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हरिनाम सुनाने वाले तुमको लाखों प्रणाम...

Sun, 15 Nov 2015 11:07 PM IST
अजय खंडेलवाल
अजय खंडेलवाल Updated Sun, 15 Nov 2015 11:07 PM IST
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noted artist swami hargovind performing gaurang lila
हरिनाम सुनाने वाले तुमको लाखों प्रणाम,
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हम बैठ पड़े थे मग में,
बस सो गये थे जग में,
ओ आके जगाने वाले, तुमको लाखों प्रणाम॥

जिन चैतन्य महाप्रभु ने ब्रजवासियों को कान्हा की लीलाआें से परिचित कराया, उनकी स्वयं की लीला (गौरांग लीला) से विश्व का साक्षात्कार कराने वाले भी ब्रजवासी ही हैं। इसे मात्र दुर्लभ संयोग ही कहेंगे कि वृंदावन को श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थली के रूप में विख्यात करने वाले चैतन्य महाप्रभु की लीला को वृंदावन के ही स्वामी हरगोविंद विश्वविख्यात कर रहे हैं।

साधना में समानता भी कुछ ऐसी है कि बंगाल के नवद्वीप में जन्मे निमाई (चैतन्य महाप्रभु का पूर्व नाम) जिस प्रकार सतत पग-पग चलकर जगन्नाथपुरी से वृंदावन पहुंचे थे, उसी प्रकार 59 वर्ष तक अपने सतत अभिनय से स्वामी हरगोविंद ने गौरांग लीला को विश्व भर में प्रकट किया है।
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गोविंद विहार निवासी स्वामी हरगोविंद की आयु आज लगभग 89 साल है लेकिन गौरांग लीला के प्रचार-प्रसार में आज भी पूरी ऊर्जा के साथ मग्न हैं। स्वास्थ्य कारणों से वे अपने अनुभव को अधिक तो व्यक्त नहीं कर पाए लेकिन अपने आवास पर अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि चैतन्य महाप्रभु की लीला भाव प्रधान है। बस कला का समावेश इस लीला को अनूठा बना देता है।
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अपनी लीला मंडली के साथ वे बीते छह दशकों से गौरांग लीला को मंच पर सजीव कर रहे हैं। उन्होंने भारत के द्वीप समूह अंडमान निकोबार से लेकर चीन, पाकिस्तान, थाइलैंड आदि विश्व के कई देशों में गौरांग प्रभु की कृष्ण भक्ति के संदेश को प्रसारित किया है। भारत सरकार कला के क्षेत्र में स्वामी हरगोविंद के योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित कर चुकी है। वे संभवत: भारत में पहले ऐसे कलाकार हैं जो राम और कृष्ण लीला से इतर गौरांग लीला के प्रचार में जुटे हैं।  


1960 में पहली बार प्रस्तुत की गौरांग लीला
स्वामी हरगोविंद के साथ गौरांग लीला में सहयोगी की भूमिका निभाने वाले अनिल गोस्वामी बताते हैं कि चैतन्य महाप्रभु की लीलाओं का सर्वप्रथम प्रदर्शन 1960 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में हुआ था। ये लीलाएं पद्मश्री स्वामी हरगोविंद की मंडली द्वारा ही की र्गइं।


इस अवसर पर देश के बड़े संत स्वामी अखंडानंद सरस्वती, प्रेमानंद स्वामी, श्रीहरि बाबा, आनंदमयी मां, हनुमान प्रसाद पोद्दार, स्वामी शरणानंद मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि स्वामी हरगोविंद को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव, पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरी और डा. एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।
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