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यहां स्वयं प्रकट हुई थीं मां बगलामुखी
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मथुरा। मां बगलामुखी देवी।
- फोटो : MATHURA
मथुरा। पुराना बस अड्डा के समीप मां बगलामुखी के प्राचीन मंदिर को मां को पीतांबरा देवी के नाम से भी जाना जाता है। बताया जाता है कि यहां बगलामुखी देवी स्वयं प्रकट हुई थीं। बड़ी ही आस्था लिए भक्त मां के दर्शन करने आते हैं और अपनी मुरादों की अर्जी लगाते हैं। मनौती पूरी होने पर भक्त मां के पुन: दर्शन करने आते हैं।
मां का पीला पूजन किया जाता है। पीला टीका, पीले फूल, पीले वस्त्र और सरसों के तेल से पूजन करने से माता प्रसन्न होती हैं। हर शाम को 8 बजे मां बगलामुखी की विशेष आरती की जाती है। मंदिर के महंत वीरेंद्र चतुर्वेदी वीरू पंडा बताते हैं कि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने भी अपने मामा कंस का वध करने से पहले माता की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त किया था।
उन्होंने बताया कि एक बार प्रलयकारी तूफान को रोकने के लिए भगवान विष्णु ने हिरदा नदी के तट पर बगलामुखी देवी की साधना की थी। मां की साधना को अजेय माना जाता है इसीलिए भगवान विष्णु के साधना करने के बाद से समय-समय पर कई देवताओं ने मां की पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा कि मां के चमत्कार की वजह से दूर-दूर से भक्तगण दुखों को दूर करने माता की शरण में आते हैं।
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मां का पीला पूजन किया जाता है। पीला टीका, पीले फूल, पीले वस्त्र और सरसों के तेल से पूजन करने से माता प्रसन्न होती हैं। हर शाम को 8 बजे मां बगलामुखी की विशेष आरती की जाती है। मंदिर के महंत वीरेंद्र चतुर्वेदी वीरू पंडा बताते हैं कि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने भी अपने मामा कंस का वध करने से पहले माता की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त किया था।
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उन्होंने बताया कि एक बार प्रलयकारी तूफान को रोकने के लिए भगवान विष्णु ने हिरदा नदी के तट पर बगलामुखी देवी की साधना की थी। मां की साधना को अजेय माना जाता है इसीलिए भगवान विष्णु के साधना करने के बाद से समय-समय पर कई देवताओं ने मां की पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा कि मां के चमत्कार की वजह से दूर-दूर से भक्तगण दुखों को दूर करने माता की शरण में आते हैं।
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