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संघर्ष से नहीं संवाद से होगा मथुरा-काशी मुद्दे का हल: योगी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jan 2024 12:38 AM IST
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Mathura-Kashi issue will be resolved through dialogue, not conflict: Yogi
ब​च्चियों को दुलारते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
वृन्दावन। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि और ज्ञानवापी विवाद का हल संघर्ष से नहीं संवाद से होगा। प्रदेश की हर बड़ी समस्या का समाधान होगा। वे सोमवार को वात्सल्य ग्राम में साध्वी ऋंतभरा के षष्ठीपूर्ति महोत्सव में बोल रहे थे।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आधी आबादी की सशक्ति के लिए क्या अभियान चलना चाहिए, उसका मूर्तरूप वात्सल्य ग्राम में देखने को मिल रहा है। महिलाएं लंबे समय से कुप्रथा की शिकार रहीं हैंं, लेकिन यहां बालिकाओं का सैनिक स्कूल खोले जाने से बच्चियां और सशक्त होंगी। उन्होंने कहा समाज को सशक्त और समर्थ होना है, तो नारी शक्ति की सुरक्षा, उनके सम्मान और स्वावलंबन के बिना संभव नहीं है। इसके लिए हम सभी को जुटना पड़ेगा।
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देश के अंदर सैनिक स्कूलों की परंपरा उत्तर प्रदेश में 1960 में प्रारंभ हुई थी, जब डॉक्टर संपूर्णानंद मुख्यमंत्री थे। उन्होंने देश का पहला सैनिक स्कूल लखनऊ में स्थापित किया था। मुझे 2017 में लखनऊ के सैनिक स्कूल जाने का अवसर मिला था। मैंने वहां पूछा था कि यहां बालिकाओं का प्रवेश है तो, उन्होंने कहा कि नहीं। तो मैंने कहा कि अगले सत्र से इसमें बालिकाओं का भी प्रवेश हो। वर्ष 2018 में इस कार्यक्रम को हमने वहां पर प्रारंभ किया। सैनिक स्कूल बालक- बालिकाओं के मन में सेना का अनुशासन ला रहा है। जीवन का यह अनुशासन और सैन्य शक्ति का अनुशासन हम सबको आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के 2047 तक विकसित भारत का संकल्प पूरा करने के लिए प्रत्येक भारतवासी को प्रण लेना चाहिए। हजारों वर्ष पूर्व पुष्पक विमान से प्रभु राम अयोध्या आए थे आज वहां का पूरा इंन्फ्रास्ट्रक्चर बदल गया है। छह-छह लेन की सड़क बन गई है। संत परमानंद महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी अन्याय नही कर रहे वह अत्याचारियों को निपटा रहे हैं।

राममंदिर निर्माण साध्वी ऋतंभरा के योगदान को भुला नहीं सकते
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि श्री राममंदिर के निर्माण में साध्वी ऋतंभरा के योगदान को भुलाया नही जा सकता। रामजन्म भूमि आंदोलन को उन्होंने धार देने का काम किया। भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी के पास समय नहीं हैं, परंतु साध्वी ऋतंभरा ने समाज के उत्थान के लिए काम किया, वह राष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है। उन्होेंने कहा कि हजारों विदेशी वृंदावन आकर यहीं के बनकर रह गए। क्यों कि यहां भगवान राधाकृष्ण की भक्ति और वातावरण में शांति इसका बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि साध्वी ऋतंभरा के कहने पर ही वृंदावन में वात्सल्य के इस आंगन में बालिकाओं के सैनिक स्कूल का लोकार्पण हुआ है। इस मौके जगदगुरू रामानंदाचार्य, राम भद्राचार्य, संत विजय कौशल महाराज, गुरु शरणानंद, गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज, गुरु मां आनंद मूर्ति, केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति आदि ने संबोधित किया। संचालन योग गुरु बाबा रामदेव ने किया। इस अवसर पर केबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण, विहिप संरक्षक दिनेश कुमार, विहिप के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, जीएलए विवि. के कुलाधिपति नारायणदास, रविकांत गर्ग, संजय भैया, जयभगवान अग्रवाल, सुमनलता, कल्याणी दीक्षित आदि मौजूद रहे।




मोदी के पीएम बनने पर ही अयोध्या में साकार हो रहा राम मंदिर
वृंदावन। अपने जन्मदिन पर आयोजित षष्ठी पूर्ति महोत्सव में साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि माता-पिता ने उनका नाम निशा रखा था। गुरु युगपुरुष स्वामी परमानंद महाराज द्वारा पहले ज्ञान ज्योति और दीक्षा प्रदान करने पर उन्होंने ऋतंभरा नाम दिया। उन्होंने अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए मेरे सतगुरु दीनदयाल काग से हंस बनाते हैं...भजन पेश किया।
उन्होंने कहा कि उनके गुरु ने मंत्र दिया कि जो बटोरा जाता है वो विषाद होता है, जो बांटा जाता है वह प्रसाद होता है। निश्चल प्रेम के अतिरिक्त कुछ श्रेष्ठ नहीं होता। उन्होंने भावुक मन से गुरुदेव के दिए मंत्र को कविता में पिरोकर सुनाया..प्रेम प्यार के हीरे मोती दोनों हाथ लुटाओ, जिसका पकड़ो हाथ साथियों उसका साथ निभाओ.। उन्होंने कहा कि वह जब अयोध्या को देखती थी तो चित्त में शूल सा लगता था कि लखनऊ का वैभव और अयोध्या की वीरानी व्याकुल कर देती थी। यह भारत की धरती का भाग्य है कि नरेंद्र मोदी जैसे प्रधानमंत्री मिल गए और राम मंदिर का निर्माण हुआ।


उन्होंने कहा कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने जब भारत की परंपरा को निभाते हुए राफेल पर स्वास्तिक चिह्न बनाकर नारियल फोड़ा तो दुनिया ने बहुत हल्ला मचाया। उन्होंने कहा कि जब वह यूपी के मुख्यमंत्री थे तो फैशन शो को भारत की परंपरा में अशोभनीय बताया था तो उन्होंने प्रदेश में फैशन शो पर रोक लगा दी थी। उन्होंने कहा कि जब रामजन्मभूमि आंदोलन में मंहत अवेद्यनाथ महाराज के सानिध्य लड़ाई लड़ी, तब दिगंबर अखाड़ा के रामचंद्र परमहंस महाराज और अवेद्यनाथ महाराज का मिलन होता थाबौर अयोध्या की धरती पर हंसी के फुहारे फूटते थे। बड़ी समस्याओं के समाधान हल हो जाते थे। उनकी परंपरा के वाहक योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने से सनातनियों के चित्त में छाई निराशा दूर हो गई और आशा के दीप जल गए।
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