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तब चमका था अब गंदा है वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Fri, 02 Oct 2015 12:14 AM IST
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हां, तब रेलवे स्टेशन चमका था, पीएम मोदी के आह्वान का बड़ा असर था, एक साल बाद अब बात आई गई हो गई। अब यह वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन गंदा है। गुरुवार को मथुरा जंक्शन से हर दिन सफर करने वाले शहर निवासी रमेश ने स्वच्छता अभियान पर यही प्रतिक्रिया थी। यही हकीकत भी है, पार्क में कचरा, स्टेशन पर गंदगी स्वच्छता अभियान की असलियत बयां करती है।
रेलवे जंक्शन पर सफाई के लिए औसतन दस लाख रुपया प्रतिमाह रेलवे के मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक, ट्रेनों की धुलाई व स्टेशन परिसर सफाई पर खर्च होता है। मथुरा जंक्शन से रोजाना 21 से 25 हजार जनरल टिकट बिकते हैं और 50 हजार लोग विभिन्न ट्रेनों में यात्रा करते हैं।
यहां की सफाई के लिए प्रतिमाह चार लाख 80 हजार रूपये प्रति माह का ठेका विशाल एंटर प्राइजेज नाम की कंपनी के पास है। इसमें 78 लोगों को रोजाना सफाई कार्य में लगाया जाना सुनिश्चित है, हाई प्रेशर जैट मशीन से रेलवे ट्रैक की सफाई कराने की वचन बद्धता है, साथ ही वैक मशीन से पोंछा लगाने व जाले हटाने के लिए वैक्यूम क्लीनर की व्यवस्था है, लेकिन रेलवे स्टेशन पर सिर्फ हाथों से पोंछा लगाया जा रहा है।
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इससे प्लेटफार्म पर हर समय पैर चिपकने वाली गंदगी मिल जाएगी। रेलवे लाइनों की हालत यह कि बिना मुंह पर कपड़ा लगाए निकल नहीं सकते। वहीं दूसरी ओर साथ ही ट्रेनों की धुलाई सफाई में मिले कूड़े व अवशेष को नगर पालिका क्षेत्र के टंचिंग ग्राउंड तक ट्रैक्टर ट्रॉली से डलवाने की व्यवस्था है।
इसके लिए रेलवे की इंजीनियरिंग शाखा का पांच लाख प्रति माह का ठेका संचालित है, लेकिन गंदगी लाइनों पर ही फैली रहती है। रेलवे की सीवर हर समय ओवरफ्लो रहता हैं। कैंट रेलवे स्टेशन पर रोजाना छह ट्रेनें गुजरती है। इसके अलावा हफ्ते में आधा दर्जन से अधिक स्पेशल ट्रेन गुजरती हैं, लेकिन सफाई को लेकर यहां भी हालात ज्यादा अच्छे नहीं है। राया की ओर स्टेशन पर गंदगी पसरी है, वहीं स्टेशन के दो नंबर प्लेटफार्म व कॉलोनी में गदंगी का अंबार लगा हुआ है।
बस स्टेशन पर होश उड़ाती है दुर्गंध
मथुरा नए बस अड्डे पर घुसते ही पानी की टंकी के निकट गंदगी व बाथरूम की गंदगी को देखते ही लोगों का सिर चकरा जाता है। सबसे ज्यादा हालात पीछे की ओर बने शुलभ शौचालय व खुले में मल मूत्र त्याग करते देख सफाई की कलई खुल जाती है। दुकानदार व ढकेल खोमचे वालों ने किसी ने डस्टबिन नहीं रखे हैं। सारी गंदगी पर सड़क पर ही फेंक दी जाती है। पुराने बस अड्डे की सफाई का तो और भी बुरा हाल है। 10 मीटर से बाथरूम से उठने वाली बदबू यात्रियों का हाल खराब कर देती है।
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रेलवे जंक्शन पर सफाई के लिए औसतन दस लाख रुपया प्रतिमाह रेलवे के मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक, ट्रेनों की धुलाई व स्टेशन परिसर सफाई पर खर्च होता है। मथुरा जंक्शन से रोजाना 21 से 25 हजार जनरल टिकट बिकते हैं और 50 हजार लोग विभिन्न ट्रेनों में यात्रा करते हैं।
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यहां की सफाई के लिए प्रतिमाह चार लाख 80 हजार रूपये प्रति माह का ठेका विशाल एंटर प्राइजेज नाम की कंपनी के पास है। इसमें 78 लोगों को रोजाना सफाई कार्य में लगाया जाना सुनिश्चित है, हाई प्रेशर जैट मशीन से रेलवे ट्रैक की सफाई कराने की वचन बद्धता है, साथ ही वैक मशीन से पोंछा लगाने व जाले हटाने के लिए वैक्यूम क्लीनर की व्यवस्था है, लेकिन रेलवे स्टेशन पर सिर्फ हाथों से पोंछा लगाया जा रहा है।
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इससे प्लेटफार्म पर हर समय पैर चिपकने वाली गंदगी मिल जाएगी। रेलवे लाइनों की हालत यह कि बिना मुंह पर कपड़ा लगाए निकल नहीं सकते। वहीं दूसरी ओर साथ ही ट्रेनों की धुलाई सफाई में मिले कूड़े व अवशेष को नगर पालिका क्षेत्र के टंचिंग ग्राउंड तक ट्रैक्टर ट्रॉली से डलवाने की व्यवस्था है।
इसके लिए रेलवे की इंजीनियरिंग शाखा का पांच लाख प्रति माह का ठेका संचालित है, लेकिन गंदगी लाइनों पर ही फैली रहती है। रेलवे की सीवर हर समय ओवरफ्लो रहता हैं। कैंट रेलवे स्टेशन पर रोजाना छह ट्रेनें गुजरती है। इसके अलावा हफ्ते में आधा दर्जन से अधिक स्पेशल ट्रेन गुजरती हैं, लेकिन सफाई को लेकर यहां भी हालात ज्यादा अच्छे नहीं है। राया की ओर स्टेशन पर गंदगी पसरी है, वहीं स्टेशन के दो नंबर प्लेटफार्म व कॉलोनी में गदंगी का अंबार लगा हुआ है।
बस स्टेशन पर होश उड़ाती है दुर्गंध
मथुरा नए बस अड्डे पर घुसते ही पानी की टंकी के निकट गंदगी व बाथरूम की गंदगी को देखते ही लोगों का सिर चकरा जाता है। सबसे ज्यादा हालात पीछे की ओर बने शुलभ शौचालय व खुले में मल मूत्र त्याग करते देख सफाई की कलई खुल जाती है। दुकानदार व ढकेल खोमचे वालों ने किसी ने डस्टबिन नहीं रखे हैं। सारी गंदगी पर सड़क पर ही फेंक दी जाती है। पुराने बस अड्डे की सफाई का तो और भी बुरा हाल है। 10 मीटर से बाथरूम से उठने वाली बदबू यात्रियों का हाल खराब कर देती है।