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Mathura: श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर की दुकानें होंगी खाली, दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए बनेगा रैंप

Tue, 18 Nov 2025 09:47 AM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अरुन पाराशर Updated Tue, 18 Nov 2025 09:47 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने सभी दुकानों को खाली करने का आदेश दिया है। दुकानें खाली होने के बाद वहां पर दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए रैंप और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। 

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Shops in the Sri Krishna Janmasthan complex will be vacated on orders of High Court
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने शपथपत्र दिया कि अब वह इन दुकानों को किराये पर नहीं उठाएंगे। श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में स्थित दुकानें खाली होने के बाद श्रद्धालुओं के हित के लिए इनका प्रयोग किया जाएगा।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि ट्रायल कोर्ट ने 30 अगस्त 2025 को भी उनके पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन प्रतिवादियों ने इस निर्णय को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने भी श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के हित में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सभी दुकानों को खाली करने का आदेश दिया है। उन्होंने बताया कि दुकानें खाली होने के बाद वहां पर दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए रैंप और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। 
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साथ ही कुछ दुकानों को श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए भी विकसित किया जाएगा। ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को कोई परेशानी नहीं उठानी पड़े। दुकानों के अनाधिकृत कब्जे के चलते वहां पर कोई निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा था, लेकिन अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह रास्ता साफ कर दिया है।
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दुकानदारों की याचिकाएं खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में दुकानों के कब्जे को लेकर चल रहे 25 साल से विवाद को समाप्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि संस्था एक सार्वजनिक धार्मिक एवं धर्मार्थ ट्रस्ट है। उसकी संपत्तियां यूपी किराया कानून के दायरे से बाहर हैं। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने दुकानें खाली करने का आदेश देते हुए दुकानदारों की याचिकाएं खारिज कर दीं। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने अशोक राघव, पदमा राघव व तीन अन्य की याचिका पर दिया है।

1944 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में श्रीकृष्ण जन्मस्थान के जीर्णोद्धार का काम शुरू हुआ था। 1951 में जुगल किशोर बिड़ला ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की स्थापना की। 1958 में इसके प्रबंधन के लिए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान नामक सोसाइटी पंजीकृत कराई। संस्थान ने परिसर के अंदर कुछ दुकानें बनवाकर उन्हें लाइसेंस के आधार पर 11 महीने के लिए अशोक राघव, पद्मा राघव और हरीश राघव को किराये पर दी थी। संस्थान ने 2000-2002 के दौरान इनके खिलाफ बेदखली के मुकदमे दायर किए। ट्रायल कोर्ट ने 30 अगस्त 2025 के आदेश से संस्थान के पक्ष में फैसला सुनाया। किरायेदारों ने इसको हाईकोर्ट में चुनौती दी।

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि संस्थान एक सार्वजनिक धार्मिक या धर्मार्थ ट्रस्ट नहीं है। इसलिए उत्तर प्रदेश अर्बन बिल्डिंग एक्ट-1972 लागू होना चाहिए, जो किरायेदारों को ज्यादा सुरक्षा देता है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान के सचिव कपिल शर्मा के पास उनके खिलाफ मुकदमा दायर करने का अधिकार नहीं था। वहीं, प्रतिवादी संस्थान अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी ने दलील दी कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थान पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में है। दुकानों पर अनधिकृत कब्जे के चलते वहां पर दिव्यांगों व श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है।


कोर्ट ने संस्थान को सार्वजनिक धार्मिक और धर्मार्थ संस्थान माना। कहा, संस्थान के संविधान के मुताबिक सचिव और संयुक्त सचिव को संस्थान की तरफ से मुकदमे चलाने का पूरा अधिकार है। कपिल शर्मा के अधिकार पर संस्थान के किसी भी ट्रस्टी या सदस्य ने आपत्ति नहीं की। इसलिए किरायेदार इस आधार पर मुकदमे को चुनौती नहीं दे सकते।
 
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