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Mathura News: छत टपकने पर पीकू वार्ड को बनाया एसएनसीयू वार्ड
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मथुरा। महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड का बंद दरवाजा।
- फोटो : mathura
मथुरा। प्रदेश सरकार सरकारी अस्पतालों में मरीजों को उपचार कराने के लिए लगातार जागरूक कर रही है। इसके लिए तमाम योजनाएं भी चलाई जा रही हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों की बदहाल होती हालत को सुधारने की ओर कोई ध्यान नहीं है। महिला जिला अस्पताल में भी कुछ इसी प्रकार का हाल है। यहां अस्पताल का एसएनसीयू वार्ड (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) की छत से पानी टपकने लगा है। अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन महिला अस्पताल में बने पीकू वार्ड को एसएनसीयू वार्ड में तब्दील कर दिया। अब यहां नवजात बच्चों को रखा जा रहा है।
महिला अस्पताल के जनरल वार्ड के ऊपर बना एसएनसीयू वार्ड पिछले काफी समय से संचालित था। यहां नवजात शिशुओं को जीवन-रक्षक उपचार दिया जा रहा है। यहां समय से पहले पैदा होने वाले और कमजोर नवजातों को मशीनों में रखकर उनकी देखभाल होती थी। पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के कारण एसएनसीयू वार्ड की छत से पानी टपकने लगा। यहां तक कि दीवार और छत पर लगा प्लास्टर भी टूटने लगा। इसकी जानकारी सीएमएस अनिल कुमार पुर्वानी को हुई तो उन्होंने पीकू वार्ड एसएनसीयू में तब्दील कर दिया। वर्तमान में पीकू वार्ड में मशीनों में बच्चों को रखा जा रहा है। साथ ही एसएनसीयू वार्ड की छत और दीवारों की मरम्मत के लिए शासन से धनराशि की मांग की है।
उन्होंने बताया कि एसएनसीयू वार्ड संवेदनशील वार्ड होता है। इसमें लगी मशीनों में बच्चों को रखा जाता है ताकि उनके जीवन की रक्षा हो सके। वार्ड में ऑक्सीजन, फोटोथेरेपी और संक्रमण से बचाव के सभी उपाय किए जाते हैं, लेकिन वार्ड की छत क्षतिग्रस्त होने के कारण सीलन से प्लास्टर उखड़ने लगा था। इसलिए पीकू वार्ड को एसएनसीयू वार्ड बनाया गया है।
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कोविड के दौरान बनाया गया था पीकू वार्ड
कोविड महामारी में बच्चों के लिए महिला अस्पताल में पीकू वार्ड बनाया गया था। इसके लिए एक दर्जन के करीब ऑक्सीजन युक्त पलंग, एसी समेत अन्य उपकरण उपलब्ध कराए गए थे। कोविड के दौरान यहां बच्चों को भर्ती भी किया गया था। इसके बाद भी यहां उपचार के लिए बच्चों को भर्ती किया जाता था।
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महिला अस्पताल के जनरल वार्ड के ऊपर बना एसएनसीयू वार्ड पिछले काफी समय से संचालित था। यहां नवजात शिशुओं को जीवन-रक्षक उपचार दिया जा रहा है। यहां समय से पहले पैदा होने वाले और कमजोर नवजातों को मशीनों में रखकर उनकी देखभाल होती थी। पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के कारण एसएनसीयू वार्ड की छत से पानी टपकने लगा। यहां तक कि दीवार और छत पर लगा प्लास्टर भी टूटने लगा। इसकी जानकारी सीएमएस अनिल कुमार पुर्वानी को हुई तो उन्होंने पीकू वार्ड एसएनसीयू में तब्दील कर दिया। वर्तमान में पीकू वार्ड में मशीनों में बच्चों को रखा जा रहा है। साथ ही एसएनसीयू वार्ड की छत और दीवारों की मरम्मत के लिए शासन से धनराशि की मांग की है।
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उन्होंने बताया कि एसएनसीयू वार्ड संवेदनशील वार्ड होता है। इसमें लगी मशीनों में बच्चों को रखा जाता है ताकि उनके जीवन की रक्षा हो सके। वार्ड में ऑक्सीजन, फोटोथेरेपी और संक्रमण से बचाव के सभी उपाय किए जाते हैं, लेकिन वार्ड की छत क्षतिग्रस्त होने के कारण सीलन से प्लास्टर उखड़ने लगा था। इसलिए पीकू वार्ड को एसएनसीयू वार्ड बनाया गया है।
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कोविड के दौरान बनाया गया था पीकू वार्ड
कोविड महामारी में बच्चों के लिए महिला अस्पताल में पीकू वार्ड बनाया गया था। इसके लिए एक दर्जन के करीब ऑक्सीजन युक्त पलंग, एसी समेत अन्य उपकरण उपलब्ध कराए गए थे। कोविड के दौरान यहां बच्चों को भर्ती भी किया गया था। इसके बाद भी यहां उपचार के लिए बच्चों को भर्ती किया जाता था।