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Mathura News: फालैन में होली के धधकते अंगारों से निकलने को तैयार मोनू पंडा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 06 Mar 2023 11:20 PM IST
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Monu Panda ready to come out of the burning embers of Holi in Phalan
कोसीकलां (मथुरा)। प्रह्लाद लीला को साकार करने के लिए होली की जलती लपटों से निकलने की परंपरा को जीवित रखने वाले गांव फालैन में ग्रामीण होली मेले की तैयारियां करने में जुटे हैं। मोनू पंडा आठ मार्च की तड़के होली की लपटों से निकलेगा। मोनू लगातार चौथी बार इस रस्म को निभाएंगे।
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गांव फालैन में प्रह्लाद और होलिका दहन की पौराणिक गाथा की परंपरा एक बार फिर जीवंत होगी। होलिका के दहकते अंगारों के बीच गुजरने के लिए आस्था की अग्निपरीक्षा देने को मोनू पंडा एक माह के कठोर तप पर बैठा है। होलिका दहन के दिन जब दीपक की लौ उसकी हथेली को शीतलता का एहसास कराएगी तब पंडा के कदम होलिका की लपटों को चीरते हुए आगे बढ़ जाएंगे।
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गांव फालैन को प्रह्लादनगरी के नाम से जाना जाता है। होलिका दहन के दिन मोनू पंडा मंदिर की ज्योति पर हाथ रख शुभ लग्न के संकेत मिलने का इंतजार करेगा। जैसे ही ज्योति की लौ से शीतलता का आभास होगा पंडा के इशारे पर होलिका में अग्नि प्रवेश करा दी जाएगी। इसके बाद प्रह्लाद कुंड में स्नान कर पंडा होलिका के दहकते अंगारों के बीच से गुजरेगा। ग्रामीण कमल सिंह, रामप्रसाद, भरत सिंह का कहना है कि मेले के लिए गांव में कोई व्यवस्था प्रशासन ने नहीं की है, जबकि मेले में हजारों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक जुटेंगे। ग्रामीण मकानों की सफाई, रंगाई में जुटे हैं। प्रह्लाद कुंड की सफाई नहीं हुई है, ऐसे में मेले में आने वाले श्रद्धालु कैसे आचमन करेंगे। (संवाद)
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पैगांव के हुरियारे पहुंचेंगे फालैन
फालैन के पंडा मेले में पैगांव के हुरियारों की करीब छह टोलियां गांव पहुंचेंगी, जहां ढोल-नगाड़ों के मध्य गांव की गली-गली में चौपाइयों का गायन कर रंग-गुलाल की बरसात कर आसमान को इंद्रधनुषी रंग में रंग देंगे। मेले में गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण हिस्सा लेंगे।
आपसी सहमति से होता है नाम तय
एक बार नाम तय होने के बाद वसंत पंचमी के बाद आने वाली पूर्णिमा को चयनित किए पंडा को एक माला दी जाती है। इस माला को लेकर चयनित किया गया पंडा उसी माला को लेकर गांव में स्थित प्रह्लाद मंदिर पर माला लेकर भजन पूजा के लिए बैठ जाता है। यह भजन पूजा होली तक चलती है। इस बार धधकती आग से निकलने की प्रथा को मोनू पंडा फिर निभाएंगे।
व्रत के दौरान पालन किए जा रहे कड़े नियम
गांव के लोगों के अनुसार, मोनू पंडा माघ पूर्णिमा से तप पर प्रह्लाद मंदिर में बैठ गया। मोनू एक माह से मंदिर में अखंड ज्योति के पास बैठकर तप कर रहा है। इस मध्य जमीन पर ही सो रहा है और केवल फलाहार कर रहा है। इस दौरान वह घर भी नहीं गया।

३० फीट व्यास की अग्नि से निकलता है मोनू
होलिका दहन के दिन मोनू पंडा का व्रत पूरा होगा। उस दिन मुहूर्त के अनुसार प्रह्लाद कुंड के समीप विशालकाय होली बनाई जाएगी। यह होली करीब 30 फीट व्यास से ज्यादा की होगी। मुहूर्त के अनुसार मोनू पंडा प्रह्लाद जी के मंदिर से निकलेगा और फिर प्रह्लाद कुंड में स्नान कर सीधे जलती होली की लपटों के बीच से नंगे पैर जाएगा।
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