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Mathura News: विदेशों तक महकती है राधाकुंड की तुलसी माला

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Jul 2025 01:16 AM IST
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Radhakund's Tulsi garland spreads its fragrance even in foreign countries
राधाकुंड के बाजार में दुकान पर टंगी तुलसी की कंठी माला
अशोक कुमार दुबे
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राधाकुंड (मथुरा)। गुरु पूर्णिमा मेले को लेकर राधाकुंड व गिरिराज परिक्रमा मार्ग के मंदिर, मठ, आश्रमों में तैयारियां हो चुकी हैं। गुरु पूर्णिमा पर गुरु अपने शिष्यों को तुलसी की कंठी माला गले में धारण कराते हैं। शिष्य गुरुओं को जाप के लिए माला एवं दक्षिण प्रदान करेंगे। राधाकुंड में बनी तुलसी की कंठी माला को बंगाली समाज के लोग दिन-रात मेहनत एक कर हाथों से तैयार करते हैं। यहां की कंठी माला विदेशों तक जाती है।

सनातन धर्म में तुलसी से बने दोनों की कंठी माला का विशेष महत्व है। भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका, रूस, कनाडा, साउथ अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, फ्रांस, श्रीलंका और खाड़ी के देशों में रहने सनातनी राधाकुंड में बनने वाली तुलसी की कंठी माला को पसंद करते हैं। कस्बे के बंगाली समाज के लोगों का मुख्य व्यवसाय तुलसी की कंठी माला, ठाकुरजी के मुकुट, पोशाक आदि बनाना है। कस्बे की राधा नगर कॉलोनी में घर-घर में यही कार्य होता है। संवाद
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इस कार्य में सैकड़ों महिलाएं और पुरुष लगे हुए हैं। वृंदा दासी, संजू दासी, विनीत राय, वृंदावन दासी पिछले 25 वर्ष से तुलसी की माला बनाने के कार्य में लगी हुई हैं। मांग के अनुसार ऑर्डर मिलने पर विदेशों में भी भेजी जाती है। तुलसी माला कारोबारी प्रहलाद दास ने बताया कि कस्बे के आसपास के गांव में तुलसी माला से संबंधित कच्चा माल तैयार किया जाता है। बंगाली समाज के कारीगरों द्वारा उसकी फिनिशिंग की जाती है। ऑर्डर के अनुसार सोने, चांदी, मोती के साथ तुलसी की माल तैयार कराई जाती है। बाजार में तुलसी की माला 5 रुपये से लेकर 50 हजार रुपये उपलब्ध है।
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तुलसी की कंठी माला गले में धारण करना भक्ति का प्रतीक है। माला धारण करने से सनातन धर्म को बल मिलता है। साथ ही यह सनातन धर्म का चिह्न है और हमारी आस्था इससे जुड़ी हुई है। - हेमंत पंडित, सेवाधिकारी बांके बिहारी मंदिर, राधाकुंड



राधाकुंड में बनने वाली तुलसी की कंठी माला की मांग देश के साथ विदेशों में भी है। गुरु पूर्णिमा पर्व पर गुरुजनों द्वारा ज्ञान के रूप में तुलसी की कंठी अपने शिष्यों के गले में धारण कराई जाती है। - पंकज दास बाबा
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