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तापमान बढ़ने से घटा दुग्ध उत्पादन
अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 17 May 2016 11:10 PM IST
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दूध
- फोटो : getty images
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हर तरफ सूखे जैसे हालात हैं। भीषण गर्मी का असर दुधारू पशुओं पर भी पड़ रहा है। इस कारण इन दिनों दुग्ध उत्पादन काफी घट गया। इस मौसम में पशुओं को हरा चारा भी नहीं मिल पा रहा है। डेयरियों पर भी मांग के अनुसार दूध नहीं पहुंच पा रहा है।
प्रदेश के दुग्ध उत्पादक जिलों में मथुरा अग्रणी है, लेकिन इस वक्त यहां भी मांग के अनुसार दूध उत्पादन नहीं हो पा रहा है। दरअसल गर्मियों में पशुओं के लिए पानी और हरे चारे की किल्लत हो गई है। बढ़ते तापमान के कारण पशु परेशान भी हो रहे हैं। इससे दूध का उत्पादन बड़ी तेजी के साथ घट रहा है।
पशु चिकित्सक डा. लक्ष्मण सिंह सिसौदिया का कहना है कि पशुओं को गर्मी से बचाएं और छायादार ठंडे स्थान पर ही बांधे। पानी की कमी होने से और गर्मी में भूख कम लगने से दुग्ध का उत्पादन गिरता है। ऐसे में पशुओं के आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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ये रहेगा फायदेमंद
-पशुओं को शाम के समय नहलाएं।
-पशुओं के बांधने के स्थान पर छाया हो।
-पानी की कमी न होने दें।
-हो सके तो पुराना भूसा दें।
-नया भूसा पानी से धोकर दें।
किलनी से करें बचाव
किलनी कीट पशुओं पर चिपका रहता है और उनका खून चूसता है। इसके अंडे पशुओं के बांधने के स्थान पर गिर जाते हैं। बाद में ये पनप कर फिर से पशुओं के शरीर पर चिपक जाते हैं। इनसे बचाने के लिए पशुओं को नियत स्थान से हटा कर दूसरे स्थान पर बांधे। उनके बांधने के नियत स्थान पर चूना पाउडर का छिड़काव करें। 10 से 15 दिन के अंदर चार से पांच बार चूना पाउडर डालने से किलनी से निजात मिल सकती है।
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प्रदेश के दुग्ध उत्पादक जिलों में मथुरा अग्रणी है, लेकिन इस वक्त यहां भी मांग के अनुसार दूध उत्पादन नहीं हो पा रहा है। दरअसल गर्मियों में पशुओं के लिए पानी और हरे चारे की किल्लत हो गई है। बढ़ते तापमान के कारण पशु परेशान भी हो रहे हैं। इससे दूध का उत्पादन बड़ी तेजी के साथ घट रहा है।
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पशु चिकित्सक डा. लक्ष्मण सिंह सिसौदिया का कहना है कि पशुओं को गर्मी से बचाएं और छायादार ठंडे स्थान पर ही बांधे। पानी की कमी होने से और गर्मी में भूख कम लगने से दुग्ध का उत्पादन गिरता है। ऐसे में पशुओं के आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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ये रहेगा फायदेमंद
-पशुओं को शाम के समय नहलाएं।
-पशुओं के बांधने के स्थान पर छाया हो।
-पानी की कमी न होने दें।
-हो सके तो पुराना भूसा दें।
-नया भूसा पानी से धोकर दें।
किलनी से करें बचाव
किलनी कीट पशुओं पर चिपका रहता है और उनका खून चूसता है। इसके अंडे पशुओं के बांधने के स्थान पर गिर जाते हैं। बाद में ये पनप कर फिर से पशुओं के शरीर पर चिपक जाते हैं। इनसे बचाने के लिए पशुओं को नियत स्थान से हटा कर दूसरे स्थान पर बांधे। उनके बांधने के नियत स्थान पर चूना पाउडर का छिड़काव करें। 10 से 15 दिन के अंदर चार से पांच बार चूना पाउडर डालने से किलनी से निजात मिल सकती है।