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Mathura News: मुस्कान को मथुरा में दी जाएगी फांसी
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मथुरा। मेरठ के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में उनकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इसमें मुस्कान को मथुरा जेल में फांसी दी जाएगी। यहां प्रदेश का एकमात्र महिला फांसी घर है।
सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को की गई थी। वारदात के बाद दोनों ने सबूत मिटाने के लिए शव को पांच टुकड़ों में काट दिया और नीले ड्रम में भर दिया। इसके बाद शव को छिपाने के लिए ड्रम में सीमेंट का घोल डाल दिया गया था। अदालत ने दोनों को बुधवार को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इसके बाद मथुरा जेल के महिला फांसीघर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आजादी के बाद से मथुरा जिला कारागार में अब तक किसी महिला को फांसी नहीं दी गई है। ऐसे में यदि मुस्कान की सजा पर अंतिम रूप से अमल होता है, तो यह जेल के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना होगी।
मृत्युदंड के मामले में सत्र न्यायालय के फैसले की उच्च न्यायालय से पुष्टि आवश्यक होती है। इसके बाद अपील और दया याचिका जैसी कानूनी प्रक्रियाएं भी हो सकती हैं। इसलिए फांसी की तारीख और सजा पर अमल की स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने बताया है कि अगर कानूनी प्रक्रिया में कोई अड़चन नहीं आई तो मुस्कान को यही फांसी दी जाएगी।
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शबनम को सुनाई गई है फांसी की सजा
मथुरा जिला कारागार में महिला बंदियों को फांसी देने के लिए फांसीघर मौजूद है। आजादी के बाद से यहां किसी महिला को फांसी नहीं दी गई है। अगर मुस्कान को फांसी लगी तो यह पहली महिला होगी जिसको आजादी के बाद फांसी होगी। हालांकि अमरोहा जिले के बावनखेड़ी में वर्ष 2008 में सात लोगों के नरसंहार मामले में दोषी शबनम को फांसी की सजा सुनाई गई थी पर अभी उसकी दया याचिका लंबित है।
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सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को की गई थी। वारदात के बाद दोनों ने सबूत मिटाने के लिए शव को पांच टुकड़ों में काट दिया और नीले ड्रम में भर दिया। इसके बाद शव को छिपाने के लिए ड्रम में सीमेंट का घोल डाल दिया गया था। अदालत ने दोनों को बुधवार को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इसके बाद मथुरा जेल के महिला फांसीघर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आजादी के बाद से मथुरा जिला कारागार में अब तक किसी महिला को फांसी नहीं दी गई है। ऐसे में यदि मुस्कान की सजा पर अंतिम रूप से अमल होता है, तो यह जेल के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना होगी।
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मृत्युदंड के मामले में सत्र न्यायालय के फैसले की उच्च न्यायालय से पुष्टि आवश्यक होती है। इसके बाद अपील और दया याचिका जैसी कानूनी प्रक्रियाएं भी हो सकती हैं। इसलिए फांसी की तारीख और सजा पर अमल की स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने बताया है कि अगर कानूनी प्रक्रिया में कोई अड़चन नहीं आई तो मुस्कान को यही फांसी दी जाएगी।
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शबनम को सुनाई गई है फांसी की सजा
मथुरा जिला कारागार में महिला बंदियों को फांसी देने के लिए फांसीघर मौजूद है। आजादी के बाद से यहां किसी महिला को फांसी नहीं दी गई है। अगर मुस्कान को फांसी लगी तो यह पहली महिला होगी जिसको आजादी के बाद फांसी होगी। हालांकि अमरोहा जिले के बावनखेड़ी में वर्ष 2008 में सात लोगों के नरसंहार मामले में दोषी शबनम को फांसी की सजा सुनाई गई थी पर अभी उसकी दया याचिका लंबित है।