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जयगुरुदेव मेले में बही अध्यात्म की रसधारा

Sat, 21 May 2016 11:45 PM IST
अमर उजाला मथुरा
अमर उजाला मथुरा Updated Sat, 21 May 2016 11:45 PM IST
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mela in jaygurudev temple mathura
जयगुरुदेव मेले में बही अध्यात्म की रसधारा - फोटो : अमर उजाला
बाबा जयगुरुदेव भंडारा सत्संग-मेला के अंतिम दिन राष्ट्रीय उपदेशक सतीश चंद्र ने कहा कि ‘भजन न होई है, तामस देही।’ तामसी विचारधारा से साधना नहीं होती है। आध्यात्मिक विद्या नैतिक मूल्यों पर आधारित होती है। जितना ही नैतिक मूल्य ऊंचा होगा, उतना ही साधन भजन में तरक्की होती है। 
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उन्होंने कहा कि बाबा ने महानतम उच्च आदर्श पर जीवन जीने के लिए शाकाहारी-सदाचारी बनाने का अभियान चलाया। जब भारत में आध्यात्मिक ऊर्जा पैदा हो जाएगी तब इसको विश्व गुरु कहा जाएगा। आत्मा यानी सुरत को देह बंधन से छुटकारा धरती की कोई चीज नहीं करा सकती है। यह केवल संत सत्गुरु अपनी कृपा दया से कर सकते हैं।
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डा. करुणाकान्त ने कहा कि बाबा जयगुरुदेव लोगों से कहा करते थे कि यदि तुम्हारे काम कोई न आवे तो तुम यह कह कर देखना कि फलां जगह हम गए थे और आपका दर्शन किए थे अब हमारा कोई साथी नहीं है। बाबू राम ने कहा सत्संग वचनों को गौर से सुनना चाहिए।
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यदि आप सोचोगे कि ये वचन पुराने हैं, हम सुन चुके हैं, तब मस्तिष्क में बारीक कीड़ा घुस जाता है और भक्ति भाव में कमी आ जाती है। मेले में अब तक बीस जोड़ों का दहेज रहित विवाह संपन्न कराया गया।
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