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डोली भूमि गिरत दसकंधर...

Tue, 11 Oct 2016 11:09 PM IST
अमर उजाला मथुरा
अमर उजाला मथुरा Updated Tue, 11 Oct 2016 11:09 PM IST
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ravan dies in mathura
जल उठे रावण-अहिरावण के पुतले - फोटो : अमर उजाला
डोली भूमि गिरत दसकंधर। 
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छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर॥
धरनि परेउ द्वौ खंड बढ़ाई।
चापि भालु मर्कट समुदाई॥ 

अधर्म पर धर्म की विजय का उत्सव विजयदशमी धूमधाम से मनाया गया। रामलीला मैदान में भगवान राम और रावण की सेना के बीच घनघोर युद्ध हुआ। भगवान राम का अग्निबाण जैसे ही अधर्मी रावण की नाभि में लगा तो दशानन का शरीर छिन्न-भिन्न होकर जमीन पर गिर पड़ा। रावण की सेना में हाहाकार मच गया। मैदान में रावण और अहिरावण के पुतले धूं-धूं कर जल उठे। चारों ओर भगवान राम की जय-जयकार होने लगी। 

श्रीराम लीला सभा के तत्वावधान में रामलीला मैदान पर राम-रावण युद्ध की लीला देखने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। इससे पहले रावण के भाई अहिरावण के कुशलझेम पूछने पर रावण ने उसे सूर्पनखा से लेकर अब तक की सारी स्थिति बताईं और युद्ध में साथ देने का आह्वान किया। अहिरावण बोला कि संसार में नीति ही प्यारी हैं। अनीति करने पर भारी भय का सामना करना पड़ता है। उसने रावण से कहा कि आपने उस मनुष्य का प्रभाव नहीं जाना है। मैं आपके कहने पर दोनों भाइयों को हराकर देवी की बलि दूंगा। 
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अहिरावण ने कपट से विभीषण का रूप बनाया राम लक्ष्मण को उठाकर पाताल ले गया। राम सेना विलाप करने लगी। हनुमान तत्काल पाताल पहुंचे तो द्वार पर उनकी भेंट मकरध्वज से हुई। उससे परिचय पूछा तो बोला कि हनुमान पुत्र हूं। हनुमानजी फूल लेकर आ रही मालिन के फूल में सूक्ष्म शरीर बनाकर बैठ गए पाताल में देवी के पास तक पहुंचे। उन्होंने देवी को स्पर्श किया देवी पाताल में चली गई  हनुमान वही विराजमान हो गए। अहिरावण को मार गिराया और राम लक्ष्मण को ले आए।
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अहिरावण के मरने के बाद रावण खुद युद्ध भूमि में पहुंचा और श्रीराम सेना का संहार करने लगा। विभीषण ने श्रीराम को रावण की नाभि में अमृत का रहस्य बताया। श्रीराम ने एक ही बाण में उसकी नाभि का अमृत सुखाकर रावण को ढेर कर दिया। इसके बाद लीला में राम ने लक्ष्मण को मृत्यु शैया पर पड़े रावण से ज्ञान लेने के लिए भेजा। लीला मंचन के बाद रावण और अहिरावण के पुतलों में श्रीराम ने निशाना साधा। तभी पुतलों में आग लग गई। देखते ही देखते पुतला धूं-धूं कर जल उठा।


आतिशबाजी से रंगीन हो गया आसमान
मेले में आतिशबाजी आकर्षण का केंद्र रही। इस आतिशबाजी के चलते कई बार आसमान रंगीन हो गया। यहां आसमान ने छतरी, सितारे बनकर चमक रहे पटाखों से बच्चों में कौतूहल पैदा हो गया। 
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