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‘स्वरूप’ में संरक्षित होगी ब्रज की नृसिंह लीला
अमर उजाला वृंदावन
Updated Wed, 11 May 2016 11:58 PM IST
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ब्रज की नृसिंह लीला से जुड़ी दुर्लभ जानकारियाें को अब संरक्षित किया जाएगा।
- फोटो : अमर उजाला वृंदावन
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ब्रज की नृसिंह लीला से जुड़ी दुर्लभ जानकारियाें को अब संरक्षित किया जाएगा। साथ ही यह लोगों के लिए सहज रूप से उपलब्ध भी होंगी। ब्रज संस्कृति शोध संस्थान वृंदावन और संगीत नाटक अकादमी भारत सरकार के संयुक्त प्रयासों से सैकड़ों वर्ष पुरानी इस नृत्य नाट्य विधा के प्रचार में कार्य होने जा रहा है। इस परियोजना को ‘स्वरूप’ नाम दिया है।
बता दें के नृसिंह लीला ब्रज की पारंपरिक युद्धक नृत्य शैली है। इसमें मल्लविद्या और पटेबाजी के पैंतरों का प्रदर्शन देखते ही बनता है। ब्रज क्षेत्र के वाचिक इतिहास (मौखिक परंपरा) में विद्यमान अनेक जानकारियां आज विलुप्त होने के कगार पर हैं।
हर साल वैशाख मास की चतुर्दशी को इस नृत्य अनुष्ठान के आयोजन में नृसिंह, वराह, गणेश, हनुमान-मकरध्वज सहित अनेक पात्रों का स्वरूप धारण करने वाले लोगों के आहार-विहार, मुखौटा (चेहरा) कसे जाने की पद्धति, वस्त्राभूषणों की परंपरा के साथ लीला प्रदर्शन के दौरान दिखाए जाने वाले चक्रदंड, झूलदंड, हनुमान बैठक, ढाई चाल और खूंटीदार खड़ाऊं नृत्य आदि अपने आप में विशिष्ट हैं।
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इनका डॉक्यूमेंटेशन संस्थान की परियोजना ‘स्वरूप’ के अंतर्गत किया जा रहा है। कई चरणों में होने वाली इस शोध परियोजना के अंतर्गत आगामी 18 मई से आठ दिनों की भव्य प्रदर्शनी भी संस्थान द्वारा गोदा विहार मंदिर में लगाई जाएगी। इसमें विशषज्ञों के व्याख्यान भी आयोजित होंगे।
डाक टिकट का भी लोकार्पण
ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी ने बताया ब्रज की नृसिंह लीला को स्थायी स्मृति प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार इस विधा पर केंद्रित डाक टिकट भी जारी करेगी। इसकी तैयारी अंतिम पड़ाव पर है।
पुस्तक का होगा प्रकाशन
ब्रज की नृसिंह लीला पर एकाग्र इस ‘स्वरूप’ परियोजना के अंतर्गत पूरी परंपरा के समग्र पक्षों पर आधारित पुस्तक का प्रकाशन भी किया जाएगा। परियोजना के संयोजक डा. राजेश शर्मा ने बताया इस परंपरा से जुड़ी हर सामग्री अब डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगी।
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बता दें के नृसिंह लीला ब्रज की पारंपरिक युद्धक नृत्य शैली है। इसमें मल्लविद्या और पटेबाजी के पैंतरों का प्रदर्शन देखते ही बनता है। ब्रज क्षेत्र के वाचिक इतिहास (मौखिक परंपरा) में विद्यमान अनेक जानकारियां आज विलुप्त होने के कगार पर हैं।
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हर साल वैशाख मास की चतुर्दशी को इस नृत्य अनुष्ठान के आयोजन में नृसिंह, वराह, गणेश, हनुमान-मकरध्वज सहित अनेक पात्रों का स्वरूप धारण करने वाले लोगों के आहार-विहार, मुखौटा (चेहरा) कसे जाने की पद्धति, वस्त्राभूषणों की परंपरा के साथ लीला प्रदर्शन के दौरान दिखाए जाने वाले चक्रदंड, झूलदंड, हनुमान बैठक, ढाई चाल और खूंटीदार खड़ाऊं नृत्य आदि अपने आप में विशिष्ट हैं।
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इनका डॉक्यूमेंटेशन संस्थान की परियोजना ‘स्वरूप’ के अंतर्गत किया जा रहा है। कई चरणों में होने वाली इस शोध परियोजना के अंतर्गत आगामी 18 मई से आठ दिनों की भव्य प्रदर्शनी भी संस्थान द्वारा गोदा विहार मंदिर में लगाई जाएगी। इसमें विशषज्ञों के व्याख्यान भी आयोजित होंगे।
डाक टिकट का भी लोकार्पण
ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी ने बताया ब्रज की नृसिंह लीला को स्थायी स्मृति प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार इस विधा पर केंद्रित डाक टिकट भी जारी करेगी। इसकी तैयारी अंतिम पड़ाव पर है।
पुस्तक का होगा प्रकाशन
ब्रज की नृसिंह लीला पर एकाग्र इस ‘स्वरूप’ परियोजना के अंतर्गत पूरी परंपरा के समग्र पक्षों पर आधारित पुस्तक का प्रकाशन भी किया जाएगा। परियोजना के संयोजक डा. राजेश शर्मा ने बताया इस परंपरा से जुड़ी हर सामग्री अब डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगी।