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‘भक्ति और प्रेमरस का समुद्र है शरद पूर्णिमा’
ब्यूरा, अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 25 Oct 2015 08:19 PM IST
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परिक्रमा मार्ग स्थित कृष्णकृपा धाम में आयोजित तीन दिवसीय शरदोत्सव धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मध्य रविवार से शुरू हो गया।
इसमें आयोजित संत सम्मेलन में महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि शरद पूर्णिमा को भक्ति और प्रेम के रस का समुद्र माना गया है। इसको कन्हैया की प्रेम वंशी का प्रेम नाद और जीवात्मा व परमात्मा के रास रस का आनंद भी कहा जाता है।
स्वामी गोपालशरण देवाचार्य ने कहा कि शरद पूर्णिमा जीवन को एक नई प्रेरणा देने के साथ जीवन के उत्थान का आधार और उसे सही दिशा दिखाने का माध्यम भी है।
स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि शरद पूर्णिमा महालक्ष्मी का पर्व है। महालक्ष्मी धन के साथ यश, उन्नति, सौभाग्य, सुंदरता और सहयोग की देवी भी हैं।
इस अवसर पर बाबा भूपेंद्र सिंह, ज्ञानचंद्र चावला, रमेशचंद्र, कृष्ण केशवदेव, शक्ति महाराज, वासुदेव शरण, स्वामी महेशानंद सरस्वती, महंत फूलडोल बिहारीदास आदि उपस्थित थे।
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इसमें आयोजित संत सम्मेलन में महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि शरद पूर्णिमा को भक्ति और प्रेम के रस का समुद्र माना गया है। इसको कन्हैया की प्रेम वंशी का प्रेम नाद और जीवात्मा व परमात्मा के रास रस का आनंद भी कहा जाता है।
स्वामी गोपालशरण देवाचार्य ने कहा कि शरद पूर्णिमा जीवन को एक नई प्रेरणा देने के साथ जीवन के उत्थान का आधार और उसे सही दिशा दिखाने का माध्यम भी है।
स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि शरद पूर्णिमा महालक्ष्मी का पर्व है। महालक्ष्मी धन के साथ यश, उन्नति, सौभाग्य, सुंदरता और सहयोग की देवी भी हैं।
इस अवसर पर बाबा भूपेंद्र सिंह, ज्ञानचंद्र चावला, रमेशचंद्र, कृष्ण केशवदेव, शक्ति महाराज, वासुदेव शरण, स्वामी महेशानंद सरस्वती, महंत फूलडोल बिहारीदास आदि उपस्थित थे।
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