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राहत तब आई जब हो चुकी 70 फीसदी बुवाई

Wed, 23 Nov 2016 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 23 Nov 2016 12:22 AM IST
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Relief came when 70 per cent sowing has done
राहत तब आई जब हो चुकी 70 फीसदी बुवाई - फोटो : Amar Ujala
इस बार तो किसानों ने कर्ज लेकर गेहूं की बुवाई की है। नोटबंदी के चलते खेत की जुताई से लेकर सिंचाई तक सब उधारी में हुआ। सरकार ने राहत तब दी है जब सत्तर फीसदी किसान गेहूं की बुवाई कर चुके हैं।
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मथुरा में जिले में 2 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की जाती है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अभी तक डेढ़ लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया जा चुका है। जबकि बाकी किसान बुवाई की तैयारी में है। अब सरकार ने जो खाद और बीज की दुकानों पर 500 का नोट चलाने की घोषणा की है उससे केवल तीस फीसदी किसान ही लाभान्वित हो पाएंगे। क्योंकि 70 फीसदी किसान तो गेहूं की बुवाई कर चुके हैं। नौहझील के किसान पूरन सिंह का कहना है कि जब 1000 और 500 के नोट बंद हो गए थे तब उन्होंने किसी तरह से कर्ज लेकर गेहूं की बुवाई की।
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चौमुंहा निवासी अशोक सिसौदिया ने बताया कि कर्ज लेकर किसी तरह से व्यवस्था की गई। वह तो तीन दिन पहले बीज खरीद लाए थे। सरकार को पहले ही ये एलान कर देना चाहिए था। अकबरपुर निवासी सहदेव सिंह ने बताया कि इस बार सबसे बड़ी दिक्कत किसानों के सामने ही आई है। वही गेहूं बुवाई का वक्त था और उसी समय नोट बंदी का एलान कर दिया गया। कम से कम कुछ समय किसानों के लिए तो दे ही देना चाहिए। ताकि वह फसलों की बुवाई कर सकते।
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कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर राकेश बाबू ने बताया कि करीब सत्तर फीसदी बुवाई हो चुकी है। यहां गेहूं बुवाई का सत्र 30 अक्तूबर से शुरू हो जाता है और 25 नवंबर तक चलता है।


पांच सौ के नोट से बचते रहे खाद दुकानदार
सरकार की खाद-बीज के लिए पांच सौ का नोट स्वीकार किए जाने की घोषणा के बाद भी बीज की दुकानों पर कहीं कोई भीड़ नजर नहीं आई। खाद की दुकानों पर भी यही स्थिति रही। जिन दुकानों पर खाद थी, वहां पांच सौ का नोट लेने से दुकानदार बचते रहे।
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