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मथुरा में श्रीकृष्ण मंदिर बनते देखना बाकी : बिट्टा
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संत प्रेमानंद से चर्चा करते पंजाब के पूर्व एमएस बिट्टा।
वृंदावन। एंटी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष और पंजाब सरकार के पूर्व मंत्री मनिंदरजित सिंह बिट्टा ने कहा कि हमने अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण और काशी में ज्ञानवापी को मुक्त होते देखा है, अब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भव्य मंदिर भी बनते देखना चाहते हैं। मुगल आक्रांताओं ने हमारे मंदिरों को लूट एवं तोड़कर अवैध निर्माण किया। मुस्लिम भी बाहरी आक्रांताओं को अपना न मानकर अगर मंदिर निर्माण में सहयोग करें तो एक मिसाल कायम होगी ।
दो दिवसीय ब्रज यात्रा पर पहुंचे बिट्टा मंगलवार को सबसे पहले श्रीहित राधाकेलिकुंज आश्रम पहुंचे और संत प्रेमानंद महाराज का आशीर्वाद लिया। उन्हें दुपट्टा व प्रसाद भेंट किया। मुलाकात के दौरान बिट्टा भावुक नजर आए। बिट्टा ने कहा कि जीवन में उन्होंने अनेक संघर्ष देखे हैं और कई आतंकी हमलों का सामना किया है। कई जवान शहीद हो गए लेकिन वह आज भी जीवित हैं, जो ईश्वर और संतों की कृपा का परिणाम है। बिट्टा ने संत प्रेमानंद से कहा कि उनकी सभी इच्छाएं पूरी हो चुकी हैं और वह अपनी किडनी उन्हें समर्पित करना चाहते हैं।
संत प्रेमानंद महाराज ने उनकी भावना की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने संकल्प लिया है कि वह किसी के शरीर का खून या अंग स्वीकार नहीं करेंगे। बताया कि पिछले कई वर्षों से उनकी किडनी खराब है और डायलिसिस चल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का शरीर या अंग समाज और देश की सेवा में लगे तो वह सबसे बड़ा पुण्य है। इस दौरान संत प्रेमानंद ने बिट्टा के राष्ट्रसेवा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपना जीवन देश और धर्म के लिए समर्पित किया है। कहा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाला व्यक्ति संत समान होता है। इसके बाद बिट्टा ने देवकी नंदन महाराज से भी मुलाकात की और सनातन बोर्ड गठन की मांग का समर्थन किया।
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दो दिवसीय ब्रज यात्रा पर पहुंचे बिट्टा मंगलवार को सबसे पहले श्रीहित राधाकेलिकुंज आश्रम पहुंचे और संत प्रेमानंद महाराज का आशीर्वाद लिया। उन्हें दुपट्टा व प्रसाद भेंट किया। मुलाकात के दौरान बिट्टा भावुक नजर आए। बिट्टा ने कहा कि जीवन में उन्होंने अनेक संघर्ष देखे हैं और कई आतंकी हमलों का सामना किया है। कई जवान शहीद हो गए लेकिन वह आज भी जीवित हैं, जो ईश्वर और संतों की कृपा का परिणाम है। बिट्टा ने संत प्रेमानंद से कहा कि उनकी सभी इच्छाएं पूरी हो चुकी हैं और वह अपनी किडनी उन्हें समर्पित करना चाहते हैं।
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संत प्रेमानंद महाराज ने उनकी भावना की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने संकल्प लिया है कि वह किसी के शरीर का खून या अंग स्वीकार नहीं करेंगे। बताया कि पिछले कई वर्षों से उनकी किडनी खराब है और डायलिसिस चल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का शरीर या अंग समाज और देश की सेवा में लगे तो वह सबसे बड़ा पुण्य है। इस दौरान संत प्रेमानंद ने बिट्टा के राष्ट्रसेवा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपना जीवन देश और धर्म के लिए समर्पित किया है। कहा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाला व्यक्ति संत समान होता है। इसके बाद बिट्टा ने देवकी नंदन महाराज से भी मुलाकात की और सनातन बोर्ड गठन की मांग का समर्थन किया।
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