फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   nirbhya case is going to be in police sylabus

कप्तान से लेकर दरोगा तक पढ़ेंगे ‘निर्भया कांड’

Sat, 06 May 2017 11:50 PM IST
पुनीत शर्मा
पुनीत शर्मा Updated Sat, 06 May 2017 11:50 PM IST
विज्ञापन
nirbhya case is going to be in police sylabus
पुलिस - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश में पुलिस कप्तान से लेकर दरोगा तक ‘निर्भया कांड’ को पढ़ेंगे। विवेचना की एक-एक लाइन और वैज्ञानिक आधार पुलिस पाठ्यक्रम का हिस्सा बनने जा रहे हैं। प्रशिक्षण विभाग ने इसे केस स्टडी के रूप में शामिल करते हुए पुलिस लाइन, पुलिस स्कूल और पुलिस के कालेजों में पढ़ाने का फैसला किया है। पुलिस अफसरों को बताया जाएगा कि किस तरह से सटीक साक्ष्यों के माध्यम से गुनहगारों को सख्त सजा दिलाई जा सकती है।
विज्ञापन


आमतौर पर पुलिस की सबसे कमजोर कड़ी मानी जाती है विवेचना। लचर तफ्तीश और साक्ष्यों की कमी के कारण बड़े-बड़े मुल्जिम आसानी से छूट जाते हैं। लेकिन निर्भया कांड की विवेचना को कानून के हर जानकार ने सराहा है। एक-एक साक्ष्य पुलिस ने इस तरह जोड़ा कि दोषी किसी तरह से बचकर निकल न पाएं।
विज्ञापन


एडीजी ट्रेनिंग वीके मौर्य ने बताया कि केस स्टडी के रूप में निर्भया कांड की विवेचना शामिल की जा रही है। पुलिस के सभी ट्रेनिंग सेंटरों में इसे पढ़ाया जाएगा। एसएसपी, एसपी, सीओ, इंस्पेक्टर और दरोगा तक को इस विवेचना की वैज्ञानिक तकनीक सिखाई जाएगी। पुलिस अफसरों का मानना है कि अगर किसी केस की विवेचना मजबूती के साथ हो जाए तो आरोपी बच नहीं सकता। अधूरी विवेचना, साक्ष्यों की कमी और गवाहों को पेश न कर पाने के कारण केस कमजोर हो जाता है। पुलिस की इसी कमजोरी का फायदा उठाकर मुल्जिम बच निकलते हैं। उन्हें जो सजा मिलनी चाहिए वह नहीं मिल पाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये होंगे अध्ययन के बिंदु
- किस तरह से गवाहों के बयान कराए गए
- गवाहों के बयान किस तरह से लिखे गए हैं
- विवेचकों ने साक्ष्य को किस तरह इकट्ठा किया
- पुलिस ने इन सभी का आपराधिक रिकार्ड कैसे ढूंढा
- वैज्ञानिक आधार पर तफ्तीश कैसे आगे बढ़ी
- पुलिस ने डीएनए टेस्ट किस तरह से कराया
- चार्जशीट किस तरह से दाखिल की गई थी
- केस डायरी में पन्ने किस तरह से लिखे गए
- मुकदमा लिखते वक्त क्या सावधानी बरती गई
- क्राइम सीन का किस तरह से निरीक्षण किया
- पुलिस ने केस मजबूत करने को क्या-क्या साक्ष्य उठाए
- आला अधिकारियों ने कैसे केस की मानीटरिंग की
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed