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घर से स्कूल तक का सफर है खतरों भरा
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 20 Jan 2017 12:06 AM IST
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जर्जर हाल स्कूल वाहन
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घर से स्कूल तक खतरों भरा सफर तय कर रहे हैं मासूम बच्चे। बड़े-बड़े स्कूलों ने मोटी फीस लेकर जो वाहन बच्चों को ढोने के लिए लगा रखे हैं वे जर्जर हैं। इतना ही नहीं क्षमता अगर 40 बच्चों की है तो कोशिश 80 बच्चे बैठाने की हो रही है।
जनपद में 150 से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं जिन्होेंने बच्चों को स्कूल लाने और घर तक छोड़कर आने के लिए वाहन लगा रखे हैं। बस, मेटाडोर, रिक्शा और मैक्स से बच्चे ढोए जा रहे हैं। अगर इनकी फिटनेस की बात करेंगे तो खुद स्कूल वालों को पता नहीं होगा। पिछले महीने आरटीओ ने जब स्कूली वाहनों को चेक किया था तब 25 बसें ऐसी मिलीं थीं जिनके फिटनेस चेक ही नहीं हुई थी।
इन बसों का चालान किया गया। इतना ही नहीं कई वाहन ऐसे भी जब्त किए गए जिनमें क्षमता से अधिक बच्चों को भर रखा था। एआरटीओ प्रवर्तन मुंशीलाल ने बताया कि समय-समय पर अभियान चलाकर स्कूली बसों का सत्यापन किया जाता है। फिटनेस को चेक कराया जाता है। खराब बसों का चालान भी किया गया है।
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कभी स्टीयरिंग तो कभी ब्रेक फेल हो रहे बसों के
बसों की फिटनेस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कभी बसों का स्टीयरिंग फेल हो जाता है तो कभी ब्रेक। 16 जनवरी को सुरीर कोतवाली क्षेत्र में सिकंदरपुर मार्ग पर ब्रज स्थलीय एकेडमी स्कूल की बस का स्टीयरिंग फेल हो जाने से पलट गई थी, जिसमें 40 बच्चे चोटिल हो गए थे। कई बच्चों को गंभीर चोट भी आई थी। इससे पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं।
सड़क पर दौड़ती बसों में आग तक लगी
सड़क पर दौड़ती बसों में आग तक लग चुकी है। गनीमत रही कि उस वक्त इन बसों में बच्चे सवार नहीं थे। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। सीएनजी की यह बस जैसे ही गैस लेकर पंप से निकलीं तभी आग लग गई थी। इससे काफी देर तक अफरातफरी का माहौल रहा।
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जनपद में 150 से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं जिन्होेंने बच्चों को स्कूल लाने और घर तक छोड़कर आने के लिए वाहन लगा रखे हैं। बस, मेटाडोर, रिक्शा और मैक्स से बच्चे ढोए जा रहे हैं। अगर इनकी फिटनेस की बात करेंगे तो खुद स्कूल वालों को पता नहीं होगा। पिछले महीने आरटीओ ने जब स्कूली वाहनों को चेक किया था तब 25 बसें ऐसी मिलीं थीं जिनके फिटनेस चेक ही नहीं हुई थी।
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इन बसों का चालान किया गया। इतना ही नहीं कई वाहन ऐसे भी जब्त किए गए जिनमें क्षमता से अधिक बच्चों को भर रखा था। एआरटीओ प्रवर्तन मुंशीलाल ने बताया कि समय-समय पर अभियान चलाकर स्कूली बसों का सत्यापन किया जाता है। फिटनेस को चेक कराया जाता है। खराब बसों का चालान भी किया गया है।
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कभी स्टीयरिंग तो कभी ब्रेक फेल हो रहे बसों के
बसों की फिटनेस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कभी बसों का स्टीयरिंग फेल हो जाता है तो कभी ब्रेक। 16 जनवरी को सुरीर कोतवाली क्षेत्र में सिकंदरपुर मार्ग पर ब्रज स्थलीय एकेडमी स्कूल की बस का स्टीयरिंग फेल हो जाने से पलट गई थी, जिसमें 40 बच्चे चोटिल हो गए थे। कई बच्चों को गंभीर चोट भी आई थी। इससे पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं।
सड़क पर दौड़ती बसों में आग तक लगी
सड़क पर दौड़ती बसों में आग तक लग चुकी है। गनीमत रही कि उस वक्त इन बसों में बच्चे सवार नहीं थे। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। सीएनजी की यह बस जैसे ही गैस लेकर पंप से निकलीं तभी आग लग गई थी। इससे काफी देर तक अफरातफरी का माहौल रहा।