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वृंदावन में है उत्तर भारत का एकमात्र विष्णुप्रिया मंदिर
अजय खंडेलवाल
Updated Thu, 05 Nov 2015 07:58 PM IST
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श्रीचैतन्य महाप्रभु के वृंदावन आगमन के 500वें वर्ष का उत्सव मनाया जा रहा है। इससे ठीक पहले ही उनकी पत्नी विष्णुप्रिया भी वृंदावन पहुंच गई हैं। इस उत्सव को लेकर उत्तर भारत के एकमात्र वृंदावन स्थित विष्णुप्रिया मंदिर में भी उल्लास है।
वृंदावन में राधारमण मंदिर परिक्रमा मार्ग में स्थित इस मंदिर के पीछे का इतिहास रोचक है। राधारमण मंदिर के सेवायत गोस्वामी भक्त वत्सल्य अनिल बताते हैं कि करीब 60 साल पहले वो अपने पिता कृष्ण कुमार गोस्वामी के साथ चैतन्य महाप्रभु की जन्मस्थली नवद्वीप गए।
यहां दर्शन के बाद परिचय हुआ तो वृंदावन का नाम सुनते ही भक्त भावुक हो गए। बोले, जब आप महाप्रभु जी को ले गए तो फिर विष्णुप्रिया (उनकी पत्नी) को वृंदावन कब ले जाएंगे। प्रभु के भक्त के इस भाव पर पिता ने संकल्प लिया कि वो विष्णु प्रिया को वृंदावन लाएंगे।
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चैतन्म महाप्रभु के वृंदावन आगमन के 500वें वर्ष में मनाए जा रहे शती समारोह 6 नवंबर, 2014 से शुरू हुए। इससे ठीक पूर्व वसंत पंचमी (विष्णु प्रिया के जन्मदिन) पर विष्णुप्रिया की वृंदावन में स्थापना की गई।
भाव स्पष्ट है कि चैतन्य महाप्रभु के पंच शती समारोह के उल्लास में विष्णु प्रिया भी शामिल हो रही हैं। 18 नवंबर को इसी कड़ी में भव्य महोत्सव का आयोजन हो रहा है।
चंद्रग्रहण में प्रभु का हुआ आविर्भाव
कलकत्ता से उत्तर पश्चिम में स्थित नवद्वीप नाम के नगर में 1486 ई., फाल्गुनी पूर्णिमा (होली का दिन), संध्या बेला, चंद्रग्रहण स्पर्श काल में श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव हुआ। इनके जन्म स्थान के समीप ही नीम का वृक्ष होने के कारण माता ने इनका नाम निमाई रखा। बचपन से ही हरिनाम के प्रेमी होने के कारण गौर हरि कहलाए। सन्यास ग्रहण करने पर गुरुदेव ने श्रीकृष्ण चैतन्य भारती नाम प्रदान किया। जो आगे चलकर स्वरूप, गुण धर्म के कारण महाप्रभु के नाम से विख्यात हुए।
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वृंदावन में राधारमण मंदिर परिक्रमा मार्ग में स्थित इस मंदिर के पीछे का इतिहास रोचक है। राधारमण मंदिर के सेवायत गोस्वामी भक्त वत्सल्य अनिल बताते हैं कि करीब 60 साल पहले वो अपने पिता कृष्ण कुमार गोस्वामी के साथ चैतन्य महाप्रभु की जन्मस्थली नवद्वीप गए।
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यहां दर्शन के बाद परिचय हुआ तो वृंदावन का नाम सुनते ही भक्त भावुक हो गए। बोले, जब आप महाप्रभु जी को ले गए तो फिर विष्णुप्रिया (उनकी पत्नी) को वृंदावन कब ले जाएंगे। प्रभु के भक्त के इस भाव पर पिता ने संकल्प लिया कि वो विष्णु प्रिया को वृंदावन लाएंगे।
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चैतन्म महाप्रभु के वृंदावन आगमन के 500वें वर्ष में मनाए जा रहे शती समारोह 6 नवंबर, 2014 से शुरू हुए। इससे ठीक पूर्व वसंत पंचमी (विष्णु प्रिया के जन्मदिन) पर विष्णुप्रिया की वृंदावन में स्थापना की गई।
भाव स्पष्ट है कि चैतन्य महाप्रभु के पंच शती समारोह के उल्लास में विष्णु प्रिया भी शामिल हो रही हैं। 18 नवंबर को इसी कड़ी में भव्य महोत्सव का आयोजन हो रहा है।
चंद्रग्रहण में प्रभु का हुआ आविर्भाव
कलकत्ता से उत्तर पश्चिम में स्थित नवद्वीप नाम के नगर में 1486 ई., फाल्गुनी पूर्णिमा (होली का दिन), संध्या बेला, चंद्रग्रहण स्पर्श काल में श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव हुआ। इनके जन्म स्थान के समीप ही नीम का वृक्ष होने के कारण माता ने इनका नाम निमाई रखा। बचपन से ही हरिनाम के प्रेमी होने के कारण गौर हरि कहलाए। सन्यास ग्रहण करने पर गुरुदेव ने श्रीकृष्ण चैतन्य भारती नाम प्रदान किया। जो आगे चलकर स्वरूप, गुण धर्म के कारण महाप्रभु के नाम से विख्यात हुए।