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Mathura News: दांत से खुलेगा मौत का राज
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मथुरा। रेलवे स्टेशन पर वर्षों से बंद पड़ी आरआरआई (रूट रिले इंटरलॉकिंग) केबिन में 16 जुलाई को मिले मानव अवशेषों का 72 घंटे की समयावधि पूरी होने के बाद सोमवार को पोस्टमार्टम कराया गया। हालांकि पोस्टमार्टम में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि अवशेष पुरुष के हैं या किसी महिला के। ऐसे में अब एक दांत को डीएनए जांच के लिए भेजा गया है। डीएनए रिपोर्ट के बाद एआई की मदद से चेहरे का स्केच तैयार कर उसकी पहचान के प्रयास किए जाएंगे।
जीआरपी थाना प्रभारी निरीक्षक प्रदीप सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी कि अवशेष पुरुष के हैं या महिला के। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद एआई तकनीक की सहायता से मृतक के चेहरे का संभावित स्केच तैयार कराया जाएगा। इसके आधार पर गुमशुदगी के रिकॉर्ड और अन्य सूचनाओं से मिलान कर पहचान कराने के प्रयास किए जाएंगे। मामले की जांच के लिए जीआरपी ने वरिष्ठ उपनिरीक्षक के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई है। टीम डीएनए रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।
पोस्टमार्टम के बाद कराया अंतिम संस्कार
पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जीआरपी ने मानव अवशेषों का अंतिम संस्कार करा दिया हालांकि जांच प्रक्रिया जारी रहेगी और डीएनए रिपोर्ट आने के बाद पहचान और मौत के कारणों से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
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दांत में लंबे समय तक मौजूद रहता है डीएनए
फोरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक खुले या प्रतिकूल वातावरण में पड़े मानव अवशेषों में डीएनए अक्सर नष्ट हो जाता है, लेकिन दांत के भीतर मौजूद पल्प में डीएनए लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है। यही कारण है कि ऐसे मामलों में दांत को पहचान का सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य माना जाता है।
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जीआरपी थाना प्रभारी निरीक्षक प्रदीप सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी कि अवशेष पुरुष के हैं या महिला के। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद एआई तकनीक की सहायता से मृतक के चेहरे का संभावित स्केच तैयार कराया जाएगा। इसके आधार पर गुमशुदगी के रिकॉर्ड और अन्य सूचनाओं से मिलान कर पहचान कराने के प्रयास किए जाएंगे। मामले की जांच के लिए जीआरपी ने वरिष्ठ उपनिरीक्षक के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई है। टीम डीएनए रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।
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पोस्टमार्टम के बाद कराया अंतिम संस्कार
पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जीआरपी ने मानव अवशेषों का अंतिम संस्कार करा दिया हालांकि जांच प्रक्रिया जारी रहेगी और डीएनए रिपोर्ट आने के बाद पहचान और मौत के कारणों से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
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दांत में लंबे समय तक मौजूद रहता है डीएनए
फोरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक खुले या प्रतिकूल वातावरण में पड़े मानव अवशेषों में डीएनए अक्सर नष्ट हो जाता है, लेकिन दांत के भीतर मौजूद पल्प में डीएनए लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है। यही कारण है कि ऐसे मामलों में दांत को पहचान का सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य माना जाता है।