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Mathura News: घर-घर जन्मे नंदलाला, गूंजा जय कान्हा-जय गोपाला
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छटीकरा मार्ग स्थित वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में कान्हा के जन्म की झांकी
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उल्लास बृहस्पतिवार को चहुंओर छाया रहा। सुबह से ही भक्तों ने कान्हा को स्नान करा नई पोशाक व मुकुट धारण कराया। घर के मंदिर को सजाया। विधि विधान से पूजा अर्चना कर पूरे दिन व्रत रखा। रात्रि को 12 बजते ही ठाकुरजी के जयकारे गूंज उठे। शंखनाद के बीच घर-घर में कान्हा का जन्म हुआ। इसके बाद ही भक्तों ने व्रत खोलकर आहार ग्रहण किया।
ब्रज में आराध्य श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव घर-घर मनाया गया। सुबह सबसे पहले घरों की साफ सफाई की गई। स्नान आदि करने के बाद मंदिर को सजाया। इसके बाद कान्हा को स्नान कराकर नई पोशाक धारण कराई गई। दिन में मंदिर को फूल, अशोक के पत्ते, रंग बिरंगीं झालरें, गुब्बारों से सजाया गया।भक्तों ने विधि विधान से पूजा अर्चना कर व्रत रखा। दिन में बच्चों ने भी अपने कान्हा को खिलौने अर्पित किए। उनके साथ रखे गए खिलौनों से बच्चे भी खेलते रहे।
शाम को कान्हा के आगे दीपक जलाया गया और भजन- कीर्तन हुए। रात्रि में कान्हा को भोग लगाने और प्रसाद वितरण के लिए आटे को भूनकर उसमें घी, बूरा, मेवा आदि डालकर पंजीरी बनाई गई। धनिया की पंजीरी भी बनाई गई। अभिषेक के लिए दही में बूरा व शहद मिलाकर रख लिया गया। रात्रि में जैसे ही 12 बजे, कान्हा के जन्म के बधाई गीत गाये और जय कन्हैयालाल की गूंज उठा। घरों से घंटे घड़ियाल बजने की आवाजें आने लगीं। खीरे में रखे लड्डूगोपाल बाहर निकाला गया। उनका अभिषेक करने के बाद नई पोशाक धारण कराई। शृंगार कर उन्हें आकर्षक रूप में सजाया गया। इसके बाद पंजीरी, फल आदि का भोग लगाया।
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घर घर में बने मींगी पाग, पकवान, मिष्ठान
लड्डू गोपाल का भोग लगाने के लिए घरों में चीनी की चाशनी में खोया व सूखा मेवा आदि डालकर मींगी पाग बनाया गया। स्वादिष्ट पकवान व मिठाइयां बनाई गईं। इन्हें देखकर बच्चे दिन भर इन्हें खाने के लिए जिद करते रहे, ललचाते रहे, लेकिन रात्रि में भोग के बाद ही उन्हें यह सब खाने को मिल सका।
केक काटकर भी मनाया कृष्णा का जन्मदिन
भक्तों ने अपने ईष्ट श्रीकृष्ण का जन्मदिन केक काटकर भी मनाया। रात्रि में जैसे ही 12 बजे केक को कान्हा के आगे रखकर काटा गया और कान्हा को हैप्पी बर्थ डे टू यू गाकर जन्मदिन की बधाई देते हुए उन्हें रिझाया।
अशोक के पत्तों व फूलों से बनाई बंदनवार
भक्तों ने सुबह अशोक के पत्तों व फूलों से बनी बंदनवार को अपने घर के मुख्य दरवाजों सहित अन्य दरवाजों पर लगाया। साथ ही अपने मंदिर को भी इससे सजाया। घरों में आकर्षक रंग बिरंगी लाइटें भी लगाई गईं।
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ब्रज में आराध्य श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव घर-घर मनाया गया। सुबह सबसे पहले घरों की साफ सफाई की गई। स्नान आदि करने के बाद मंदिर को सजाया। इसके बाद कान्हा को स्नान कराकर नई पोशाक धारण कराई गई। दिन में मंदिर को फूल, अशोक के पत्ते, रंग बिरंगीं झालरें, गुब्बारों से सजाया गया।भक्तों ने विधि विधान से पूजा अर्चना कर व्रत रखा। दिन में बच्चों ने भी अपने कान्हा को खिलौने अर्पित किए। उनके साथ रखे गए खिलौनों से बच्चे भी खेलते रहे।
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शाम को कान्हा के आगे दीपक जलाया गया और भजन- कीर्तन हुए। रात्रि में कान्हा को भोग लगाने और प्रसाद वितरण के लिए आटे को भूनकर उसमें घी, बूरा, मेवा आदि डालकर पंजीरी बनाई गई। धनिया की पंजीरी भी बनाई गई। अभिषेक के लिए दही में बूरा व शहद मिलाकर रख लिया गया। रात्रि में जैसे ही 12 बजे, कान्हा के जन्म के बधाई गीत गाये और जय कन्हैयालाल की गूंज उठा। घरों से घंटे घड़ियाल बजने की आवाजें आने लगीं। खीरे में रखे लड्डूगोपाल बाहर निकाला गया। उनका अभिषेक करने के बाद नई पोशाक धारण कराई। शृंगार कर उन्हें आकर्षक रूप में सजाया गया। इसके बाद पंजीरी, फल आदि का भोग लगाया।
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घर घर में बने मींगी पाग, पकवान, मिष्ठान
लड्डू गोपाल का भोग लगाने के लिए घरों में चीनी की चाशनी में खोया व सूखा मेवा आदि डालकर मींगी पाग बनाया गया। स्वादिष्ट पकवान व मिठाइयां बनाई गईं। इन्हें देखकर बच्चे दिन भर इन्हें खाने के लिए जिद करते रहे, ललचाते रहे, लेकिन रात्रि में भोग के बाद ही उन्हें यह सब खाने को मिल सका।
केक काटकर भी मनाया कृष्णा का जन्मदिन
भक्तों ने अपने ईष्ट श्रीकृष्ण का जन्मदिन केक काटकर भी मनाया। रात्रि में जैसे ही 12 बजे केक को कान्हा के आगे रखकर काटा गया और कान्हा को हैप्पी बर्थ डे टू यू गाकर जन्मदिन की बधाई देते हुए उन्हें रिझाया।
अशोक के पत्तों व फूलों से बनाई बंदनवार
भक्तों ने सुबह अशोक के पत्तों व फूलों से बनी बंदनवार को अपने घर के मुख्य दरवाजों सहित अन्य दरवाजों पर लगाया। साथ ही अपने मंदिर को भी इससे सजाया। घरों में आकर्षक रंग बिरंगी लाइटें भी लगाई गईं।