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UP: संभल के DM को प्रेमानंद महाराज ने दिया अर्जुन का उदाहरण...बताया किस तरह करें अपने कर्म, दिया ये ज्ञान
Mon, 20 Jan 2025 08:54 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 20 Jan 2025 08:54 PM IST
सार
संभल के जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया संत प्रेमानंद महाराज से उनके रमणरेती स्थित श्रीराधा केलि कुंज पर मिलने पहुंचे। डीएम को राधारानी का प्रसादी पटुका प्रदान करते हुए संत ने कहा कि उन्हें निडर एवं निष्पक्ष होकर अपने कत्र्तव्य का पाठ पढ़ाते हुए प्रशासनिक सेवा करने को कहा।
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प्रेमानंद महाराज के दरबार में संभल के जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
संत प्रेमानंद महाराज ने जिलाधिकारी से कहा कि भगवान की कृपा से ही सेवा करने को मिलती है। इसलिए इसका निर्वाह करते रहना चाहिए। इस दौरान व्यवधान आएंगे, लालच के प्रभाव में नहीं आना है और ना ही डरना है। अपने जो अधिकार है उनके अनुसार देश की सेवा करते रहें। उन्होंने कहा कि सेवा के साथ ही भगवान का स्मरण एवं जाप करते रहें। क्योंकि जीवन का लक्ष्य भगवान की प्राप्ति है।
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संत प्रेमानंद ने डीएम को समझाया कि लक्ष्य हासिल करने के लिए हमें भजन करना चाहिए। आपको जिला संभालने का मौका मिला है। सेवाएं भले ही अलग-अलग हों लेकिन ईनाम दोनों को एक ही मिलेगा। उन्होंने कहा कि यदि ईमानदारी एवं सत्य के भाव से नाम जप करते हैं तो आप महात्मा हैं।
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उन्होंने संभल डीएम को कुरुक्षेत्र में अर्जुन और कृष्ण का एक संवाद सुनाते हुए कहा कि अर्जुन कहते हैं कि संन्यास लेकर भगवान का भजन करूंगा, लेकिन भगवान उन्हें ऐसा करने से मना करते हैं और कहते हैं कि इस समय धर्म युद्ध चल रहा है युद्ध लड़ो यही कत्र्तव्य है। उन्होंने डीएम को अपने कत्र्तव्य का पालन करते हुए नाम जप करते हुए देश की सेवा करने की सीख दी। इससे वह एक उत्तम अधिकारी माने जाने के साथ ही यह भगवान की सेवा भी मानी जाएगी।
डीएम ने संत प्रेमानंद से कहा कि वह चाय नहीं पीते हंै और ना ही उनके घर में कोई लहसुन प्याज खाते है। वह प्रतिदिन गीता का पाठ करते हैं और एक घंटे से ज्यादा पूजा करते हैं। इस पर संत ने कहा कि इसलिए आप साधु संतों की शरण में आए हैं।
वहीं एक युवा भक्त ने संत प्रेमानंद महाराज से एकांतिक वार्ता में सवाल किया कि उसकी लड़कियों में रुचि नहीं है वह लड़कों के प्रति आकर्षण है, लेकिन उनके माता-पिता उनकी विवाह लड़की के साथ कराना चाहते हैं। वह क्या करें। इस पर संत ने कहा कि यह अच्छा कि उन्होंने यह बात उन्हें बताई। यही बात उन्हें अपने माता-पिता को भी बतानी चाहिए। तुम्हें किसी लड़की के जीवन से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। अगर लड़कियों में तुम्हारा राग नहीं तो किसी का जीवन बर्वाद नहीं करोगे। अगर लड़कियों में नहीं लड़कों के प्रति आकर्षण है तो माता-पिता कैसे नहीं मानेंगे। उन्हें भी यह बात समझनी चाहिए।
संत ने कहा कि भगवान ने जो वृत्ति दी है वह किसी को बताना गलत नहीं है। भगवान ने हमें बनाया है। अपने आकर्षण के बारे में अपने माता-पिता को बता दो। संत ने कहा कि जो माता-पिता अपने बच्चों की बात को नहीं समझते हैं और जबरदस्ती करते हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। उन्हें बच्चों के मन को भी समझने की जरुरत है।