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यमुना मिशन कमेटी को आदेश बताकर नगर निगम को कर रहा है गुमराह
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मथुरा। पौधरोपण की सुरक्षा के लिए बनाई गई कमेटी को यमुना मिशन आदेश बताकर गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। यह कमेटी तत्कालीन नगर आयुक्त रविंद्र कुमार मांदड ने बनाई थी। इसमें तीन पार्षद, दो नगर निगम के अफसर और दो हरित यमुना फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं को रखा गया था। यमुना मिशन ने नोटिस के जवाब के साथ कमेटी के आदेश की एक कॉपी को भी सौंपा है।
१८ जनवरी २०२१ में २० एकड़ में जयसिंहपुरा में किए जा रहे पौधरोपण को लेकर तत्कालीन नगर आयुक्त ने यह कमेटी बनाई थी। यमुना मिशन के कार्यकर्ताओं को भी इसमें इसलिए शामिल किया गया कि यह पौधरोपण में सहयोगी रहेंगे। सहायक नगर आयुक्त राजकुमार मित्तल का कहना है कि पिछले पांच साल से नगर निगम इस जमीन पर पौधरोपण कर रहा है।
इसमें तीन पार्षद श्याम सिंह, मीरा अग्रवाल, सुमित वर्मा, एक्सईएन सिविल नगर निगम, प्रभारी संपत्ति, हरित यमुना मिशन फाउंडेशन के कार्यकर्ता अरुण शर्मा और देवेंद्र शर्मा को रखा गया था।
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उन्होंने बताया कि कमेटी का मकसद यह था कि २० एकड़ पर पौधरोपण नगर निगम ने किया था। उसकी सुरक्षा के लिए यह कमेटी बनाई गई थी। उसमें यमुना मिशन भी सहयोगी रहा। इसका फायदा उठाकर यमुना मिशन, नगर निगम को गुमराह कर रहा है। जमीन पर पौधरोपण के सहारे कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। शीघ्र ही यमुना मिशन के सभी अधिकार समाप्त किए जाएंगे। जल्द ही यह रिपोर्ट नगर आयुक्त अनुनय झा को सौंपी जाएगी। उसके बाद यमुना मिशन संस्था के प्रमुख प्रदीप बंसल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। मालूम हो कि प्रदीप बंसल की तरफ से नगर निगम को सौंपे जवाब में यही कहा गया है कि उनके पास पौधरोपण की अनुमति है।
२८ को है एनजीटी में सुनवाई
सामाजिक कार्यकर्ता बिहारी लाल चतुर्वेदी ने एनजीटी में याचिका दाखिल की थी, जिसमें २८ फरवरी को सुनवाई होनी है। प्रदूषण विभाग, प्रशासन, सिंचाई विभाग, नगर निगम व प्राधिकरण आदि से जवाब मांगा गया है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि पेड़ लगाने की आड़ में यमुना किनारे कच्चा-पक्का निर्माण करके कब्जा किया रहा है।
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१८ जनवरी २०२१ में २० एकड़ में जयसिंहपुरा में किए जा रहे पौधरोपण को लेकर तत्कालीन नगर आयुक्त ने यह कमेटी बनाई थी। यमुना मिशन के कार्यकर्ताओं को भी इसमें इसलिए शामिल किया गया कि यह पौधरोपण में सहयोगी रहेंगे। सहायक नगर आयुक्त राजकुमार मित्तल का कहना है कि पिछले पांच साल से नगर निगम इस जमीन पर पौधरोपण कर रहा है।
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इसमें तीन पार्षद श्याम सिंह, मीरा अग्रवाल, सुमित वर्मा, एक्सईएन सिविल नगर निगम, प्रभारी संपत्ति, हरित यमुना मिशन फाउंडेशन के कार्यकर्ता अरुण शर्मा और देवेंद्र शर्मा को रखा गया था।
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उन्होंने बताया कि कमेटी का मकसद यह था कि २० एकड़ पर पौधरोपण नगर निगम ने किया था। उसकी सुरक्षा के लिए यह कमेटी बनाई गई थी। उसमें यमुना मिशन भी सहयोगी रहा। इसका फायदा उठाकर यमुना मिशन, नगर निगम को गुमराह कर रहा है। जमीन पर पौधरोपण के सहारे कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। शीघ्र ही यमुना मिशन के सभी अधिकार समाप्त किए जाएंगे। जल्द ही यह रिपोर्ट नगर आयुक्त अनुनय झा को सौंपी जाएगी। उसके बाद यमुना मिशन संस्था के प्रमुख प्रदीप बंसल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। मालूम हो कि प्रदीप बंसल की तरफ से नगर निगम को सौंपे जवाब में यही कहा गया है कि उनके पास पौधरोपण की अनुमति है।
२८ को है एनजीटी में सुनवाई
सामाजिक कार्यकर्ता बिहारी लाल चतुर्वेदी ने एनजीटी में याचिका दाखिल की थी, जिसमें २८ फरवरी को सुनवाई होनी है। प्रदूषण विभाग, प्रशासन, सिंचाई विभाग, नगर निगम व प्राधिकरण आदि से जवाब मांगा गया है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि पेड़ लगाने की आड़ में यमुना किनारे कच्चा-पक्का निर्माण करके कब्जा किया रहा है।