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काठमांडू में फंसे मथुरा के सोनू पारासर
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 27 Apr 2015 11:31 PM IST
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कंपनी टूर पर नेपाल गए सोनू पारासर को पिछले तीन दिन से भोजन नहीं मिला है। काठमांडू एयरपोर्ट पर ठंड के बावजूद खुले आसमान के नीचे ही पनाह लेनी पड़ रही है। आपदा के बाद परिवारीजनों को फोन कर सोनू ने इसकी जानकारी दी।
शहर कोतवाली क्षेत्र में गली विवेकानंद निवासी सोनू पारासर पुत्र देवेंद्र पारासर 18 अप्रैल को कंपनी टूर पर दिल्ली से नेपाल के लिए रवाना हुए थे। उनकी कंपनी इंडिया प्रमोट लिमिटेड मेडिकल संबंधी उपकरण बनाती है। इन्हीं की बिक्री के संदर्भ में सोनू को नेपाल भेजा गया था।
तीन दिन पहले भारत के साथ नेपाल में आए तेज भूकंप के कारण वह काठमांडू में ही फंस गए हैं। इससे नेपाल के तहस-नहस होने की मिल रही खबरों को लेकर पिता देवेंद्र पारासर सहित परिवार के अन्य सदस्यों का बुरा हाल था। अब सोनू पारासर का ही फोन परिवारीजनों के पास आया है। उनकी बहन सुंदर वोमेंस पॉलीटेकिभनक की निदेशक रचना सिंह ने बताया कि नेपाल के हालत बहुत खराब हैं।
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उनके भाई ने बताया है कि तीन दिन से खाने के लिए कुछ भी नहीं मिला है। पीने के लिए पानी की छोटी सी बोलत 300 रुपये में खरीदी है। काठमांडू एयरपोर्ट पर ठंड के बावजूद भूकंप के कारण खुले मैदान में लोगों को रखा जा रहा है। कोई विमान भी यहां आने को नहीं मिल रहा है। स्थितियां बहुत चिंताजनक हैं।
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शहर कोतवाली क्षेत्र में गली विवेकानंद निवासी सोनू पारासर पुत्र देवेंद्र पारासर 18 अप्रैल को कंपनी टूर पर दिल्ली से नेपाल के लिए रवाना हुए थे। उनकी कंपनी इंडिया प्रमोट लिमिटेड मेडिकल संबंधी उपकरण बनाती है। इन्हीं की बिक्री के संदर्भ में सोनू को नेपाल भेजा गया था।
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तीन दिन पहले भारत के साथ नेपाल में आए तेज भूकंप के कारण वह काठमांडू में ही फंस गए हैं। इससे नेपाल के तहस-नहस होने की मिल रही खबरों को लेकर पिता देवेंद्र पारासर सहित परिवार के अन्य सदस्यों का बुरा हाल था। अब सोनू पारासर का ही फोन परिवारीजनों के पास आया है। उनकी बहन सुंदर वोमेंस पॉलीटेकिभनक की निदेशक रचना सिंह ने बताया कि नेपाल के हालत बहुत खराब हैं।
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उनके भाई ने बताया है कि तीन दिन से खाने के लिए कुछ भी नहीं मिला है। पीने के लिए पानी की छोटी सी बोलत 300 रुपये में खरीदी है। काठमांडू एयरपोर्ट पर ठंड के बावजूद भूकंप के कारण खुले मैदान में लोगों को रखा जा रहा है। कोई विमान भी यहां आने को नहीं मिल रहा है। स्थितियां बहुत चिंताजनक हैं।