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निधिवनराज मंदिर में नहीं पहुंच रहा पारस
अमर उजाला वृंदावन
Updated Fri, 12 Aug 2016 11:45 PM IST
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बांकेबिहारी मंदिर
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कुशल संचालन के अभाव में ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की व्यवस्थाएं निरंतर बिगड़ती जा रही हैं। अव्यवस्थाओं का प्रभाव अब मंदिर सेवायतों पर भी पड़ने लगा है। मंदिर प्रबंधन की ओर से सेवायतों को मिल रही सुविधाएं अनिश्चित काल के लिए रोक दी गई हैं।
बांकेबिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी के गठन के मामले में याचिका पर सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कमेटी के अधिकार सीज कर दिए हैं। कोर्ट ने मंदिर प्रशासक सिविल जज जूनियर डिवीजन को ही मंदिर की व्यवस्थाएं संभालने के आदेश जारी किए थे। कमेटी के अधिकार सीज होने से प्रबंधन का सभी प्रकार का आर्थिक लेनदेन भी अटक गया है।
इसका असर ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के प्राकट्य स्थल निधिवन राज मंदिर पर भेजे जाने वाले भोग प्रसाद और प्रसादी के रूप में सेवायतों को मिलने वाले प्रसाद के थाल (पारस) पर भी पड़ने लगा है। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर और निधिवनराज के सेवायत भीकचंद्र गोस्वामी ने बताया कि बीते चार दिन से मंदिर से आने वाली पारस की व्यवस्था बंद है।
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मंदिर प्रशासन प्रबंधकउमेश सारस्वत का कहना है कि धन के अभाव में ठाकुरजी की राजभोग प्रसादी सेवा प्रभावित हुई। राजभोग सेवा का वहन अब मंदिर के राजभोग सेवाधिकारी गोस्वामीजन ही उठा रहे हैं। इस कारण अन्य सेवायतों को ठाकुरजी की प्रसादी का पारस नहीं दिया जा रहा है। प्रबंधन द्वारा सेवायतों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी पाबंदी लगा दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रशासक का नया आदेश आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सेवायतों की यह सुविधाएं बंद
मंदिर प्रबंध कमेटी की ओर से गोस्वामी समाज के परिवार के लोगों को मिलने वाली वृद्ध एवं विधवा पेंशन, प्रसाद का थाल (पारस), छात्रवृत्ति, बच्चों के विद्यालय का शुल्क आदि सुविधाएं रोक दी गई हैं।
जारी है राजभोग सेवा
ठाकुर बांकेबिहारी महाराज को अर्पित होने वाली राजभोग सेवा की व्यवस्था वर्तमान में मंदिर सेवायत बालमुकुंद गोस्वामी द्वारा बेरीवाला परिवार के सहयोग से की जा रही है। उन्होंने बताया कि ठाकुरजी को राजभोग सेवा में कच्ची रसोई पहले की भांति ही परोसी जा रही है।
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बांकेबिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी के गठन के मामले में याचिका पर सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कमेटी के अधिकार सीज कर दिए हैं। कोर्ट ने मंदिर प्रशासक सिविल जज जूनियर डिवीजन को ही मंदिर की व्यवस्थाएं संभालने के आदेश जारी किए थे। कमेटी के अधिकार सीज होने से प्रबंधन का सभी प्रकार का आर्थिक लेनदेन भी अटक गया है।
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इसका असर ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के प्राकट्य स्थल निधिवन राज मंदिर पर भेजे जाने वाले भोग प्रसाद और प्रसादी के रूप में सेवायतों को मिलने वाले प्रसाद के थाल (पारस) पर भी पड़ने लगा है। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर और निधिवनराज के सेवायत भीकचंद्र गोस्वामी ने बताया कि बीते चार दिन से मंदिर से आने वाली पारस की व्यवस्था बंद है।
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मंदिर प्रशासन प्रबंधकउमेश सारस्वत का कहना है कि धन के अभाव में ठाकुरजी की राजभोग प्रसादी सेवा प्रभावित हुई। राजभोग सेवा का वहन अब मंदिर के राजभोग सेवाधिकारी गोस्वामीजन ही उठा रहे हैं। इस कारण अन्य सेवायतों को ठाकुरजी की प्रसादी का पारस नहीं दिया जा रहा है। प्रबंधन द्वारा सेवायतों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी पाबंदी लगा दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रशासक का नया आदेश आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सेवायतों की यह सुविधाएं बंद
मंदिर प्रबंध कमेटी की ओर से गोस्वामी समाज के परिवार के लोगों को मिलने वाली वृद्ध एवं विधवा पेंशन, प्रसाद का थाल (पारस), छात्रवृत्ति, बच्चों के विद्यालय का शुल्क आदि सुविधाएं रोक दी गई हैं।
जारी है राजभोग सेवा
ठाकुर बांकेबिहारी महाराज को अर्पित होने वाली राजभोग सेवा की व्यवस्था वर्तमान में मंदिर सेवायत बालमुकुंद गोस्वामी द्वारा बेरीवाला परिवार के सहयोग से की जा रही है। उन्होंने बताया कि ठाकुरजी को राजभोग सेवा में कच्ची रसोई पहले की भांति ही परोसी जा रही है।