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बाकी दोषियों को भी जल्द हो फांसी
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Thu, 30 Jul 2015 11:53 PM IST
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मुंबई में 22 साल पहले हुए सीरियल ब्लास्ट में मथुरा निवासी अशोक चतुर्वेदी की मौत हो गई थी। गुरुवार को बम धमाकों के दोषियों में से एक याकूब मेनन को मिली फांसी ने अशोक के परिवार का गम कुछ हल्का किया है। परिवारीजनों को संतोष है कि देर से ही सही पर न्याय हुआ। अब वे बाकी दोषियों की जल्द से जल्द फांसी की मांग कर रहे हैं।
मथुरा के कोतवाली क्षेत्र के छत्ता बाजार चूनाकंकड़ काला महल निवासी मीडिया कर्मी दीपक चतुर्वेदी बैंकर के बड़े भाई अशोक चतुर्वेदी (25) ने 1990 में केमिकल पेंटिंग का व्यवसाय शुरू किया था। इस सिलसिले में वे आठ मार्च 1993 को मथुरा से मुंबई गए थे।
12 मार्च को मरीन ड्राइव और एयर इंडिया बिल्डिंग के निकट टैक्सी स्टेंड से अशोक गुजर रहे थे, तभी टैक्सी स्टैंड पर लावारिस कार में तेज धमाका हुआ। अशोक चतुर्वेदी उसमें गंभीर रूप से घायल हुए और 17 मार्च को जसलोक अस्पताल मुंबई में उनकी मौत हो गई थी। इससे मुंबई बम धमाकों की चोट मथुरा के इस परिवार को भी पहुंची। एक ही पल में परिवार की खुशियां छिन गईं थीं। मीडियाकर्मी दीपक चतुर्वेदी बैंकर ने बताया कि उनके भाई की मौत से मां को गहरा सदमा लगा था।
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उनका स्वास्थ्य दिनोंदिन गिरता चला गया। वर्ष 2002 में मां की भी मौत हो गई थी। दीपक के परिवार ने याकूब मेनन को फांसी होने पर कहा कि लंबे समय बाद 257 हत्याओं के दोषी को सजा दी जा रही है, इसकी खुशी है। अब 12 अन्य दोषियों को भी इसी तरह फांसी होनी चाहिए।
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मथुरा के कोतवाली क्षेत्र के छत्ता बाजार चूनाकंकड़ काला महल निवासी मीडिया कर्मी दीपक चतुर्वेदी बैंकर के बड़े भाई अशोक चतुर्वेदी (25) ने 1990 में केमिकल पेंटिंग का व्यवसाय शुरू किया था। इस सिलसिले में वे आठ मार्च 1993 को मथुरा से मुंबई गए थे।
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12 मार्च को मरीन ड्राइव और एयर इंडिया बिल्डिंग के निकट टैक्सी स्टेंड से अशोक गुजर रहे थे, तभी टैक्सी स्टैंड पर लावारिस कार में तेज धमाका हुआ। अशोक चतुर्वेदी उसमें गंभीर रूप से घायल हुए और 17 मार्च को जसलोक अस्पताल मुंबई में उनकी मौत हो गई थी। इससे मुंबई बम धमाकों की चोट मथुरा के इस परिवार को भी पहुंची। एक ही पल में परिवार की खुशियां छिन गईं थीं। मीडियाकर्मी दीपक चतुर्वेदी बैंकर ने बताया कि उनके भाई की मौत से मां को गहरा सदमा लगा था।
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उनका स्वास्थ्य दिनोंदिन गिरता चला गया। वर्ष 2002 में मां की भी मौत हो गई थी। दीपक के परिवार ने याकूब मेनन को फांसी होने पर कहा कि लंबे समय बाद 257 हत्याओं के दोषी को सजा दी जा रही है, इसकी खुशी है। अब 12 अन्य दोषियों को भी इसी तरह फांसी होनी चाहिए।