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Mathura News: मौसम और मंदी की दोहरी मार झेल रहा आलू किसान
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मथुरा। सब्जियों का राजा आलू इन दिनों मंदी और मौसम की दोहरी मार झेल रहा है। जिले के आलू उत्पादक किसान संकट में घिरते नजर आ रहे हैं। लगातार बिगड़ते और बदलते मौसम के कारण आलू किसानों का काम समय पर नहीं हो पा रहा है। उधर, मंडी और बाजारों में आलू के भावों में उतार-चढ़ाव चल रहा है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
जिले में करीब 90 प्रतिशत आलू की खुदाई का काम हो चुका है, लेकिन खुदाई के बाद जो आलू खेतों पर पड़ा है, कभी बारिश कभी धूप से उसकी गुणवत्ता खराब हो रही है। इस वजह से मंदी के दौर में आलू के दाम और कम होने की आशंका है। मंडियों में गिरते भाव और बढ़ती लागत के कारण किसान आर्थिक परेशानी में है। वर्तमान में मंडी में आलू का भाव 600 से 800 रुपये प्रति कुंतल चल रहा है। यह भाव भी स्थिर नहीं हैं। किसानों की मांग है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद शुरू करे।
जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि जिले में करीब 40 हजार आलू किसान हैं। इस वर्ष करीब 16500 हेक्टेयर में आलू की फसल हुई थी, जिसमें से वर्तमान में करीब 90 प्रतिशत आलू की खुदाई हो चुकी है। 10 प्रतिशत खुदाई का कार्य अभी बकाया है। खेतों में आलू पड़ा है, लेकिन उसे निकालने की हिम्मत किसान नहीं जुटा पा रहे हैं। जिले में 49 शीतगृहों में आलू का भंडारण होता हैं। इनकी क्षमता 439347 मीट्रिक टन है। शीतगृहों में करीब 85 प्रतिशत भंडारण हो चुका हैं।
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जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार सिहं ने बताया कि वर्ष 2025-26 के लिए सहकारी और व्यावसायिक दोनों का बैंकों का 1 लाख 11 हजार 387 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) देने का लक्ष्य था, जिसमें से सहकारी ने 132 और व्यावसायिक बैंकों ने 96953 किसानों को केसीसी दिया है।
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जिले में करीब 90 प्रतिशत आलू की खुदाई का काम हो चुका है, लेकिन खुदाई के बाद जो आलू खेतों पर पड़ा है, कभी बारिश कभी धूप से उसकी गुणवत्ता खराब हो रही है। इस वजह से मंदी के दौर में आलू के दाम और कम होने की आशंका है। मंडियों में गिरते भाव और बढ़ती लागत के कारण किसान आर्थिक परेशानी में है। वर्तमान में मंडी में आलू का भाव 600 से 800 रुपये प्रति कुंतल चल रहा है। यह भाव भी स्थिर नहीं हैं। किसानों की मांग है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद शुरू करे।
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जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि जिले में करीब 40 हजार आलू किसान हैं। इस वर्ष करीब 16500 हेक्टेयर में आलू की फसल हुई थी, जिसमें से वर्तमान में करीब 90 प्रतिशत आलू की खुदाई हो चुकी है। 10 प्रतिशत खुदाई का कार्य अभी बकाया है। खेतों में आलू पड़ा है, लेकिन उसे निकालने की हिम्मत किसान नहीं जुटा पा रहे हैं। जिले में 49 शीतगृहों में आलू का भंडारण होता हैं। इनकी क्षमता 439347 मीट्रिक टन है। शीतगृहों में करीब 85 प्रतिशत भंडारण हो चुका हैं।
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जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार सिहं ने बताया कि वर्ष 2025-26 के लिए सहकारी और व्यावसायिक दोनों का बैंकों का 1 लाख 11 हजार 387 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) देने का लक्ष्य था, जिसमें से सहकारी ने 132 और व्यावसायिक बैंकों ने 96953 किसानों को केसीसी दिया है।