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UP: यहां के बंदरों की महिलाओं के कुंडलों पर नजर...पलक झपकते ही लूट लेते हैं, कीमती सामान पर भी मारते झपट्टा

Wed, 04 Dec 2024 06:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संंवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संंवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 04 Dec 2024 06:51 PM IST
सार

बंदरों का आतंक ऐसा है कि लोग राह से गुजरने से भी डरते हैं। हम बात कर रहे हैं वृंदावन की, जहां बंदर इस कदर उत्पाती हो चुके हैं कि महिलाओं के कुंडल पर झपट्टा मार रहे हैं। पिछले दिनों में 15 महिलाओं के साथ ऐसी घटना हुईं, जिसमें वे घायल हुई हैं।

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Monkeys become trouble for devotees
बंदरों का आतंक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मथुरा नगर निगम के वृंदावन जोन में बंदरों की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। हिंसक होते जा रहे बंदर न सिर्फ खाने-पीने की वस्तुएं और श्रद्धालुओं के प्रसाद को छीन रहे हैं। इतना ही नहीं ये कीमती सामान को झपटने के साथ ही लोगों को घायल कर रहे हैं। वृंदावन के मंदिरों पर बंदरों का जमावड़ा लगा रहता है। इससे श्रद्धालुओं का मंदिर जाना-आना भी मुश्किल हो रहा है।

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वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर, इस्कॉन, राधारमण मंदिर, राधा दामोदर मंदिर सहित सभी मंदिरों और धर्म स्थलों पर बंदरों का जमावड़ा बना रहता है। देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु स्वच्छंद रूप से आराध्य के दर्शन के लिए मंदिर भी नहीं जा सकते हैं। बांकेबिहारी मंदिर को जाने वाले सभी मार्गों पर बंदर श्रद्धालुओं की आखों से चश्मा उतार कर ले जाते हैं। हाथ से मोबाइल और पर्स और ठाकुर का प्रसाद एवं कीमती सामान भी छीनकर ले जा रहे हैं। बंदरों से अपना कीमती सामान बचाने के प्रयास में कई बार श्रद्धालु चोटिल हो चुके हैं।

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ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के वीआईपी रोड पर बंदर महिला श्रद्धालुओं को अपना निशाना बना रहे हैं। वह महिलाओं के कानों से सोने, चांदी के कुंडल और गहने खींचकर ले जा रहे हैं। इससे महिलाओं के कान जख्मी हो रहे हैं। श्रद्धालु महिलाएं और उनका परिवार दर्शनों को छोड़ बंदरों से होने वाली समस्या में उलझ कर रह जाती हैं।

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वीआईपी रोड निवासी महाराम सिंह ने बताया कि पिछले एक माह में करीब 15 महिला श्रद्धालुओं के कानों से आभूषण बंदर छीनकर ले गए हैं। कुछ के गहने मिल जाते हैं तो कुछ मायूस होकर लौट जाते हैं। इस समस्या से निदान का कोई इंतजाम जिला प्रशासन और नगर निगम नहीं कर पाया है।

व्यापारी बलदेव अग्रवाल ने बताया कि मथुरा में बंदरों के उत्पात से लोगों का रहना दुश्वार हो गया है। बंदरों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए नसबंदी की जाए और इनके लिए पर्याप्त एवं अनुकूल स्थान नियत किया जाए।

व्यापारी सुशील गोयल का कहना है कि बंदरों की समस्या कई दशक से गंभीर बनी हुई है। बच्चे और महिलाओं को घरों से निकलना मुश्किल हो रहा है। जनप्रतिनिधि भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जबकि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधियों ने इस समस्या के निदान का भरोसा मथुरा वासियों को दिया था।

यूरो किड्स स्कूल की निदेशक निधि शर्मा ने कहा कि बंदरों की समस्या से निजात दिलाने के लिए उनकी नसबंदी की जाए। उसके बाद मंकी सफारी में उन्हें रखा जाए। एक स्थान से पकडकर दूसरे स्थान पर छोड़ देना समस्या का हल नहीं है। यह सिर्फ धन की बरबादी है। नगर निगम द्वारा लंबे समय से इस विकल्प को अपनाने के बाद भी बंदरों की समस्या जस की तस बनी है।

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