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अब नालियों में नहीं जाएगा हजारों लीटर दूध
अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 28 Jun 2016 11:36 PM IST
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दूध
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गोवर्धन में गिरिराजजी की शिला पर चढ़ने वाला दूध अब नालियों में बहकर बर्बाद नहीं होगा। दूध को टैंकों में इकठ्ठा कर शोधित करने के बाद इसे पशु उपयोगी बनाकर वितरित करने की योजना है।
दूध के पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) की यह योजना खाद्य विभाग ने तैयार की। बता दें कि छह माह पहले नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट करनाल (एनडीआरआई) के विशेषज्ञों की टीम भी गिरिराज नगरी का निरीक्षण कर चुकी है। इसमें प्रशासनिक अफसरों के साथ बैठक के बाद दूध को दोबारा प्रयोग में लाने की योजना तैयार की गई। इस प्रोजेक्ट को अंजाम देने का खाद्य विभाग ने ब्रज प्लानिंग एंड डेवलपमेंट बोर्ड के तहत कार्य कराने का आग्रह मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण से किया था।
मंगलवार को एमवीडीए में बैठक आहूत की गई। इसमें जतीपुरा मुखारबिंद, दानघाटी मंदिर और मानसी गंगा मुखारबिंद पर चढ़ाए जाने वाले दूध को टैंकों में इकट्ठा करने के साथ ही एक स्थान पर प्रोसेसिंग के लिए चर्चा की गई।
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गोवर्धन में गिरिराज शिला पर हजारों लीटर दूध चढ़ता है जो नालियों में जाता है। इससे आस्था को तो ठेस पहुंचती ही है, दुर्गंध से श्रद्धालु परेशान होते है। हमारा प्रयास मंदिर प्रबंधन से समन्वय कर दूध को उपयोगी बनाने का है। इसके लिए एनडीआरआई की टीम भी निरीक्षण कर चुकी है। आगे की प्रक्रिया और तेज की जा रही है।
- सीपी सिंह
उपाध्यक्ष, एमवीडीए
योजना के मुख्य बिंदु
- दानघाटी, जतीपुरा और मानसीगंगा मुखारबिंद पर बनेंगे टैंक
- गिरिराज शिला पर चढ़ने वाले दूध को टैंकों में किया जाएगा भंडारित
- तीनों स्थानों के दूध को एक स्थान पर किया जाएगा प्रोसेस
- प्रोसेसिंग का भार, शोधित दूध की बिक्री की जिम्मेदारी भी उठाएंगे मंदिर प्रबंधन
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दूध के पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) की यह योजना खाद्य विभाग ने तैयार की। बता दें कि छह माह पहले नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट करनाल (एनडीआरआई) के विशेषज्ञों की टीम भी गिरिराज नगरी का निरीक्षण कर चुकी है। इसमें प्रशासनिक अफसरों के साथ बैठक के बाद दूध को दोबारा प्रयोग में लाने की योजना तैयार की गई। इस प्रोजेक्ट को अंजाम देने का खाद्य विभाग ने ब्रज प्लानिंग एंड डेवलपमेंट बोर्ड के तहत कार्य कराने का आग्रह मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण से किया था।
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मंगलवार को एमवीडीए में बैठक आहूत की गई। इसमें जतीपुरा मुखारबिंद, दानघाटी मंदिर और मानसी गंगा मुखारबिंद पर चढ़ाए जाने वाले दूध को टैंकों में इकट्ठा करने के साथ ही एक स्थान पर प्रोसेसिंग के लिए चर्चा की गई।
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गोवर्धन में गिरिराज शिला पर हजारों लीटर दूध चढ़ता है जो नालियों में जाता है। इससे आस्था को तो ठेस पहुंचती ही है, दुर्गंध से श्रद्धालु परेशान होते है। हमारा प्रयास मंदिर प्रबंधन से समन्वय कर दूध को उपयोगी बनाने का है। इसके लिए एनडीआरआई की टीम भी निरीक्षण कर चुकी है। आगे की प्रक्रिया और तेज की जा रही है।
- सीपी सिंह
उपाध्यक्ष, एमवीडीए
योजना के मुख्य बिंदु
- दानघाटी, जतीपुरा और मानसीगंगा मुखारबिंद पर बनेंगे टैंक
- गिरिराज शिला पर चढ़ने वाले दूध को टैंकों में किया जाएगा भंडारित
- तीनों स्थानों के दूध को एक स्थान पर किया जाएगा प्रोसेस
- प्रोसेसिंग का भार, शोधित दूध की बिक्री की जिम्मेदारी भी उठाएंगे मंदिर प्रबंधन