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Mathura News: नवरात्र के नौ दिन करें मानस का पाठ
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मोरारी बापू का अभिनंदन करते राजस्थान सरकार में मंत्रीगण।
बरसाना। माताजी गोशाला में 9 दिवसीय श्रीरामकथा का आयोजन किया जा रहा है। सोमवार को तीसरे दिन कथावाचक मोरारी बापू ने कहा कि श्रीरामचरितमानस में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के तीन–तीन स्वरूपों का वर्णन मिलता है। इन्हीं से नवरात्र की साधना पूर्ण होती है। अतः साधक को नवरात्र के 9 दिन मानस का पाठ अवश्य करना चाहिए।
व्यासपीठ से मोरारी बापू ने कहा कि हमें भूतकाल की उलझनों और भविष्य की चिंता में न फंसकर सीमित वर्तमान को राधे-राधे भजने में लगाना चाहिए। बापू ने माता के स्वरूपों पर विस्तार से चर्चा की। कहा कि कहा हमारी जननी माता है, जन्मभूमि माता है, गीता माता है, गंगा माता है, गायत्री स्वरूपा रामायण माता है, सीता माता हैं, सती माता हैं और गाय भी हमारी माता है। गोमाता की महत्ता समझाते हुए उन्होंने कहा कि गाय के 16 लक्षण गुरु के 16 लक्षणों के समान होते हैं। पद्मपुराण का प्रसंग सुनाया कि खेत में चरती गाय को हटाने मात्र से राजा जनक जैसे भक्त को भी नर्क का दर्शन करना पड़ा। रामकथा में महर्षि याज्ञवल्क्य–भारद्वाज संवाद, ऋषि मार्कण्डेय भगवान विश्वनाथ संवाद और माता सती द्वारा प्रभु श्रीराम की परीक्षा का प्रसंग सुनाया गया। राधे राधे के कीर्तन पर मान मंदिर गुरुकुल के बालकों को झूमते देख पंडाल राधे राधे के जयघोष से गूंज उठा।
कथा में महामंडलेश्वर ज्ञानानंद महाराज, संत नरहरि दास महाराज, राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, मान मंदिर सेवा संस्थान के अध्यक्ष रामजीलाल शास्त्री, कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री, सचिव सुनील सिंह ब्रजदास, माताजी गोशाला के संयोजक राजबाबा, आयोजक हरेश एन संघवी आदि उपस्थित रहे।
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व्यासपीठ से मोरारी बापू ने कहा कि हमें भूतकाल की उलझनों और भविष्य की चिंता में न फंसकर सीमित वर्तमान को राधे-राधे भजने में लगाना चाहिए। बापू ने माता के स्वरूपों पर विस्तार से चर्चा की। कहा कि कहा हमारी जननी माता है, जन्मभूमि माता है, गीता माता है, गंगा माता है, गायत्री स्वरूपा रामायण माता है, सीता माता हैं, सती माता हैं और गाय भी हमारी माता है। गोमाता की महत्ता समझाते हुए उन्होंने कहा कि गाय के 16 लक्षण गुरु के 16 लक्षणों के समान होते हैं। पद्मपुराण का प्रसंग सुनाया कि खेत में चरती गाय को हटाने मात्र से राजा जनक जैसे भक्त को भी नर्क का दर्शन करना पड़ा। रामकथा में महर्षि याज्ञवल्क्य–भारद्वाज संवाद, ऋषि मार्कण्डेय भगवान विश्वनाथ संवाद और माता सती द्वारा प्रभु श्रीराम की परीक्षा का प्रसंग सुनाया गया। राधे राधे के कीर्तन पर मान मंदिर गुरुकुल के बालकों को झूमते देख पंडाल राधे राधे के जयघोष से गूंज उठा।
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कथा में महामंडलेश्वर ज्ञानानंद महाराज, संत नरहरि दास महाराज, राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, मान मंदिर सेवा संस्थान के अध्यक्ष रामजीलाल शास्त्री, कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री, सचिव सुनील सिंह ब्रजदास, माताजी गोशाला के संयोजक राजबाबा, आयोजक हरेश एन संघवी आदि उपस्थित रहे।
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