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नोडल अफसर ने भी देखे यमुना में गिरते नाले

Fri, 22 Jan 2016 11:00 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा Updated Fri, 22 Jan 2016 11:00 PM IST
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pollution in yamuna
यमुना के साथ करोड़ों भक्तों की आस्था से खेल रहे सरकारी सिस्टम का बुरा हाल देखने के लिए एक बार फिर नोडल अफसर यमुना तक पहुंचे। एसपीएस संचालन के नाम पर औपचारिकता पूरी होती मिली। नालों का पानी सीधे यमुना में जा रहा था। पालिका के अफसर और ठेकेदार अपने बचाव में कुतर्क दे रहे थे। ये हालात तब हैं जबकि नगर पालिका एसटीपी और एसपीएस संचालन के लिए प्रति वर्ष करीब 2.25 करोड़ रुपये खर्च करती है।
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इस बार महीनों बाद किसी प्रशासनिक अफसर ने यमुना का हाल देखा। डीएम राजेश कुमार भी यमुना में नालों को गिरते हुए देख चुके हैं। सिटी मजिस्ट्रेट भी कई बार यमुना की यह बदहाली देख पालिका को निर्देशित कर चुके हैं, लेकिन डीएम सहित इन अन्य आला अफसरों के दिशा-निर्देशों का कोई असर यमुना की सेहत बिगाड़ रहे हालात पर नहीं पड़ा। ये स्थिति शुक्रवार को एडीएम वित्त एवं यमुना कार्ययोजना के नोडल अफसर महेन्द्र प्रकाश के निरीक्षण में साफ नजर आई।
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सदर क्षेत्र स्थित अंबाखार नाला सीधे यमुना में गिरते मिला। डेरीफार्म एसपीएस पर दो छोटे पंप चलते मिले, जो पानी को पंप करने में नाकाफी थे। नालों का पानी इधर उधर से यमुना में गिर रहा था। इस स्थिति पर नाराज नोडल अफसर को पालिका के अधिकारी और ठेकेदार ने निरंतर गुमराह करने की कोशिश की। हालांकि याची गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने उनकी हर बात को काटते रहे। इसके बाद नोडल अफसर एडीएम वित्त मसानी स्थित पंपिंग स्टेशन को देखने पहुंचे। इसका और भी बुरा हाल था। यहां भी नाला सिल्ट से भरा हुआ था। पानी सीधे यमुना में जाते हुए मिला।
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इस पर गहरी चिंता जताते हुए नोडल अफसर महेन्द्र प्रकाश ने परियोजना अधिकारी जल निगम मौहम्मद निजामुद्दीन, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आरके सिंह और पालिका के एई उदयराज सिंह, जलकल अभियंता को यमुना में नालों को गिरने से तत्काल रोकने के कारगर कदम उठाने के लिए निर्देशित किया।
 

कहां हो रहे 2.25 करोड़ खर्च
नगर पालिका एसटीपी और एसपीएस संचालन के लिए प्रति वर्ष करीब 2.25 करोड़ रुपये खर्च करती है। इसके बावजूद शहर के नालों का पानी सीधे यमुना में गिर रहा है। प्रशासनिक और नगर पालिका के अफसर इसे खामोशी के साथ देखते हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि भारी भरकम खर्च के बावजूद लापरवाह ठेकेदार के प्रति अफसरों की सहानुभूति क्यों रहती है।

एसपीएस और एसटीपी की वर्तमान निर्धारित क्षमता के अनुरूप पंपों का संचालन किया जाए तो नालों का एक बूंद पानी यमुना में नहीं गिरेगा। यह सिर्फ आंकड़ों की कलाकारी करते हुए बचाव का रास्ता है। प्रशासनिक और नगर पालिका का गठजोड़ ही यमुना में प्रदूषण के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। जिस दिन प्रशासनिक अफसर चाहेंगे यमुना में नालों का गिरना बंद हो जाएगा।

-गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, याची, इलाहाबाद हाईकोर्ट

15 माह बाद आज यमुना कार्य योजना की बैठक
यमुना कार्ययोजना क्रियान्वयन समिति की बैठक ठीक 15 माह बाद 23 जनवरी को होने जा रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पालन के लिए गठित यह समिति पिछले कई वर्षों से सिर्फ दिशा-निर्देश की औपचारिकता बन कर रह गई है।
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