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Mathura News: जिले में होगी वर्षा आधारित खेती, किसानों को मिलेगा अनुदान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jan 2024 12:38 AM IST
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Rain based farming will be done in the district, farmers will get grant
मथुरा। जनपद में पानी की परेशानी को देखते हुए वर्षा आधारित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। रेनफेड एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम से चिन्हित 52 हेक्टेयर भूमि में किसानों को अनुदान देकर मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा।
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राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत एक ग्राम पंचायत का चयन कर 52 हेक्टेयर भूमि पर फसल उत्पादन कार्यक्रम चलाया जाएगा। अलग-अलग क्लस्टर बनाए जाएंगे। किसानों को अनुदान देकर बाजरे और सरसों की खेती करवाई जाएगी। भूमि संरक्षण विभाग द्वारा चयनित किसानों को नवीन वैरायटी के बीज और उर्वरक अनुदान के रूप में दी जाएगी। फसल उत्पादन में होने वाले खर्च पर किसान को 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। इसमें 25 प्रतिशत अनुसूचित जाति के किसान शामिल रहेंगे। योजना के तहत फसल उत्पादन के अलावा फल, फूल, सब्जी, पशु पालन, मधुमक्खी पालन और वर्मी कंपोस्ट बनाने पर भी किसानों को अनुदान दिया जाएगा।
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फल, फूल और सब्जी की खेती करने पर मिलेगा 50 प्रतिशत अनुदान
योजना के तहत जो किसान फल, फूल और सब्जी की खेती करेंगे। उन्हें विभाग द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा। योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को दिया जाएगा। जिनके पास केवल दो हेक्टेयर भूमि हैं।
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पशुपालन पर मिलेगा 40 प्रतिशत अनुदान
जो किसान पशुपालन करेंगे। उन्हें विभाग द्वारा 40 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा। अनुदान का लाभ लेकर किसान दुधारू पशु खरीद कर डेयरी का संचालन कर सकते हैं।
सरसों की खेती करने वाले किसान कर सकेंगे मधुमक्खी पालन
योजना में शामिल जो किसान सरसों की खेती करेंगे। विभाग द्वारा उन्हें मधुमक्खी पालन पर 40 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा। मधुमक्खी के बॉक्स सरसों के खेत के पास ही लगाए जाएंगे। सरसों के फूल से रस चूसकर मधुमक्खी बॉक्स में शहद के छत्ते बनाएगी।
कंपोस्ट पिट बनाकर देगा विभाग, खाद बेचकर लाभ कमाएंगे किसान
ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए चयनित किसान को कंपोस्ट पिट बनाकर दी जाएगी। किसान पिट में गोबर एकत्रित करेंगे। केंचुओं की मदद से गोबर खाद तैयार करेंगे। किसान इस खाद को बेचने के अलावा अपने खेत में भी इस्तेमाल कर पाएंगे।



वर्षा आधारित खेती के लिए 20 गांवों की सूची तैयार की गई है। इनमें से एक गांव का चयन किया जाएगा। 52 हेक्टेयर भूमि में अलग-अलग क्लस्टर बनाकर फसल उत्पादन कार्यक्रम के तहत सरसों, बाजरा, फल, फूल, सब्जी खेती के अलावा पशुपालन, मधुमक्खी पालन पर भी किसानों को अनुदान दिया जाएगा।
-डॉ. संतलाल, भूमि संरक्षण अधिकारी
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