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Mathura News: शरद पूर्णिमा पर ठाकुरजी महारास में करेंगे प्रवेश
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वृंदावन। प्राचीन श्रीराधागोपीनाथ मंदिर में शरद पूर्णिमा पर ठाकुरजी शांत भाव से महारास में प्रवेश करेंगे। मंदिर के गर्भगृह के बाहर जगमोहन में चंद्रमा की धवल चांदनी में ठाकुर गोपीनाथ भक्तों को दर्शन देंगे। एक माह तक चलने वाला यह महारास कार्तिक की महारास पूर्णिमा, 24 नवंबर को संपन्न होगा। कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं।
500 साल पहले वर्ष 1527 में ठाकुर गोपीनाथ का प्राकट्य हुआ था। इसके बाद वर्ष 1559 में भव्य लाल पत्थर से बने विशाल मंदिर में ठाकुरजी विराजमान हुए। प्राचीन मंदिर में 25 को शरद पूर्णिमा पर महारास लीला का शुभारंभ होगा। मंदिर के सेवायत राजा गोस्वामी ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर ठाकुरजी के महारास दर्शन महोत्सव चंद्रमा की धवल रोशनी में होंगे। ठाकुरजी को शाम के समय गर्भगृह से बाहर जगमोहन में पुष्पों से सजे सिंहासन पर विराजमान किया जाएगा। उन्हें श्वेत रंग की जड़ावदार पोशाक धारण कराई जाएगी। साथ ही खीर का भोग भी लगाया जाएगा। इससे पहले सुबह गोपाल यज्ञ और गिरिराज पूजन किया जाएगा। यह आयोजन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।
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शांत भाव से महारास में प्रवेश करेंगे ठाकुरजी
सेवायत ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर ठाकुरजी शृंगार भाव में दर्शन देंगे। हालांकि, ठाकुर गोपीनाथ शांत भाव में महारास में प्रवेश करेंगे। भक्तों को गर्भगृह के बाहर जगमोहन में दर्शन प्राप्त होंगे। चंद्रमा की धवल चांदनी में यह महोत्सव विशेष होगा। ठाकुरजी को श्वेत वस्त्र और खीर का भोग अर्पित किया जाएगा। यह दर्शन भक्तों के मन को शांति प्रदान करेगा।
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मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
श्रीराधागोपीनाथ मंदिर का इतिहास पांच सौ साल से भी अधिक पुराना है। वर्ष 1527 में ठाकुर गोपीनाथ का प्राकट्य हुआ था। इसके बाद वर्ष 1559 में इस भव्य मंदिर का निर्माण हुआ। लाल पत्थर से बने इस विशाल मंदिर में ठाकुरजी विराजमान हैं। यह मंदिर वृंदावन के प्राचीन मंदिरों में से एक है। इसकी ऐतिहासिकता भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है।
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एक माह तक चलेगा महारास
शरद पूर्णिमा से शुरू होकर यह महारास एक माह तक चलेगा। कार्तिक की महारास पूर्णिमा पर इसका समापन होगा। यह तिथि 24 नवंबर को पड़ेगी। इस दिन ठाकुरजी पुनः शृंगार भाव में दर्शन देंगे। सेवायत द्वारा इस पूरे आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं।
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500 साल पहले वर्ष 1527 में ठाकुर गोपीनाथ का प्राकट्य हुआ था। इसके बाद वर्ष 1559 में भव्य लाल पत्थर से बने विशाल मंदिर में ठाकुरजी विराजमान हुए। प्राचीन मंदिर में 25 को शरद पूर्णिमा पर महारास लीला का शुभारंभ होगा। मंदिर के सेवायत राजा गोस्वामी ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर ठाकुरजी के महारास दर्शन महोत्सव चंद्रमा की धवल रोशनी में होंगे। ठाकुरजी को शाम के समय गर्भगृह से बाहर जगमोहन में पुष्पों से सजे सिंहासन पर विराजमान किया जाएगा। उन्हें श्वेत रंग की जड़ावदार पोशाक धारण कराई जाएगी। साथ ही खीर का भोग भी लगाया जाएगा। इससे पहले सुबह गोपाल यज्ञ और गिरिराज पूजन किया जाएगा। यह आयोजन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।
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शांत भाव से महारास में प्रवेश करेंगे ठाकुरजी
सेवायत ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर ठाकुरजी शृंगार भाव में दर्शन देंगे। हालांकि, ठाकुर गोपीनाथ शांत भाव में महारास में प्रवेश करेंगे। भक्तों को गर्भगृह के बाहर जगमोहन में दर्शन प्राप्त होंगे। चंद्रमा की धवल चांदनी में यह महोत्सव विशेष होगा। ठाकुरजी को श्वेत वस्त्र और खीर का भोग अर्पित किया जाएगा। यह दर्शन भक्तों के मन को शांति प्रदान करेगा।
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मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
श्रीराधागोपीनाथ मंदिर का इतिहास पांच सौ साल से भी अधिक पुराना है। वर्ष 1527 में ठाकुर गोपीनाथ का प्राकट्य हुआ था। इसके बाद वर्ष 1559 में इस भव्य मंदिर का निर्माण हुआ। लाल पत्थर से बने इस विशाल मंदिर में ठाकुरजी विराजमान हैं। यह मंदिर वृंदावन के प्राचीन मंदिरों में से एक है। इसकी ऐतिहासिकता भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है।
एक माह तक चलेगा महारास
शरद पूर्णिमा से शुरू होकर यह महारास एक माह तक चलेगा। कार्तिक की महारास पूर्णिमा पर इसका समापन होगा। यह तिथि 24 नवंबर को पड़ेगी। इस दिन ठाकुरजी पुनः शृंगार भाव में दर्शन देंगे। सेवायत द्वारा इस पूरे आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं।