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मालखानों में ‘मिट्टी’ बन जाएगा एक अरब रुपया
पुनीत शर्मा
Updated Thu, 10 Nov 2016 11:58 PM IST
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- फोटो : dfdf
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पुलिस के मालखानों में जमा एक अरब रुपया कहीं ‘मिट्टी’ न बन जाए। इस रकम में अधिकांश नोट 1000 और 500 के नोट हैं। पुलिस इस नोटों को बैंक जाकर बदल भी नहीं सकती क्योंकि ये कैश मुकदमाती है। मथुरा पुलिस के मालखानों में ही ऐसा करीब पांच करोड़ रुपया पड़ा है जो अपराधियों से बरामद हुआ था। अब पुलिस को इस पैसे की चिंता सताने लगी है।
प्रदेश पुलिस के मालखानों में अपराधियों से बरामद करीब एक अरब रुपया पड़ा है। कहीं-कहीं ट्रेजरी के डबल लॉक में भी पैसा रखवाया गया है। क्योंकि यह रकम केस प्रापर्टी मानी जाती है लिहाजा अदालत के आदेश पर ही पैसा रिलीज किया जा सकता है। अब जब सरकार ने 1000 और 500 के नोट बंद कर दिए हैं तब पुलिस की टेंशन इस रकम को लेकर बढ़ गई है। क्योंकि अपराधियों से बरामद पैसे में बड़े नोट ज्यादा हैं। मथुरा में ही यह रकम पांच करोड़ के करीब है।
पुलिस ने जनवरी, 2015 में आंध्र प्रदेश के हीरा व्यापारी से लूटे गए 22 लाख रुपये बरामद किए थे। यह रकम मालखाने में पड़ी है। सितंबर, 2015 में शिकोहाबाद में हुई लूट के 18 लाख रुपये पुलिस ने बरामद किए थे जो मालखाने में हैं। दिसंबर, 2015 में ग्वालियर के हवाला कारोबारी से 1.25 करोड़ रुपया पुलिस ने बरामद किया था जो आज भी कोतवाली पुलिस की सुरक्षा में रखा है।
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इस साल भी पुलिस ने बदमाशों से 16 लाख, 8 लाख, 11 लाख, 9 लाख, 7 लाख, 5 लाख और 4 लाख रुपये बरामद किए हैं। यह सारी रकम सदर और थानों के मालखानों में रखी गई है। जबकि 2013 और 2014 में बदमाशों से बरामद पैसा भी पुलिस सुरक्षा में है। वहीं वह लोग भी सक्रिय हो गए हैं जिनका यह पैसा है। थानों के चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं।
इन जिलों में पुलिस ने की थी बड़ी बरामदगी
लखनऊ, कानपुर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, नोएडा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बरेली, फैजाबाद, आगरा, अलीगढ़, मुरादाबाद, बिजनौर, झांसी, गोरखपुर, आगरा, मथुरा और अलीगढ़।
जिसका पैसा है वह अपील कर सकता है
महानिदेशक अभियोजन डा. सूर्यकुमार शुक्ला से जब इस संबंध में फोन पर बात की गई तो उनका कहना था कि जिसका पैसा है वह भी अदालत में अपील कर सकता है। वह कह सकता है कि उसका पैसा जमा है और वह नोटों को बदलना चाहता है। पुलिस भी इस मामले में अपील कर सकती है।
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प्रदेश पुलिस के मालखानों में अपराधियों से बरामद करीब एक अरब रुपया पड़ा है। कहीं-कहीं ट्रेजरी के डबल लॉक में भी पैसा रखवाया गया है। क्योंकि यह रकम केस प्रापर्टी मानी जाती है लिहाजा अदालत के आदेश पर ही पैसा रिलीज किया जा सकता है। अब जब सरकार ने 1000 और 500 के नोट बंद कर दिए हैं तब पुलिस की टेंशन इस रकम को लेकर बढ़ गई है। क्योंकि अपराधियों से बरामद पैसे में बड़े नोट ज्यादा हैं। मथुरा में ही यह रकम पांच करोड़ के करीब है।
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पुलिस ने जनवरी, 2015 में आंध्र प्रदेश के हीरा व्यापारी से लूटे गए 22 लाख रुपये बरामद किए थे। यह रकम मालखाने में पड़ी है। सितंबर, 2015 में शिकोहाबाद में हुई लूट के 18 लाख रुपये पुलिस ने बरामद किए थे जो मालखाने में हैं। दिसंबर, 2015 में ग्वालियर के हवाला कारोबारी से 1.25 करोड़ रुपया पुलिस ने बरामद किया था जो आज भी कोतवाली पुलिस की सुरक्षा में रखा है।
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इस साल भी पुलिस ने बदमाशों से 16 लाख, 8 लाख, 11 लाख, 9 लाख, 7 लाख, 5 लाख और 4 लाख रुपये बरामद किए हैं। यह सारी रकम सदर और थानों के मालखानों में रखी गई है। जबकि 2013 और 2014 में बदमाशों से बरामद पैसा भी पुलिस सुरक्षा में है। वहीं वह लोग भी सक्रिय हो गए हैं जिनका यह पैसा है। थानों के चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं।
इन जिलों में पुलिस ने की थी बड़ी बरामदगी
लखनऊ, कानपुर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, नोएडा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बरेली, फैजाबाद, आगरा, अलीगढ़, मुरादाबाद, बिजनौर, झांसी, गोरखपुर, आगरा, मथुरा और अलीगढ़।
जिसका पैसा है वह अपील कर सकता है
महानिदेशक अभियोजन डा. सूर्यकुमार शुक्ला से जब इस संबंध में फोन पर बात की गई तो उनका कहना था कि जिसका पैसा है वह भी अदालत में अपील कर सकता है। वह कह सकता है कि उसका पैसा जमा है और वह नोटों को बदलना चाहता है। पुलिस भी इस मामले में अपील कर सकती है।