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Mathura News: यूनिफॉर्म के नाम पर भी काटी जा रही अभिभावकों की जेब
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मथुरा। जिले के अधिकांश निजी स्कूलों में यूनिफार्म, स्टेशनरी, स्कूल वाहन, नामांकन व फीस आदि के नाम पर खुली लूट मची है। इसके शिकार अभिभावक बन रहे हैं। स्कूलों ने पूर्व की तरह यूनिफॉर्म के लिए दुकानें तय की हैं। कुछ स्कूल संचालक परिसर में ही यूनिफॉर्म और स्टेशनरी उपलब्ध करा रहे हैं और शिक्षा विभाग इन मामलों से अनजान बना हुआ है।
अभिभावकों का कहना है कि सामान्य यूनिफॉर्म के अलावा स्कूलों ने विशेष दिनों के लिए अलग यूनिफॉर्म निर्धारित की है। इसके अलावा हर साल स्कूलों में नामांकन शुल्क लिया जा रहा है, जबकि एक बार किसी कक्षा में नामांकन कराने के बाद नामांकन शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। इसके अलावा स्कूलों में स्टेशनरी की दुकान संचालित हो रही हैं। यूनिफाॅर्म से लेकर काॅपी-किताब, डायरी व वाहन किराया के नाम अभिभावकों से लूट मची हुई है।
इस संदर्भ में कई बार शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से शिकायतें की गई लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। अभिभावकों से जबरन चार महीने की फीस एक बार में लेकर एक साल में चार स्टाॅलमेंट बनाई जा रही हैं। जूनियर कक्षा में नामांकन, फीस, वाहन किराया, यूनिफार्म, कापी-किताब, डायरी, आईडी कार्ड, परीक्षा शुल्क के नाम पर 20 से 50 हजार और हाईस्कूल व इंटर में साल का 40 से 80 हजार रूपये तक वसूल किए जा रहे हैं।
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सरकार को लेना चाहिए संज्ञान
छात्र अभिभावक कल्याण संघ के संस्थापक शशि भानू गर्ग का कहना है कि अधिकांश स्कूल अभिभावकों के उत्पीड़न के अड्डे बने हैं। किताबों और यूनिफॉर्म तक में कमीशन तय रहता है। सरकार को जनहित में इन बातों का संज्ञान लेना चाहिए। पूरे देश में एक पाठ्यक्रम और एक रेट तय होने चाहिए।
अभिभावकों की बात
स्कूलों द्वारा पहली बार नहीं है जब अभिभावकों को उत्पीड़न किया जा रहा हो। इसके बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारी अनभिज्ञ बने हुए हैं।
- गिरधारी लाल अग्रवाल, अभिभावक
मध्यम वर्गीय परिवार के लिए बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को स्कूलों की मनमानी रोकने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है।
खुशी बंसल, अभिभावक
इसी माह जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक आयोजित कराने की तैयारी चल रही है। इसमें अभिभावकों की बात को भी प्रमुखता से रखा जाएगा। जांच में अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
रविंद्र सिंह, डीआईओएस
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अभिभावकों का कहना है कि सामान्य यूनिफॉर्म के अलावा स्कूलों ने विशेष दिनों के लिए अलग यूनिफॉर्म निर्धारित की है। इसके अलावा हर साल स्कूलों में नामांकन शुल्क लिया जा रहा है, जबकि एक बार किसी कक्षा में नामांकन कराने के बाद नामांकन शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। इसके अलावा स्कूलों में स्टेशनरी की दुकान संचालित हो रही हैं। यूनिफाॅर्म से लेकर काॅपी-किताब, डायरी व वाहन किराया के नाम अभिभावकों से लूट मची हुई है।
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इस संदर्भ में कई बार शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से शिकायतें की गई लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। अभिभावकों से जबरन चार महीने की फीस एक बार में लेकर एक साल में चार स्टाॅलमेंट बनाई जा रही हैं। जूनियर कक्षा में नामांकन, फीस, वाहन किराया, यूनिफार्म, कापी-किताब, डायरी, आईडी कार्ड, परीक्षा शुल्क के नाम पर 20 से 50 हजार और हाईस्कूल व इंटर में साल का 40 से 80 हजार रूपये तक वसूल किए जा रहे हैं।
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सरकार को लेना चाहिए संज्ञान
छात्र अभिभावक कल्याण संघ के संस्थापक शशि भानू गर्ग का कहना है कि अधिकांश स्कूल अभिभावकों के उत्पीड़न के अड्डे बने हैं। किताबों और यूनिफॉर्म तक में कमीशन तय रहता है। सरकार को जनहित में इन बातों का संज्ञान लेना चाहिए। पूरे देश में एक पाठ्यक्रम और एक रेट तय होने चाहिए।
अभिभावकों की बात
स्कूलों द्वारा पहली बार नहीं है जब अभिभावकों को उत्पीड़न किया जा रहा हो। इसके बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारी अनभिज्ञ बने हुए हैं।
- गिरधारी लाल अग्रवाल, अभिभावक
मध्यम वर्गीय परिवार के लिए बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को स्कूलों की मनमानी रोकने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है।
खुशी बंसल, अभिभावक
इसी माह जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक आयोजित कराने की तैयारी चल रही है। इसमें अभिभावकों की बात को भी प्रमुखता से रखा जाएगा। जांच में अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
रविंद्र सिंह, डीआईओएस