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श्रीराम ने चखे सबरी के झूठे बेर
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मथुरा। श्रीराम लीला सभा द्वारा आयोजित मसानी स्थित चित्रकूट पर लीला में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण क?
- फोटो : MATHURA
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मथुरा। श्री रामलीला सभा के तत्वावधान में मसानी स्थित चित्रकूट लीलामंच पर सबरी मिलन लीला का आयोजन हुआ। इस दौरान भगवान राम ने भक्त सबरी के झूठे बेर चखे। हनुमान मिलन व बाली वध की लीला का भी दर्शकों ने आनंद लिया।
भक्त शबरी प्रभु राम के आने की प्रतीक्षा में भजन गाती हुई मार्ग पर बुहारी लगा रही थी, प्रभु श्री राम ऋषि मुनियों से शबरी की कुटिया का मार्ग पूछते हैं। श्रीराम भाई लक्ष्मण को आते देख सबरी भावुक होकर उनके चरणों से लिपट जाती है। श्रीराम ने शबरी से बेर मांगे। बेर खट्टे न हो इसके लिए सबरी ने पहले स्वयं उन्हें चखा फिर प्रभु राम को खाने को दिए। इसके बाद राम जी और हनुमान मिलन लीला का आयोजन किया गया।
हनुमान जी ब्राह्मण का रूप धारण कर श्रीराम-लक्ष्मण से परिचय पूछते हैं। परिचय होने पर वे उनके चरणों में गिर गए। श्रीराम के कहने पर सुग्रीव ने बाली को युद्ध के लिए ललकारा। श्रीराम ने बाण छोड़ा और बाली धरती पर गिर गया। प्रभु राम बाली को दर्शन देकर उसका कल्याण किया। राम की आज्ञा से लक्ष्मण ने सुग्रीव का राजतिलक किया एवं बाली के पुत्र अंगद को युवराज घोषित किया । इस अवसर पर विशनचंद, राजकुमार, दीपक, सभापति जयंती प्रसाद अग्रवाल, जुगलकिशोर अग्रवाल, नंदकिशोर अग्रवाल, प्रधानमंत्री मूलचंद गर्ग, प्रदीप कुमार सराफ, शैैलेश अग्रवाल सराफ, बनवारी लाल गर्ग, योगेश जौली, गोवर्धन दास, सोहन लाल शर्मा, महावीर प्रसाद, उमेश आदि उपस्थित रहे।
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भक्त शबरी प्रभु राम के आने की प्रतीक्षा में भजन गाती हुई मार्ग पर बुहारी लगा रही थी, प्रभु श्री राम ऋषि मुनियों से शबरी की कुटिया का मार्ग पूछते हैं। श्रीराम भाई लक्ष्मण को आते देख सबरी भावुक होकर उनके चरणों से लिपट जाती है। श्रीराम ने शबरी से बेर मांगे। बेर खट्टे न हो इसके लिए सबरी ने पहले स्वयं उन्हें चखा फिर प्रभु राम को खाने को दिए। इसके बाद राम जी और हनुमान मिलन लीला का आयोजन किया गया।
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हनुमान जी ब्राह्मण का रूप धारण कर श्रीराम-लक्ष्मण से परिचय पूछते हैं। परिचय होने पर वे उनके चरणों में गिर गए। श्रीराम के कहने पर सुग्रीव ने बाली को युद्ध के लिए ललकारा। श्रीराम ने बाण छोड़ा और बाली धरती पर गिर गया। प्रभु राम बाली को दर्शन देकर उसका कल्याण किया। राम की आज्ञा से लक्ष्मण ने सुग्रीव का राजतिलक किया एवं बाली के पुत्र अंगद को युवराज घोषित किया । इस अवसर पर विशनचंद, राजकुमार, दीपक, सभापति जयंती प्रसाद अग्रवाल, जुगलकिशोर अग्रवाल, नंदकिशोर अग्रवाल, प्रधानमंत्री मूलचंद गर्ग, प्रदीप कुमार सराफ, शैैलेश अग्रवाल सराफ, बनवारी लाल गर्ग, योगेश जौली, गोवर्धन दास, सोहन लाल शर्मा, महावीर प्रसाद, उमेश आदि उपस्थित रहे।
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