने छद्म रूप धारण करके विलासगण पर आते हैं।
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इस पर सखियां राधारानी से कहतीं हैं कि ‘बाघंबर ओड़े सांवरौ यामें जोगी कौ हुनर कौन’ राधारानी अपने साथ सखियों को लेकर सांकारी खोर में पहुंचकर छद्म रूप धारी भगवान श्रीकृष्ण को पहचान जाती हैं। रंगीली गली में कृष्ण को घेर लेतीं हैं और श्रीकृष्ण को रंग गुलाल में सराबोर कर नंदभवन भेजतीं हैं।
इसी लीला के अनुसार, गोस्वामी समाज रंगेश्वर महादेव मंदिर तक चौपाई निकालते हैं। द्वितीय चौपाई 7 मार्च को लड्डू होली के दिन निकाली जाएगी। इसके अगले दिन यानी आठ मार्च को बरसाना में प्रसिद्ध लठामार होली का आयोजन किया जाएगा।