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धर्म के बंधनों से परे राधाकृष्ण का शृंगार
पुनीत शर्मा
Updated Thu, 18 Aug 2016 10:51 PM IST
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जन्माष्टमी के लिए मुस्लिम कारीगर तैयार कर रहे शृंगार का सामान
- फोटो : अमर उजाला
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धर्म के बंधन में इंसान बंधते हैं, भगवान नहीं। कृष्णनगरी में इसकी मिसाल है। मथुरा में जन्माष्टमी के लिए राधा-कृष्ण का शृंगार मुस्लिम कारीगर तैयार कर रहे हैं। इनके हाथों से तैयार मुकुट, धोती-कुर्ता पहनकर जब ठाकुरजी विराजेंगे तो उनकी मोहिनी मूरत हर किसी को मोह लेगी। राधारानी के शृंगार में शामिल डिजाइनर लहंगा, चूड़ी और बिंदी की मांग तो विदेशों तक है। फिलहाल आर्डर पूरा करने के लिए कारखानों में दिन रात काम चल रहा है।
मथुरा और वृंदावन में ऐसे करीब 80 बड़े कारखाने हैं, जहां राधाकृष्ण के शृंगार का सामान तैयार हो रहा है। यूं तो ठाकुरजी की पोशाक की मांग साल भर रहती है लेकिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मांग में बहुत इजाफा हो जाता है। हर छोटे और बड़े मंदिर से लेकर घरों तक में विराजमान कन्हैया को सजाने संवारने के लिए भक्त कोई कसर नहीं छोड़ते। श्रद्धा और बजट के अनुरूप पोशाक खरीदी जाती हैं।
जन्माष्टमी के लिए आने वाले आर्डर को पूरा करने के लिए कारखाने जून में शुरू हो जाते हैं और अगस्त तक लगातार काम चलता है। वृंदावन में करीब 50 बड़े कारोबारी हैं। विपिन मुकुट वाला के विपिन अग्रवाल का कहना है कि अमेरिका, यूके और आस्ट्रेलिया से सबसे ज्यादा आर्डर होते हैं। सामान की सप्लाई भी कर दी गई है। उनका कहना है कि पहले शृंगार का सामान सबसे ज्यादा वाराणसी में बनता था लेकिन अब मथुरा और वृंदावन में है। यहीं से देश भर के मार्केट को सप्लाई होता है। इस कारोबार में जितने भी कारीगर हैं उनमें अधिकांश मुस्लिम हैं।
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जमील ने बचपन में ही सीख लिया था मुकुट बनाना
मथुरा में मुकुट बनाने का काम दो महीने से लगातार चल रहा है। छोटे कारोबारी आर्डर पर माल तैयार कर रहे है। जमील अहमद उर्फ पप्पू मुकुटवाला का कहना है कि वह बचपन में ही मुकुट बनाना सीख गए थे। अब तो परिवार की गुजर बसर भी श्रीकृष्ण के शृंगार का सामान बनाकर हो रही है।
जमील कहते हैं कि साहब सब नजर का खेल है कहीं कोई अंतर नहीं होता है। शकील और छोटे भी बड़ा आकर्षक मुकुट बनाते हैं। दोनों बड़े कारोबारियों से आर्डर लेकर घर पर मुकुट तैयार करते हैं। यह दोनों भी बचपन से ही इस कार्य में लगे हैं। कहते हैं जन्माष्टमी पास आने पर तो फुर्सत भी नहीं मिलती।
80 हजार रुपये तक है कीमत
ठाकुरजी और राधारानी के शृंगार का सामान बाजार में एक हजार से 80 हजार रुपये तक मूल्य में उपलब्ध है। गले के हार और कानों के कुंडल में कई वैराइटी मिल जाएंगी। कारोबारियों का कहना है कि शृंगार की कीमत प्रभु की मूर्ति के आकार पर निर्भर करती है।
सामान जो बनता है
पोशाक - लहंगा, ब्लाउज, पायजामा, धोती और पटका
शृंगार - मुकुट, कुंडल, कंठश्री, हार, कमर पेटी, चूड़ी, नथ, बिंदी, तिलक और चोटी
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मथुरा और वृंदावन में ऐसे करीब 80 बड़े कारखाने हैं, जहां राधाकृष्ण के शृंगार का सामान तैयार हो रहा है। यूं तो ठाकुरजी की पोशाक की मांग साल भर रहती है लेकिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मांग में बहुत इजाफा हो जाता है। हर छोटे और बड़े मंदिर से लेकर घरों तक में विराजमान कन्हैया को सजाने संवारने के लिए भक्त कोई कसर नहीं छोड़ते। श्रद्धा और बजट के अनुरूप पोशाक खरीदी जाती हैं।
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जन्माष्टमी के लिए आने वाले आर्डर को पूरा करने के लिए कारखाने जून में शुरू हो जाते हैं और अगस्त तक लगातार काम चलता है। वृंदावन में करीब 50 बड़े कारोबारी हैं। विपिन मुकुट वाला के विपिन अग्रवाल का कहना है कि अमेरिका, यूके और आस्ट्रेलिया से सबसे ज्यादा आर्डर होते हैं। सामान की सप्लाई भी कर दी गई है। उनका कहना है कि पहले शृंगार का सामान सबसे ज्यादा वाराणसी में बनता था लेकिन अब मथुरा और वृंदावन में है। यहीं से देश भर के मार्केट को सप्लाई होता है। इस कारोबार में जितने भी कारीगर हैं उनमें अधिकांश मुस्लिम हैं।
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जमील ने बचपन में ही सीख लिया था मुकुट बनाना
मथुरा में मुकुट बनाने का काम दो महीने से लगातार चल रहा है। छोटे कारोबारी आर्डर पर माल तैयार कर रहे है। जमील अहमद उर्फ पप्पू मुकुटवाला का कहना है कि वह बचपन में ही मुकुट बनाना सीख गए थे। अब तो परिवार की गुजर बसर भी श्रीकृष्ण के शृंगार का सामान बनाकर हो रही है।
जमील कहते हैं कि साहब सब नजर का खेल है कहीं कोई अंतर नहीं होता है। शकील और छोटे भी बड़ा आकर्षक मुकुट बनाते हैं। दोनों बड़े कारोबारियों से आर्डर लेकर घर पर मुकुट तैयार करते हैं। यह दोनों भी बचपन से ही इस कार्य में लगे हैं। कहते हैं जन्माष्टमी पास आने पर तो फुर्सत भी नहीं मिलती।
80 हजार रुपये तक है कीमत
ठाकुरजी और राधारानी के शृंगार का सामान बाजार में एक हजार से 80 हजार रुपये तक मूल्य में उपलब्ध है। गले के हार और कानों के कुंडल में कई वैराइटी मिल जाएंगी। कारोबारियों का कहना है कि शृंगार की कीमत प्रभु की मूर्ति के आकार पर निर्भर करती है।
सामान जो बनता है
पोशाक - लहंगा, ब्लाउज, पायजामा, धोती और पटका
शृंगार - मुकुट, कुंडल, कंठश्री, हार, कमर पेटी, चूड़ी, नथ, बिंदी, तिलक और चोटी