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Mathura News: एमवीडीए के नोटिस से होटल संचालकों में अफरातफरी
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मथुरा-व़ृंदावन विकास प्राधिकरण द्वारा पिछले दिनों वृंदावन के 230 होटल, गेस्ट हाउस और मैरिज होम मालिकों को नोटिस देने के बाद से अफरातफरी का माहौल है। एमवीडीए द्वारा मानकों से संबंधित जवाब और विभागों से एनओसी न दे पाने के कारण दर्जनों होटल और गेस्ट हाउस कर्मचारियों को नौकरियों से हटाने जा रहे हैं। इस कारण होटल उद्योग से जुडे़ 20 हजार से अधिक कर्मचारियों के सामने नौकरी का संकट मंडरा रहा है।
वृंदावन में 400 से अधिक छोटे-बड़े होटल, मैरिज होम और गेस्टहाउस हैं। इनमें 20 हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। जानकारों के अनुसार अकेले वृंदावन के होटल उद्योग से सरकार को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सालाना 400 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त होता है। इसके अलावा वर्षभर में एक हजार करोड़ रुपए रजिस्ट्री के माध्यम से राजस्व की प्राप्ति हो रही है। वृंदावन में सामान्य दिनों में 50 हजार से अधिक श्रद्धालु प्रति दिन आ रहे हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने और खाने की व्यवस्था होटल उद्योग द्वारा की जा रही है, लेकिन एमवीडीए द्वारा दिए गए नोटिस के बाद से होटल उद्योग में अफरातफरी का माहौल है।
मानकों को अनुरूप सवालों के जवाब और अग्निशमन, प्रदूषण समेत कई विभागों से एनओसी को लेकर होटल संचालकों का दम फूल रहा है। होटल एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि होटल उद्योग को ग्रहण लगने जा रहा है। कई होटल और रेस्तरां संचालकों के मालिकों ने कर्मचारियों को हटाने की तैयारियां कर ली है। कई संचालकों ने कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के लिए एक माह का समय दिया है। इससे जहां हजारों कर्मचारियों के सामने नौकरी का संकट खड़ा हो गया है, वहीं श्रद्धालुओं की सुविधाएं भी प्रभावित होंगी। एमवीडीए को जवाब-दाखिल करने के लिए छह माह से एक साल का समय देना चाहिए।
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वृंदावन में 400 से अधिक छोटे-बड़े होटल, मैरिज होम और गेस्टहाउस हैं। इनमें 20 हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। जानकारों के अनुसार अकेले वृंदावन के होटल उद्योग से सरकार को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सालाना 400 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त होता है। इसके अलावा वर्षभर में एक हजार करोड़ रुपए रजिस्ट्री के माध्यम से राजस्व की प्राप्ति हो रही है। वृंदावन में सामान्य दिनों में 50 हजार से अधिक श्रद्धालु प्रति दिन आ रहे हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने और खाने की व्यवस्था होटल उद्योग द्वारा की जा रही है, लेकिन एमवीडीए द्वारा दिए गए नोटिस के बाद से होटल उद्योग में अफरातफरी का माहौल है।
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मानकों को अनुरूप सवालों के जवाब और अग्निशमन, प्रदूषण समेत कई विभागों से एनओसी को लेकर होटल संचालकों का दम फूल रहा है। होटल एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि होटल उद्योग को ग्रहण लगने जा रहा है। कई होटल और रेस्तरां संचालकों के मालिकों ने कर्मचारियों को हटाने की तैयारियां कर ली है। कई संचालकों ने कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के लिए एक माह का समय दिया है। इससे जहां हजारों कर्मचारियों के सामने नौकरी का संकट खड़ा हो गया है, वहीं श्रद्धालुओं की सुविधाएं भी प्रभावित होंगी। एमवीडीए को जवाब-दाखिल करने के लिए छह माह से एक साल का समय देना चाहिए।
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