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नहीं बंट सकीं दवाएं, तड़पते रहे मरीज
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Wed, 21 Sep 2016 11:52 PM IST
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मरीज
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फार्मेसिस्टों की हड़ताल से हाहाकार मचने लगा है। बुधवार को जिला अस्पताल में दवाओं का वितरण नहीं हुआ। इलाज की आस लेकर पहुंचे मरीज निराश होकर लौट गए। इमरजेंसी सेवाएं भी बाधित रहीं। वहीं फार्मेसिस्टों ने अपने आंदोलन को और तेज करने का एलान कर दिया है।
नए पदों के सृजन और वेतन विसंगति को दूर करने आदि मांगों के लिए फार्मेसिस्ट हड़ताल पर हैं। हड़ताल के दूसरे दिन जिला अस्पताल में इमरजेंसी सेवाओं को पूरी तरह से ठप कर दिया गया। देहात क्षेत्र के सभी सरकारी अस्पतालों के फार्मेसिस्ट भी जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन में शामिल हुए।
वहीं कोसों दूर से दवाई लेने पहुंचे लोगों को घंटों लाइन में लगने के बाद भी दवा नहीं मिल सकी। किसी को एक्सरे कराना था तो किसी को ब्लड की जांच। लेकिन सभी जगह तालाबंदी होने से लोग परेशान रहे। जिला अस्पताल से ही करीब डेढ़ हजार मरीज बगैर दवा लिए लौट गए। जिन लोगों को अपने मरीज की जांचें कराने थीं उन्होंने मजबूर होकर पैथ लैब का सहारा लिया। नर्सिंग होम में भी मरीजों को दिखाया गया।
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प्राइवेट चिकित्सकों के यहां लगी लाइन
जब जिला अस्पताल में इलाज नहीं मिला तो परिवार वाले बुखार से तप रहे अपने परिवारीजनों को नर्सिंग होम ले गए। शहर के नर्सिंग होम में भी मरीजों की लाइन लगी रही, लेकिन यहां इलाज के लिए उन्हें मोटी फीस देनी पड़ी। इस समय हजारों लोग बुखार की चपेट में हैं। कोई अस्पताल ऐसा नहीं है जहां बुखार के रोगियों की लाइन न लगी हो। पैथ लैब पर ब्लड की जांच कराने वालों की भीड़ दिख जाएगी। हर गांव और मुहल्ले में इस समय बुखार का हल्ला मचा है।
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नए पदों के सृजन और वेतन विसंगति को दूर करने आदि मांगों के लिए फार्मेसिस्ट हड़ताल पर हैं। हड़ताल के दूसरे दिन जिला अस्पताल में इमरजेंसी सेवाओं को पूरी तरह से ठप कर दिया गया। देहात क्षेत्र के सभी सरकारी अस्पतालों के फार्मेसिस्ट भी जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन में शामिल हुए।
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वहीं कोसों दूर से दवाई लेने पहुंचे लोगों को घंटों लाइन में लगने के बाद भी दवा नहीं मिल सकी। किसी को एक्सरे कराना था तो किसी को ब्लड की जांच। लेकिन सभी जगह तालाबंदी होने से लोग परेशान रहे। जिला अस्पताल से ही करीब डेढ़ हजार मरीज बगैर दवा लिए लौट गए। जिन लोगों को अपने मरीज की जांचें कराने थीं उन्होंने मजबूर होकर पैथ लैब का सहारा लिया। नर्सिंग होम में भी मरीजों को दिखाया गया।
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प्राइवेट चिकित्सकों के यहां लगी लाइन
जब जिला अस्पताल में इलाज नहीं मिला तो परिवार वाले बुखार से तप रहे अपने परिवारीजनों को नर्सिंग होम ले गए। शहर के नर्सिंग होम में भी मरीजों की लाइन लगी रही, लेकिन यहां इलाज के लिए उन्हें मोटी फीस देनी पड़ी। इस समय हजारों लोग बुखार की चपेट में हैं। कोई अस्पताल ऐसा नहीं है जहां बुखार के रोगियों की लाइन न लगी हो। पैथ लैब पर ब्लड की जांच कराने वालों की भीड़ दिख जाएगी। हर गांव और मुहल्ले में इस समय बुखार का हल्ला मचा है।