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Mathura News: महंगा बेचा, पर एथेनॉल किससे बनाया
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छाता। छाता-शेरगढ़ रोड पर स्थित एथेनॉल बनाने वाली एलाइंस डिस्टलरी फैक्टरी सवालों के घेरे में आ गई है। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय को भी इसकी जानकारी दी है। बताया जा रहा कि जो चावल एफसीआई से लिया जा रहा था उसकी खपत बाजारों में ऊंचे दामों में की जा रही थी और राशन डीलरों से सस्ते दामों पर चावल खरीद कर एथेनॉल बनाया जा रहा था। दो साल से यह खेल चलता आ रहा है। हालांकि जांच में मामले की परतें खुलने की संभावना है। इधर, पुलिस ने बुधवार देर रात फैक्टरी के एमडी समेत तीन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार, एलाइंस डिस्टलरी फैक्टरी को सरकार द्वारा एथेनॉल बनाने के लिए भारी मात्रा में त्रैमासिक चावल आवंटित किया जाता है। वित्तीय वर्ष में मई से जुलाई तक की अवधि के लिए फैक्टरी को 6500 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया गया था। 10 हजार क्विंटल चावल की अंतिम खेप 24 से 30 जून के बीच में एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) के गोदाम से उठान किया गया। इतनी भारी मात्रा में उठान और उसके तुरंत बाद बाजार में बिक्री ने अधिकारियों को चौंका दिया है। अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में एफसीआई गोदाम के रिकॉर्ड सही पाए गए हैं, लेकिन फैक्टरी प्रबंधन सवालों के घेरे में आ गया है। जांच टीम के सामने अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि एथेनॉल के लिए आवंटित चावल बाजार में बेचा जा रहा था तो फैक्टरी के भीतर एथेनॉल का उत्पादन किस चीज से हो रहा था?
शुरुआत में प्रबंधन द्वारा मक्के से उत्पादन की बात सामने आई, लेकिन तकनीकी रूप से मक्के से एथेनॉल बनाना चावल की तुलना में बेहद खर्चीला और महंगा सौदा साबित होता है। टीम का मानना है कि मामले की तमाम कड़ियों को जोड़ने पर कई राजफाश होंगे। फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक टीम फैक्टरी के स्टॉक और वित्तीय लेन-देन की जांच जुटी है। एसडीएम वैभव गुप्ता ने बताया कि फिलहाल कई बिंदुओं पर जांच जारी है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसी आधार पर आगे की दिशा तय की जाएगी।
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जिला स्तरीय टीम पर नहीं था मॉनिटरिंग का जिम्मा
बताया जा रहा है कि एफसीआई को सीधे शासन से चावल जारी करने के निर्देश थे, लेकिन जिला स्तर पर किसी भी प्रशासनिक विंग के पास इसकी मॉनिटरिंग का कोई जिम्मा या रिकॉर्ड नहीं था। डिस्टलरी में वास्तव में कितना चावल पहुंच रहा है और उससे कितना एथेनॉल तैयार कर सरकार को दिया। यह भी जांच का विषय है। इधर, सूत्रों ने बताया कि जिले के कुछ राशन डीलर चावल की कालाबाजारी करते हैं, जो एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को भी कुछ चावल पहुंचाया जाता है। फिलहाल यह जांच में स्पष्ट हो सकेगा कि फैक्टरी प्रबंधन एथेनॉल का लक्ष्य कैसे पूरा करता था।
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फैक्टरी के एमडी समेत तीन पर प्राथमिकी
इधर, पुलिस ने बुधवार रात को छाता पुलिस ने फैक्टरी के एमडी संजय सांगवान और दोनों वाहनों के चालक संतकबीर नगर के गांव लुहेर निवासी अमरजीत गुप्ता और फिरोजाबाद के करौरा बिजरू निवासी सुबोध कुमार के खिलाफ पूर्ति निरीक्षक की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कराई है। डीएम चंद्रप्रकाश सिंह ने एडीएम नमामि गंगे नंद प्रकाश मौर्य की अध्यक्षता में जांच के लिए छह सदस्यीय टीम का गठन किया है। जांच जारी है।
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अधिकारियों के अनुसार, एलाइंस डिस्टलरी फैक्टरी को सरकार द्वारा एथेनॉल बनाने के लिए भारी मात्रा में त्रैमासिक चावल आवंटित किया जाता है। वित्तीय वर्ष में मई से जुलाई तक की अवधि के लिए फैक्टरी को 6500 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया गया था। 10 हजार क्विंटल चावल की अंतिम खेप 24 से 30 जून के बीच में एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) के गोदाम से उठान किया गया। इतनी भारी मात्रा में उठान और उसके तुरंत बाद बाजार में बिक्री ने अधिकारियों को चौंका दिया है। अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में एफसीआई गोदाम के रिकॉर्ड सही पाए गए हैं, लेकिन फैक्टरी प्रबंधन सवालों के घेरे में आ गया है। जांच टीम के सामने अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि एथेनॉल के लिए आवंटित चावल बाजार में बेचा जा रहा था तो फैक्टरी के भीतर एथेनॉल का उत्पादन किस चीज से हो रहा था?
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शुरुआत में प्रबंधन द्वारा मक्के से उत्पादन की बात सामने आई, लेकिन तकनीकी रूप से मक्के से एथेनॉल बनाना चावल की तुलना में बेहद खर्चीला और महंगा सौदा साबित होता है। टीम का मानना है कि मामले की तमाम कड़ियों को जोड़ने पर कई राजफाश होंगे। फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक टीम फैक्टरी के स्टॉक और वित्तीय लेन-देन की जांच जुटी है। एसडीएम वैभव गुप्ता ने बताया कि फिलहाल कई बिंदुओं पर जांच जारी है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसी आधार पर आगे की दिशा तय की जाएगी।
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जिला स्तरीय टीम पर नहीं था मॉनिटरिंग का जिम्मा
बताया जा रहा है कि एफसीआई को सीधे शासन से चावल जारी करने के निर्देश थे, लेकिन जिला स्तर पर किसी भी प्रशासनिक विंग के पास इसकी मॉनिटरिंग का कोई जिम्मा या रिकॉर्ड नहीं था। डिस्टलरी में वास्तव में कितना चावल पहुंच रहा है और उससे कितना एथेनॉल तैयार कर सरकार को दिया। यह भी जांच का विषय है। इधर, सूत्रों ने बताया कि जिले के कुछ राशन डीलर चावल की कालाबाजारी करते हैं, जो एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को भी कुछ चावल पहुंचाया जाता है। फिलहाल यह जांच में स्पष्ट हो सकेगा कि फैक्टरी प्रबंधन एथेनॉल का लक्ष्य कैसे पूरा करता था।
फैक्टरी के एमडी समेत तीन पर प्राथमिकी
इधर, पुलिस ने बुधवार रात को छाता पुलिस ने फैक्टरी के एमडी संजय सांगवान और दोनों वाहनों के चालक संतकबीर नगर के गांव लुहेर निवासी अमरजीत गुप्ता और फिरोजाबाद के करौरा बिजरू निवासी सुबोध कुमार के खिलाफ पूर्ति निरीक्षक की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कराई है। डीएम चंद्रप्रकाश सिंह ने एडीएम नमामि गंगे नंद प्रकाश मौर्य की अध्यक्षता में जांच के लिए छह सदस्यीय टीम का गठन किया है। जांच जारी है।