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Mathura News: नियम ताक पर, सुरक्षा गायब... घरों को बने गेस्ट हाउस व होटल
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मथुरा। नई दिल्ली के मालवीय नगर में हुए होटल अग्निकांड के बाद मथुरा और वृंदावन के होटलों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मथुरा-वृंदावन के रिहायशी इलाकों में आवासीय भवनों को होटल और गेस्ट हाउस में तब्दील करने का चलन बढ़ता जा रहा है। इन प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की जा रही है, जिससे आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे हैं। बीते दिनों औद्योगिक क्षेत्र साइट-ए स्थित थर्माकोल फैक्टरी में भीषण आग लग गई थी। दर्जनों लोगों की जान बाल-बाल बची थी। बावजूद इसके जिम्मेदारों की निष्क्रियता चिंताजनक बनी हुई है।
बुधवार को मथुरा-वृंदावन में कई क्षेत्रों की पड़ताल की गई। इस दौरान लक्ष्मी नगर यमुना पुल के निकट, पोतरा कुंड के आसपास, भरतपुर गेट से डीग गेट, धौली प्याऊ, भैंस बहोरा समेत शहर की कई पॉश इलाकों में धड़ल्ले से होटल व गेस्ट हाउस संचालित हो रहे हैं। ये ऐसे स्थान हैं जहां केवल रिहायशी भवनों की अनुमति है, लेकिन लोगों ने घरों में गेस्ट हाउस खोलकर श्रद्धालुओं के ठहरने का अड्डा बना लिया है। इन इमारतों में न तो आग से बचाव के उचित इंतजाम हैं और न ही आपातकालीन निकास की व्यवस्था। कई जगहों पर तो बिजली के तार भी असुरक्षित तरीके से लगे हुए हैं, जो किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
अधिकांश होटलों के पास न तो अग्निशमन विभाग की एनओसी है और न ही आपातकालीन स्थिति से निपटने की व्यवस्था है। किसी-किसी क्षेत्र में ऐसे स्थान पर गेस्ट हाउस बने हैं, जहां गलियां संकरी हैं। यदि किसी होटल या गेस्ट हाउस में आग लग जाए, तो दमकल की गाड़ियों का वहां तक पहुंचना भी नामुमकिन है। बावजूद इसके जिम्मेदार कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करके चुप बैठ जाते हैं, लेकिन उचित इंतजाम कराने में सिफर साबित हो रहे हैं।
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बुधवार को मथुरा-वृंदावन में कई क्षेत्रों की पड़ताल की गई। इस दौरान लक्ष्मी नगर यमुना पुल के निकट, पोतरा कुंड के आसपास, भरतपुर गेट से डीग गेट, धौली प्याऊ, भैंस बहोरा समेत शहर की कई पॉश इलाकों में धड़ल्ले से होटल व गेस्ट हाउस संचालित हो रहे हैं। ये ऐसे स्थान हैं जहां केवल रिहायशी भवनों की अनुमति है, लेकिन लोगों ने घरों में गेस्ट हाउस खोलकर श्रद्धालुओं के ठहरने का अड्डा बना लिया है। इन इमारतों में न तो आग से बचाव के उचित इंतजाम हैं और न ही आपातकालीन निकास की व्यवस्था। कई जगहों पर तो बिजली के तार भी असुरक्षित तरीके से लगे हुए हैं, जो किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
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अधिकांश होटलों के पास न तो अग्निशमन विभाग की एनओसी है और न ही आपातकालीन स्थिति से निपटने की व्यवस्था है। किसी-किसी क्षेत्र में ऐसे स्थान पर गेस्ट हाउस बने हैं, जहां गलियां संकरी हैं। यदि किसी होटल या गेस्ट हाउस में आग लग जाए, तो दमकल की गाड़ियों का वहां तक पहुंचना भी नामुमकिन है। बावजूद इसके जिम्मेदार कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करके चुप बैठ जाते हैं, लेकिन उचित इंतजाम कराने में सिफर साबित हो रहे हैं।
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