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Mathura: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा पहुंचे भरतपुर के गुलाबी पत्थर, कल से कारसेवा का एलान

Sat, 08 Aug 2026 03:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मथुरा
अमर उजाला नेटवर्क, मथुरा Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 08 Aug 2026 03:46 AM IST
सार

स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने कहा था कि नौ अगस्त से उनके आश्रम से विधिवत कारसेवा शुरू करने की घोषणा होगी। इसके लिए यहां भव्य कार्यक्रम रखा गया है जिसमें 13 अखाड़ों से साधु संतों को बुलाया गया है।

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Pink stones from Bharatpur have arrived in Mathura for construction of the Shri Krishna Janmabhoomi Temple
रात में पहुंची पहली खेप... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हैंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के इरादे से मंगाए गए गुलाबी पत्थरों की पहली खेप शुक्रवार की देर रात पहुंच गई। ये पत्थर भरतपुर स्थित बंसीपहाड़पुर से मंगाए गए हैं। इन्हीं पत्थरों से अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने ये पत्थर मंगवाएं हैं। उन्होंने नौ अगस्त से श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए कारसेवा शुरू करने एवं पत्थर तराशने का काम शुरू करने का ऐलान किया है।

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स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने कहा था कि नौ अगस्त से उनके आश्रम से विधिवत कारसेवा शुरू करने की घोषणा होगी। इसके लिए यहां भव्य कार्यक्रम रखा गया है जिसमें 13 अखाड़ों से साधु संतों को बुलाया गया है। महाराज ने कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर उनकी जन्मभूमि पर अब बनाया जाएगा। इसके लिए उन्होंने गुलाबी रंग के पांच हजार मीट्रिक टन पत्थरों का ऑर्डर दिया था। अयोध्या में हुए श्रीराम मंदिर के निर्माण में भी इन्हीं पत्थरों को लगाया गया था। इसी की एक खेप देर रात पहुंच गई।
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दरअसल, स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने 4 जुलाई को अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए कारसेवा का एलान किया था। इसके लिए उन्होंने 12 जुलाई को हरिद्वार स्थित वात्सल्य गंगा आश्रम में साध्वी ऋतंभरा से मुलाकात कर समर्थन मांगा था। उधर, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी महाराज, निर्मोही अखाड़े के प्रवक्ता संत सीताराम दास ने भी इस कार सेवा को अपना समर्थन दे दिया था।
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प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार महाराज से मुलाकात कर इस प्रकरण पर बात की थी। महाराज ने कहा था कि यह नौ अगस्त को ही तय होगा कि वे आगे क्या करेंगे लेकिन फिलहाल पत्थरों के पहुंचने से उनका रुख साफ हो गया है। इन्हें तराशने का काम नौ अगस्त से शुरू हो ही जाएगा।

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