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शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणों से होती है अमृत वर्षा : गुरुशरणानंद
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यमुना पूजन करते बाबा रामदेव व अन्य संतगण
मथुरा। महावन स्थित कार्ष्णि आश्रम रमणरेती में शरद पूर्णिमा के पर्व पर योग गुरु बाबा रामदेव पहुंचे। उन्होंने पीठाधीश्वर कार्ष्णि गुरुशरणानंद महाराज से आशीर्वाद लिया और यमुना किनारे स्थित ब्रह्मांड घाट पर संतों के साथ यमुना पूजन किया।
पीठाधीश्वर कार्ष्णि गुरुशरणानंद महाराज ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है। इस विशेषता के कारण भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन को रासोत्सव के लिए उपयुक्त माना। शरद पूर्णिमा की सुबह आराध्य देव को श्वेत वस्त्राभूषण से सज्जित कर पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने कहा रमणरेती एक रमणीक स्थल है ब्रह्माण्ड घाट भी अपने आप में एक अलौकिक स्थान है यमुना महारानी की कल-कल निर्मल धारा बह रही है जो बहुत ही सुन्दर व अद्वितीय है।इसी दौरान गोविन्द तीर्थ महाराज, एवं अन्य संतों ने प्रवचन किए। इस अवसर पर कार्ष्णि स्वरुपा नंद महाराज कार्ष्णि दिव्यानंद महाराज, कार्ष्णि हरदेवानंद महाराज, भानु पीठाधीश्वर प्रेमानंद महाराज, दिनेश मिश्रा,चंदर अरोड़ा आदि भक्त मौजूद रहे।
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पीठाधीश्वर कार्ष्णि गुरुशरणानंद महाराज ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है। इस विशेषता के कारण भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन को रासोत्सव के लिए उपयुक्त माना। शरद पूर्णिमा की सुबह आराध्य देव को श्वेत वस्त्राभूषण से सज्जित कर पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
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गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने कहा रमणरेती एक रमणीक स्थल है ब्रह्माण्ड घाट भी अपने आप में एक अलौकिक स्थान है यमुना महारानी की कल-कल निर्मल धारा बह रही है जो बहुत ही सुन्दर व अद्वितीय है।इसी दौरान गोविन्द तीर्थ महाराज, एवं अन्य संतों ने प्रवचन किए। इस अवसर पर कार्ष्णि स्वरुपा नंद महाराज कार्ष्णि दिव्यानंद महाराज, कार्ष्णि हरदेवानंद महाराज, भानु पीठाधीश्वर प्रेमानंद महाराज, दिनेश मिश्रा,चंदर अरोड़ा आदि भक्त मौजूद रहे।
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