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Mathura News: मोबाइल की लत दे रही कलर ब्लाइंडनेस का रोग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Jul 2025 01:11 AM IST
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Mobile addiction is causing color blindness
मथुरा। जिला अस्पताल में मरीज की जांच करते वरिष्ठ नेत्र परीक्षण अ​धिकारी। - फोटो : mathura
मथुरा। मोबाइल, लैपटॉप का स्क्रीनिंग टाइम आंखों की कोशिकाओं पर बुरा असर डाल रहा है। इसका असर बच्चों की रंगों को पहचानने की क्षमता पर पड़ रहा है। वे कलर ब्लाइंडनेस जैसी समस्या की चपेट में आ रहे हैं।
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चिकित्सकों का कहना है कि सामान्य आंख का आकार 20 से 23 मिलीमीटर और पुतली का आकार 10 से 12 मिलीमीटर होता है। परंतु अब कई बच्चों में आंखों का आकार 18 से 19 मिलीमीटर और पुतली का आकार 8 से 9 मिलीमीटर तक देखा जा रहा है। यह बदलाव आंखों की सेहत के लिए गंभीर चेतावनी है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 70 से 80 मरीज आ रहे हैं। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत मरीज 12 से 25 वर्ष आयु वर्ग के हैं।
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डिजिटल युग में मोबाइल और लैपटॉप बच्चों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गए हैं, लेकिन यह आधुनिकता अब उनकी आंखों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञ का कहना है कि बच्चों में मोबाइल की लत आंखों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा रही है। लगातार स्क्रीन देखने के कारण रेटिना प्रभावित हो रहा है और आंखों तथा पुतलियों के आकार में असामान्य परिवर्तन देखा जा रहा है।
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नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरेंद्र राठौर बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के बाद से बच्चों और युवाओं में मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) और हाइपरमेट्रोपिया (दूर दृष्टि दोष) के मामले तेजी से बढ़े हैं। ये रोग पहले आमतौर पर 35 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में देखे जाते थे, लेकिन अब ये समस्या कम उम्र के बच्चों में भी देखने को मिल रही है।

केस एक
मसानी के पास रहने वाले एक व्यक्ति का 11 साल का बेटा मोबाइल पर कार्टून देखने का लती हो गया। आंखों में समस्या होने पर अब डाक्टर ने चश्मा लगाने के लिए कहा है।


केस दो
औरंगाबाद की महिला अपनी 16 वर्षीय बेटी को लेकर अस्पताल में पहुंची और कहा कि कोरोना के समय ऑनलाइन पढ़ाई की। इससे उसकी आंखों में परेशानी होनी शुरू हो गई। अब उनकी बेटी को कलर ब्लाइंडनेस की समस्या हो गई है।

ऐसे करें बचाव
बच्चों को मोबाइल कम से कम दें।
कंप्यूटर, टीवी या मोबाइल देख रहे हों तो उचित दूरी बना कर रखें।
दिन में तीन से चार बार अपनी आंखों को ठंडे पानी से अच्छी तरह से धोएं।
धूप या किसी धूल-मिट्टी वाली जगह पर जाएं तो चश्मा पहनें।
समय-समय पर आंखों का चेकअप कराते रहें।
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