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मानवीय भूल ने पैदा की कोरोना महामारी
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गोवर्धन पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य अद्योक्षजानंद देव तीर्थ महाराज।
- फोटो : MATHURA
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गोवर्धन। कोरोना वायरस से बचाव के तीसरे चरण में लॉकडाउन के दौरान जतीपुरा परिक्रमा मार्ग स्थित शंकरचार्य आश्रम में आद्य शंकराचार्य धर्मोत्थान संसद द्वारा पूजा व सेवा की जा रही है। इस दौरान मंगलवार को गोवर्धन पुरी पीठाधीश्वर अद्योक्षजानंद देव तीर्थ महाराज ने कहा कि इंसानों की भूल ने कोरोना जैसी महामारी का संकट पैदा किया है।
उन्होंने कहा कि सारे ब्रह्मांड का सृजन परमात्मा ने किया है। उसको चलाने के लिए एक विधान बनाया है। उस विधान को लागू करने की जिम्मेदारी मनुष्य को दी है, इसलिए मनुष्य को धर्मानुशासित रहना है, अपने अनुशासन से अन्य जीवों की रक्षा करनी है। उनको विनाश से बचाना है। कई सालों से वैज्ञानिक भी मान चुके हैं कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ हो रही है।
शास्त्रों के साथ वैज्ञानिकों का भी मत था। इंसानों ने धार्मिक कानून को तोड़ा है। पेड़-पौधों को नष्ट किया है। पूजा किए जाने वाले पहाड़ों को तोड़ा है। पवित्र नदियों की दुर्दशा कर डाली है। इसके परिणाम स्वरूप यह माहमारी देखने को मिल रही है। भगवान हमेशा सतर्क होने का मौका देते हैं। मानव को अपने मार्ग में आकर धर्मानुशासित जीवन जीना चाहिए।
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यहां धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चारों तरह के पुरुषार्थ मौजूद हैं। धार्मिक विधि-विधान भी करना संकट के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि भगवान चंद्र मौलेश्वर का महाभिषेक, राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की आराधना व श्रीचक्र सहस्त्रार्चपन की पूजा का क्रम अनवरत चल रहा है। संकट की घड़ी में भक्त ऑनलाइन पूजा की विधि-विधान का लाभ ले रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि सारे ब्रह्मांड का सृजन परमात्मा ने किया है। उसको चलाने के लिए एक विधान बनाया है। उस विधान को लागू करने की जिम्मेदारी मनुष्य को दी है, इसलिए मनुष्य को धर्मानुशासित रहना है, अपने अनुशासन से अन्य जीवों की रक्षा करनी है। उनको विनाश से बचाना है। कई सालों से वैज्ञानिक भी मान चुके हैं कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ हो रही है।
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शास्त्रों के साथ वैज्ञानिकों का भी मत था। इंसानों ने धार्मिक कानून को तोड़ा है। पेड़-पौधों को नष्ट किया है। पूजा किए जाने वाले पहाड़ों को तोड़ा है। पवित्र नदियों की दुर्दशा कर डाली है। इसके परिणाम स्वरूप यह माहमारी देखने को मिल रही है। भगवान हमेशा सतर्क होने का मौका देते हैं। मानव को अपने मार्ग में आकर धर्मानुशासित जीवन जीना चाहिए।
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यहां धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चारों तरह के पुरुषार्थ मौजूद हैं। धार्मिक विधि-विधान भी करना संकट के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि भगवान चंद्र मौलेश्वर का महाभिषेक, राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की आराधना व श्रीचक्र सहस्त्रार्चपन की पूजा का क्रम अनवरत चल रहा है। संकट की घड़ी में भक्त ऑनलाइन पूजा की विधि-विधान का लाभ ले रहे हैं।