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सजने-संवरने लगा बरसाना, आ रही हैं राधारानी
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बरसाना (मथुरा)। अब ब्रजभूमि राधारानी के जन्मोत्सव के लिए सजने-संवरने लगी है। मंदिरों में तैयारियों का दौर शुरू हो चुका है। इसका खास उत्साह बरसाना में देखने को मिल रहा है। यहां कृष्ण प्रिय राधारानी के जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए भक्त आने लगे हैं।
इस बार राधारानी 6 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे प्राकट्य होंगी। इस पल का साक्षी बनने को देश-दुनिया के लाखों श्रद्धालु बरसाना पहुंचते हैं। इसके लिए बरसाना के साथ आसपास के सभी गेस्ट हाउस, धर्मशालाएं फुल होती जा रही हैं।
तीर्थ नगरी बरसाना लाडली जी के जन्मोत्सव के लिए तैयारियों में लगा है।
बरसाना के साथ साथ अष्ठ सखियों के गांव भी विशेष तैयारी में लगे है। ब्रह्मांचल पर्वत पर विराजमान लाडली जी का निज महल सजधज के तैयार है। मानगढ़ी, मानमंदिर, मोर कुटी, खोर साखरी, गहवरवन, दान गढ़, विलाशगढ़ और कीर्ति मंदिर सभी कृष्ण प्रिय राधे के जन्मोत्सव की तैयारी अंतिम पड़ाव पर है। हर तरफ राधे-राधे की धूम है।
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मूल नक्षत्र में जन्मेंगी लाडली किशोरी
बृषभान नंदिनी भाद्रपक्ष की शुक्ल अष्टमी को अनुराधा नक्षत्र तथा मूल नक्षत्र में जन्म लेंगी। मूल नक्षत्र में जन्म लेने से राधा रानी की मूल शांति के लिए सेवायत गुरुवार रात दो बजे गर्भग्रह में प्रवेश करेंगे। मूल शांति के लिए 27 कुओं का जल, 27 पेड़ों की पत्ती, 27 तरह की औषधियों, 27 मेवा तथा 27 ब्राह्मण, सोने चांदी की मूल मूलनी और कांस्य के बना तेल के छाया पात्र के साथ हवन आदि होगा। इसके बाद दूध, दही, शहद, बूरा, इत्र, घी, गुलाबजल, गोघृत, पंच मेवा, पंच नवरत्न, केसर आदि से उनके श्रीविग्रह का अभिषेक गोस्वामी समाज के तीनों थोक के सेवायत करते है।
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इस बार राधारानी 6 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे प्राकट्य होंगी। इस पल का साक्षी बनने को देश-दुनिया के लाखों श्रद्धालु बरसाना पहुंचते हैं। इसके लिए बरसाना के साथ आसपास के सभी गेस्ट हाउस, धर्मशालाएं फुल होती जा रही हैं।
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तीर्थ नगरी बरसाना लाडली जी के जन्मोत्सव के लिए तैयारियों में लगा है।
बरसाना के साथ साथ अष्ठ सखियों के गांव भी विशेष तैयारी में लगे है। ब्रह्मांचल पर्वत पर विराजमान लाडली जी का निज महल सजधज के तैयार है। मानगढ़ी, मानमंदिर, मोर कुटी, खोर साखरी, गहवरवन, दान गढ़, विलाशगढ़ और कीर्ति मंदिर सभी कृष्ण प्रिय राधे के जन्मोत्सव की तैयारी अंतिम पड़ाव पर है। हर तरफ राधे-राधे की धूम है।
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मूल नक्षत्र में जन्मेंगी लाडली किशोरी
बृषभान नंदिनी भाद्रपक्ष की शुक्ल अष्टमी को अनुराधा नक्षत्र तथा मूल नक्षत्र में जन्म लेंगी। मूल नक्षत्र में जन्म लेने से राधा रानी की मूल शांति के लिए सेवायत गुरुवार रात दो बजे गर्भग्रह में प्रवेश करेंगे। मूल शांति के लिए 27 कुओं का जल, 27 पेड़ों की पत्ती, 27 तरह की औषधियों, 27 मेवा तथा 27 ब्राह्मण, सोने चांदी की मूल मूलनी और कांस्य के बना तेल के छाया पात्र के साथ हवन आदि होगा। इसके बाद दूध, दही, शहद, बूरा, इत्र, घी, गुलाबजल, गोघृत, पंच मेवा, पंच नवरत्न, केसर आदि से उनके श्रीविग्रह का अभिषेक गोस्वामी समाज के तीनों थोक के सेवायत करते है।