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रो पड़े लोग...बैंक वालों के पैर तक पकड़ लिए

Sun, 13 Nov 2016 12:09 AM IST
अमर उजाला मथुरा
अमर उजाला मथुरा Updated Sun, 13 Nov 2016 12:09 AM IST
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peoples were weeping for money
रो पड़े लोग - फोटो : अमर उजाला
500 और 1000 के नोट बंद होने के तीसरे दिन हालात और खराब रहे। बैंकों के बाहर कतारें लगी थीं। कई जगह कैश भी खत्म हो गया। किसी की बेटी की बारात आ रही है तो किसी को बीमार पिता की दवाई लानी है। ऐसे में कई लोग रो तक पड़े। अधिक रकम निकालने के लिए बैंककर्मियों के पैर तक पकड़ लिए। कुछ तो यहां तक कह उठे कि अगर पैसे नहीं मिले तो बच्चे भूखे रह जाएंगे। 
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मैनेजर साहब मेरा पैसा निकाल दो, कल मेरी बेटी की शादी है। मैं कई दिन से पैसे के लिए भटक रहा हूं। मुझे पैसे की बहुत जरूरत है। ये कहते हुए 55 वर्षीय हरवीर सिंह ने जमीन पर बैठकर बैंक ऑफ बडौदा के मैनेजर के पैर पकड़ लिए। उसके मुख से जहां पैसे की जरूरत की पीड़ा झलक रही थी तो साथ में आंखों से आंसू बह रहे थे। हरवीर सिंह शादी का कार्ड लेकर आए थे। बोले कि कल बरात आनी है। पैसे नहीं मिले तो विवाह कैसे होगा। मैंने अपने खाते में बेटी की शादी के लिए ही 2.7 लाख रुपये जमा किए थे। अब बेटी की शादी के लिए मेरे पैसे को निकाल दो। मैनेजर भी इस स्थिति में सिर्फ 10,000 से अधिक न देने की लाचारी दर्शा रहे थे।
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सौंख रोड पर स्टेट बैंक में शाम 5:30 बजे लोगों की एंट्री रोक दी गई। 500-500 के तीन नोट हाथ में लिए महिला गेट पर मौजूद गार्ड से लड़ने लगी। 62 वर्षीय महिला कह रही थी कि किसी तरह मेरे ये तीन नोट बदल दो। दो दिन से परेशान हूं। ये नहीं बदले तो कल सुबह मेरे घर में रोटी नहीं बनेगी। मजदूरी अधूरी छोड़कर बैंक आई हूं। लेकिन, गार्ड ने महिला को एंट्री देने से मना कर दिया। 
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चौक बाजार स्थित मंदिर राधाबल्लभ मंदिर में पिछले तीन दशक से सेवा कर रहे 62 वर्षीय कालीचरन की रातों की नींद उड़ गई है। उनके पास 500-500 के 47 नोट मौजूद हैं। उन्होंने यहां रहकर ठाकुर जी और उनके भक्तों के अलावा कभी किसी विषय पर सोचा ही नहीं। भक्तों ने भोजन ग्रहण कराने के दौरान जो दक्षिणा प्रदान की, उसी को जोड़कर यह रकम 15-20 सालों में एकत्रित कर ली है। ठाकुर जी और उनके भक्तों के बीच तक सीमित रहने वाले कालीचरन ने न तो अपना वोटर कार्ड बनवाया, न आधार और राशन कार्ड। ऐसे में बैंक एकाउंट की तो उम्मीद भी नहीं की जा सकती है। यह रकम भी उन्होंने अपने तकिया में बचाकर रखी। अब 500 और 1000 के नोट बंद होने से परेशान कालीचरन मंदिर सेवायत से ही सुबह-शाम इन्हें बदलवाने की गुहार लगाते रहते हैं। 
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