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डीआईओएस कार्यालय में दो लिपिकों को पीटा
ब्यूरो,अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 31 Dec 2015 11:15 PM IST
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जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय (डीआईओएस) में गुरुवार को स्कूल संचालकों ने परीक्षा विभाग के दो लिपिकों के साथ मारपीट कर दी। लिपिकों का आरोप है कि स्कूल संचालक उन पर मनमाफिक परीक्षा बनाने के लिए दबाव डाल रहे थे।
आरोपियों ने कार्यालय के परीक्षा कक्ष में घुसकर बोर्ड परीक्षा से जुड़े कई रिकार्ड और प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिफाफे भी फाड़ दिए। खबर लिखे जाने तक तहरीर नहीं दी गई थी। प्रभारी डीआईओएस ने विभागीय जांच कराकर कार्रवाई करने की बात कही है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में नकलमाफिया हावी हैं। नकल के लिए पहले से कुख्यात मथुरा जिले में मनमाफिक परीक्षा केंद्र बनाने के लिए निजी कालेज संचालक कुछ भी करने से गुरेज नहीं करते।
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गुरुवार को डीआईओएस कार्यालय में भी यही हुआ। बताया गया है कि इस बार परीक्षा केंद्र शासन स्तर से निर्धारित किए गए हैं। जिले में 213 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया है।
डीआईओएस कार्यालय में परीक्षा विभाग के प्रधान लिपिक बच्चू सिंह और कनिष्ठ सहायक धर्मपाल का आरोप है कि शाम छह बजे हुकुम सिंह इंटर कालेज आटस वृंदावन के प्रबंधक तपेश गौतम, जीसिटी इंटर कालेज नटवर नगर मथुरा के प्रबंधक केके और कार्ष्णि गुरु शरणानंद इंटर कालेज गोपी की नगरिया महावन के प्रबंधक राकेश चार-पांच अन्य लोगों के साथ परीक्षा कक्ष में आ गए।
ये सभी निर्धारित परीक्षा केंद्र को शिफ्ट कराने की बात कर रहे थे। मना किया तो स्कूल संचालकों ने परीक्षा कक्ष में रखे कागजात फाड़ दिए। बच्चू सिंह और धर्मपाल ने रोका तो उन्हें लात-घूंसों से पीटा।
इसके बाद जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गए। पीड़ितों ने का कहना है कि जब उन्होंने मामले की जानकारी प्रभारी डीआईओएस को देनी चाही तो उन्होंने फोन काट दिया।
बच्चू सिंह और धर्मपाल ने मामले में गत वर्ष परीक्षा लिपिक रहे राधाबल्लभ शर्मा और स्थानांतरित हो चुके लिपिक कमल लवानियां को भी जिम्मेदार बताया। बताया गया है कि घटना से करीब 15 मिनट पहले मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय से गए थे।
घटना के दौरान कार्यालय में मौजूद नहीं था। इसकी सूचना मिली है। विभागीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- एके सिंह, प्रभारी डीआईओएस
एडीआईओएस रहे अनभिज्ञ
बताया गया है कि जब यह वाकया हुआ तो एडीआईओएस राघवेंद्र सिंह अपने कार्यालय में ही मौजूद थे। इसके बाद भी उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह मारपीट होते हुए नहीं देख पाए, हालांकि शोर जरूर सुना था। जब पीड़ितों के साथ थाने जाकर एफआईआर दर्ज कराने की बात आई तो भी वह चुपचाप वहां से निकल गए।
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आरोपियों ने कार्यालय के परीक्षा कक्ष में घुसकर बोर्ड परीक्षा से जुड़े कई रिकार्ड और प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिफाफे भी फाड़ दिए। खबर लिखे जाने तक तहरीर नहीं दी गई थी। प्रभारी डीआईओएस ने विभागीय जांच कराकर कार्रवाई करने की बात कही है।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में नकलमाफिया हावी हैं। नकल के लिए पहले से कुख्यात मथुरा जिले में मनमाफिक परीक्षा केंद्र बनाने के लिए निजी कालेज संचालक कुछ भी करने से गुरेज नहीं करते।
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गुरुवार को डीआईओएस कार्यालय में भी यही हुआ। बताया गया है कि इस बार परीक्षा केंद्र शासन स्तर से निर्धारित किए गए हैं। जिले में 213 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया है।
डीआईओएस कार्यालय में परीक्षा विभाग के प्रधान लिपिक बच्चू सिंह और कनिष्ठ सहायक धर्मपाल का आरोप है कि शाम छह बजे हुकुम सिंह इंटर कालेज आटस वृंदावन के प्रबंधक तपेश गौतम, जीसिटी इंटर कालेज नटवर नगर मथुरा के प्रबंधक केके और कार्ष्णि गुरु शरणानंद इंटर कालेज गोपी की नगरिया महावन के प्रबंधक राकेश चार-पांच अन्य लोगों के साथ परीक्षा कक्ष में आ गए।
ये सभी निर्धारित परीक्षा केंद्र को शिफ्ट कराने की बात कर रहे थे। मना किया तो स्कूल संचालकों ने परीक्षा कक्ष में रखे कागजात फाड़ दिए। बच्चू सिंह और धर्मपाल ने रोका तो उन्हें लात-घूंसों से पीटा।
इसके बाद जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गए। पीड़ितों ने का कहना है कि जब उन्होंने मामले की जानकारी प्रभारी डीआईओएस को देनी चाही तो उन्होंने फोन काट दिया।
बच्चू सिंह और धर्मपाल ने मामले में गत वर्ष परीक्षा लिपिक रहे राधाबल्लभ शर्मा और स्थानांतरित हो चुके लिपिक कमल लवानियां को भी जिम्मेदार बताया। बताया गया है कि घटना से करीब 15 मिनट पहले मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय से गए थे।
घटना के दौरान कार्यालय में मौजूद नहीं था। इसकी सूचना मिली है। विभागीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- एके सिंह, प्रभारी डीआईओएस
एडीआईओएस रहे अनभिज्ञ
बताया गया है कि जब यह वाकया हुआ तो एडीआईओएस राघवेंद्र सिंह अपने कार्यालय में ही मौजूद थे। इसके बाद भी उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह मारपीट होते हुए नहीं देख पाए, हालांकि शोर जरूर सुना था। जब पीड़ितों के साथ थाने जाकर एफआईआर दर्ज कराने की बात आई तो भी वह चुपचाप वहां से निकल गए।